ललितपुर। अपर जिला और सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाराहट थाने के ग्राम पटना में 22 वर्ष पूर्व हुए हत्याकांड में दोषी पाए जाने पर युवक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
थाना नाराहट अंतर्गत ग्राम पटना निवासी भूरा काछी ने 22 वर्ष पूर्व 29 मई 1993 को थाना नाराहट चौकी में तहरीर देते हुए बताया था कि उसकी गांव के नथू की खेत में जानवर घुसने और मना करने को लेकर आपस में लड़ाई हो गई थी, जिस पर नथू ने उसे धमकी दी थी। उसके बाद से दो दिन तक कोई बात नहीं हुई। धीरे-धीरे वह उसके घर आने-जाने लगा और सब शांति हो गई, लेकिन वह रंजिश मानने लगा।
28 मई 1993 को रात करीब नौ बजे नथू उसके घर आया, उससे व उसके भाई सूका से शिकार पर चलने को कहा। नथू के कहने पर वह, रामदयाल, भाई सूका और गांव के ही देवी खंगार के साथ शिकार पर चल दिए। इस दौरान नथू अपने हाथ में एक छुरी व टार्च लेकर शिकार पर गया। सब लोग गांव के पहले दलुआ राउत के खेत के पास पहुंचे तो उसका भाई सूका खेत में लघुशंका करने लगा। वहीं, नथू भी रुक गया।
वह लोग थोड़ी आगे पहुंचे तो अचानक पीछे से भाई सूका के चिल्लाने की आवाज आई, जिस पर सभी पीछे दौड़कर सूका के पास पहुंचे, जहां उन्होंने देखा कि नथू ने सूका पर छुरी से बार कर दिया और नथू उन सबको देख कर मौके से भाग गया। चोट गंभीर होने के कारण उसका भाई सूका जमीन पर गिर पड़ा और मौके पर ही मर गया था। चीखने-चिल्लाने की आवाज पर गांव के अन्य लोग मौके पर पहुंचे। मृतक के भाई भूरा की तहरीर पर पुलिस ने नथू के खिलाफ हत्या के आरोप में मामला दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत कर दिया।
तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। अपर सत्र न्यायाधीश हरकेश कुमार की अदालत ने बृहस्पतिवार को उक्त मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर सुनवाई करते हुए आरोप नथू को हत्या के जुर्म में दोषी पाया। इस पर न्यायाधीश ने हत्योरापी को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया। साथ ही 20 हजार रुपये अर्थदंड लगाया।
अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायाधीश ने अर्थदंड की वसूली जाने वाली आधी राशि पीड़ित के परिजनों को दिलाने के आदेश भी दिए। मामले की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने की।
न्यायालय ने किया था फरार घोषित
22 वर्ष पूर्व के इस हत्याकांड में अभियुक्त नथूू जमानत के दौरान वर्ष 2000 में फरार हो गया था। इस पर न्यायालय ने वर्ष 2003 में आरोपी को फरार घोषित करते हुए उक्त मामले की पत्रावली बंद कर अभिलेखागार में सुरक्षित रखा दी थी। छह माह पूर्व पुलिस ने अभियुक्त नथू को नासिक से गिरफ्तार किया था। अभियुक्त की गिरफ्तारी के बाद फिर से गवाहों, साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर न्यायालय द्वारा निर्णय सुनाया गया।
फरार होने पर की थी कुर्की
हत्याकांड के आरोपी नथू के फरार होने पर न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने 26 सिंतबर 2003 को उसके घर की कुर्की कराई थी। यहां तक कि जमानतदारों से भी जमानत की धनराशि वसूली गई थी।