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चार को उम्र कैद

Fri, 24 Jul 2015 11:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
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गौरतलब है कि थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बुढ़वार निवासी खेत सिंह ने ढाई वर्ष पूर्व पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उसके पुत्र दयाराम का अपनी पत्नी को लेकर गांव के ही नारायण से विवाद चल रहा था, जिसके चलते 26 मार्च 2013 को शाम चार बजे दयाराम जब खेत से घर की ओर वापस आ रहा था, तभी नाले के पास गांव के ही नारायण, गेंदालाल, पार सिंह व रूप सिंह अपने हाथों में लाठी, डंडा व सरिया लेकर आए और दयाराम को देखते ही उसके साथ गाली गलौज करते हुए सभी ने एक राय होकर मारपीट कर दी, जिसके चलते उसका पुत्र दयाराम लहूलुहान हो गया और बेहोश हो गया। चीख पुकार सुन गांव के अन्य ग्रामीण भी मौके पर आ गए। यह देख आरोपी उसे जान से मारने की धमकी देते हुए भाग गए। ग्रामीणों की मदद से वह अपने पुत्र दयाराम को बेहोशी हालत में रिपोर्ट दर्ज कराने को ले गया, जहां से उसके पुत्र को पुलिस ने चिकित्सीय परीक्षण को जिला चिकित्सालय भेजा, जहां इलाज के दौरान उसी रात 9.35 बजे जिला चिकित्सालय में ही दयाराम की मौत हो गई। खेत सिंह की तहरीर पर पुलिस ने नारायण सिंह, गेंदालाल, पार सिंह, रूप सिंह व मृतक की पत्नी गनेशी के खिलाफ धारा 323, 308, 504 व 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया था। पुलिस ने बाद में उक्त मामले में न्यायालय में आरोप पत्र विरचित किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। उक्त मामले में अभियुक्त रूप सिंह के अवयस्क होने पर उसका प्रकरण पृथक कर विचारण को किशोर बोर्ड न्यायालय भेजा गया। जहां आठ अगस्त 20013 को किशोर बोर्ड न्यायालय के आदेश में रूप से किशोर नहीं पाए जाने पर सत्र न्यायालय भेजा गया। उक्त मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) बुधवार को बुढ़वार निवासी नारायण, गेंदालाल, पार सिंह व रूप सिंह को गैरइरादतन हत्या की धारा 304 की सहपठित धारा 34 में दोषी करार दिया था। सहायक शासकीय अधिवक्ता तिलक सिंह यादव ने बताया कि अभियोजन पक्ष की दलीलों, गवाहों व साक्ष्यों के आधार पर सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए गैरइरादतन हत्या में दोषी उक्त चारों अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई दी, साथ ही प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। न्यायाधीश ने यह भी आदेश दिया कि अर्थदंड की राशि वसूल होने पर उसमें से आधी राशि पीड़ित खेत सिंह को दी जाए। उक्त मामले में आरोपी गनेशी को साक्ष्यों के अभाव में दोष मुक्त कर दिया।


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