ललितपुर। आईजी कानपुर जोन ने फोन धारकों को ‘एक नंबर भरोसे का’ देकर 24 घंटे में समस्या के निस्तारण की सुविधा दे दी है, लेकिन गरीब और दूरदराज से आने वाले फरियादियों की समस्या हल होने के बजाय और बढ़ गई है। स्थिति यह है कि अब फरियादियों को विभाग में ज्यादा तव्वजो नहीं दिया जाता है। यानी, गरीबों व अशिक्षितों से पुलिस की दूरी और बढ़ गई है।
जनपद मुख्यालय और सभी थाना क्षेत्रों के पुलिस कर्मी एक नंबर भरोसे का से संबंधित शिकायतों के निस्तारण में व्यस्त हैं। ऐसे में यदि कोई गरीब फरियादी शिकायत लेकर थाने पहुंचता है तो पुलिस कर्मी उसे प्रार्थना पत्र लिखवा कर आने की नसीहत देकर चलता कर देते हैं। इन हालातों में उन फरियादियों को बेहद परेशानी उठानी पड़ती है, जिन्हें तत्काल पुलिस की सहायता की आवश्यकता है।
आमतौर पर गरीब और अशिक्षित लोग परेशान होने की स्थिति में ही न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचते हैं। इसमें से अधिकांश तो ऐसे होते हैं, जिनके पास प्रार्थना पत्र लिखवाने के लिए भी पैसे भी नहीं होते, लेकिन थानों से मायूसी हाथ लगने पर उन्हें आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। क्योंकि, वह आवेदन पत्र लिखवाने के लिए कचहरी की ओर भटकना पड़ता है, जहां लिखा पढ़ी कराने में उसके सौ रुपये खर्च हो जाते हैं तथा अधिवक्ता अपने हिसाब से प्रार्थना पत्र में शिकायत का ब्योरा लिख देते हैं, लेकिन जब फरियादी वही शिकायती पत्र लेकर पुलिस के पास जाता है तो उससे प्रार्थना पत्र में लिखे तमाम सवालों के जवाब भी देने पड़ते हैं।
दूरदराज से थानों पर आने वाले गरीब फरियादियों की इस समस्या को दृष्टिगत रखते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नीलाब्जा चौधरी ने पीआरओ सेल के सहयोग से एक काउंटर सेल की व्यवस्था की थी, जिसके तहत प्रत्येक पुलिस थाने में एक काउंटर पर ‘जन शिकायत अधिकारी’ को नामित किया गया था, जो गरीब व अशिक्षित फरियादियों के प्रार्थना पत्र लिखकर उनको पावती रसीद भी देता था। नीलाब्जा चौधरी के जाने के बाद पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरि के कार्यकाल तक फरियादियों को इस सुविधा का लाभ मिलता रहा, लेकिन उनके जाने के बाद काउंटर सेल और जन शिकायत अधिकारी की व्यवस्था समाप्त हो गई, जो फरियादियों को बेहद खल रही है।
मौजूदा हालातों में ‘एक नंबर भरोसे का’ की सुविधाएं मास्टर फोन धारकों तक सीमित होकर रह गई हैं। गरीब तबके के लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
यह थे जन शिकायत अधिकारी से फायदे
आमतौर पर फरियादियों को प्रार्थना पत्र लिखवाने के लिए 10 से 20 रुपये खर्च करने होते हैं और यदि वे कचहरी तक पहुंच गए तो इसका शुल्क और अधिक हो जाता है। इतना नहीं, कु छ लोग उनकी अशिक्षा का फायदा उठाकर विपक्षी को बड़ी धारा में फंसाने का झांसा देकर काफी अधिक रुपये वसूल कर लेते हैं। ऐसे प्रार्थना पत्रों की जांच में पुलिस कर्मियों को भी परेशान होना पड़ता है। जन शिकायत अधिकारी से प्रार्थना पत्र लिखवाए जाने से वास्तविक स्थिति ही लिखी जाती थी।