ललितपुर/डोंगराखुर्द। सूखे से जूझ रहे जनपद में सबको मानसून का इंतजार था, मानसून ने अपनी शुरुआत में ही पूरे जनपद को जलमग्न कर दिया है। कई गांवों में भारी बारिश के बाद तबाही का मंजर पसरा हुआ है। महरौनी क्षेत्र के कई गांवों में सिर्फ पानी ही पानी दिख रहा है। सबसे ज्यादा बर्बादी का मंजर ग्राम गुढ़ा मड़ावरा गांव में देखने को मिल रहा है। बुधवार को जिलाधिकारी डा. रूपेश कुमार ने प्रशासनिक अमले के साथ गुढ़ा मड़ावरा पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। सोमवार की रात को हुई भारी बारिश के बाद उफनाए नाले ने गांव के 30 से अधिक मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। वहीं कई गायें व बकरियां बह गए। अचानक हुए जलभराव के कारण लोगों को अपनी गृहस्थी को बचाने का मौका नहीं मिल पाया।
जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर गांववालों से स्थिति के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के बीच से सुकाड़ी नाला गुजरता है। बारिश अधिक होने के कारण गांव की बंधी फट गई और नाले में अधिक पानी आ गया। जिससे 30 से अधिक घरों में पानी भर गया। ग्राम प्रधान व तहसीलदार पाली ने प्रभावित परिवारों को प्राथमिक विद्यालय में ठहराया और उनके भोजन की व्यवस्था की। ग्रामीणों ने डीएम से सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की। डीएम ने एसडीएम व तहसीलदार पाली को जल्द से जल्द सर्वे कराकर प्रभावित लोगों को राहत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस दौरान एडीएम एमके त्रिवेदी, एसडीएम पाली प्रियंका सिंह, तहसीलदार पाली अरुण कुमार श्रीवास्तव, ग्राम प्रधान इंद्रेश राजा आदि उपस्थित रहीं।
घंटो चढ़े रहे पेड़ों पर
बंधी फटने से नाले में पानी उफान पर आ गया और लोगों के घरों में भर गया। इस दौरान प्रभावित लोगों ने अपने परिजनों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। परिजनों को सुरक्षित स्थान पहुंचाकर जब ये लोग सामान निकालने पहुंचे, तो जलस्तर बढ़ने के कारण इन लोगों को पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचानी पड़ी। लखन कुशवाहा, किशोरी कुशवाहा, परमानंद कुशवाहा, हरदयाल, रामसेवक, संतोष, ग्यासी, सरजू, जगदीश, सिद्दू आदि तीन घंटे पेड़ पर चढ़े रहे। इस दौरान तीन से चार बच्चे भी अपने पिता के साथ पेड़ पर चढ़े रहे। जब गांव वालों को जानकारी हुई तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर इन लोगों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला।
महिलाओं के आंसू नहीं थम रहे
अचानक आई बाढ़ से अपने मकान व गृहस्थी गवां चुकी महिलाओं की बुरी स्थिति है। घर गवां चुकी महिलाएं प्राथमिक स्कूल में शरणार्थी के तौर पर जिंदगी बिताने को मजबूर हो रही हैं। इन महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं स्कूल में ठहरे बुजुर्गों के चेहरे पर निराशा के भाव साफ पढ़े जा सकते हैं।
अटकी बस, दूल्हा बैचेन
गुुढ़ा मड़ावरा में मंगलवार को तिवारी ट्रैैवल्स की बस रोजाना की तरह गई थी। स्टाफ सवारियों के उतरने के बाद गांव में खाना खाने चला गया, लेकिन लौटकसर आने पर उसने देखा कि नाला चढ़ चुका है और बस को निकालना मुश्किल है। जबकि इस बस से बृहस्पतिवार एक बारात को ले जाने की बुकिंग है। लड़का पक्ष के लोग बस के जाने से चिंता में है और पल पल बस मालिक को फोन करके स्थिति की जानकार ले रहे हैं।