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सास-बहू की लड़ाई में दो को तीन वर्ष की सजा

Sun, 19 Feb 2017 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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court disitoin, lalitpur news - फोटो : demo
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थाना जखौरा अंतर्गत ग्राम चक लालौन में सास-बहू के विवाद में गांव के दो व्यक्तियों को बहू के साथ मारपीट कर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करना भारी पड़ गया। जनपद न्यायाधीश सुभाष चंद्र शर्मा की अदालत ने मारपीट व दलित उत्पीड़न के मामले में आरोपी बनाए गए दोनों अभियुक्तों को दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 21-21 सौ रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भी भोगना होगा। 
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प्रभारी शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव के अनुसार आठ वर्ष पूर्व ग्राम चक लालौन निवासी जयंती अहिरवार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि 25 मार्च 2009 को वह अपने पति शीतल के साथ ग्राम नदनवारा से अपने घर आकर सामान उठा रही थी कि उसकी सास शीलाबाई उसे सामान उठाने से रोकने लगी, जिस पर अपनी सास से सामान नहीं उठाने का कारण पूछा, तो उसकी सास उसे गाली देने लगी और गांव में जाकर देवेंद्र सिंह व वीरन को उकसाया। जिस पर उक्त दोनों लोगों ने उसे लाठियों से मारापीटा व जान से मारने की धमकी देने लगे और उसके साथ जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया। बीच-बचाव करते समय उसके देवर देशराज का मोबाइल व उसके तीन हजार रुपये और मंगलसूत्र व पायल गिर गई, जो बाद में नहीं मिली।

इस मारपीट के मामले में जयंती के हाथ की हड्डी टूट गई थी, जिस पर पुलिस ने पीड़िता की तहरीर पर गालीगलौज कर मारपीट करने और जान से मारने की धमकी के मामले में रिपोर्ट पंजीकृत कर ली थी, जबकि बाद में चिकित्सीय रिपोर्ट में हड्डी टूटने पर मारपीट की धाराओं में वृद्धि कर 24 अप्रैल 2019 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। शनिवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर जनपद न्यायाधीश ने अपना निर्णय सुनाते हुए इस मामले में सास शीला को दोष मुक्त करते हुए बरी कर दिया। जबकि दोनों ग्रामीण देवेंद्र व वीरन को मारपीट कर गालीगलौज करने, जान से मारने की धमकी देने और व एससी एसटी एक्ट में दोषी पाते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 2100-2100 रुपए का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
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