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कच्ची शराब का गढ़ बना जनपद

Mon, 18 Jul 2016 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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sarab - फोटो : amar ujala
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ललितपुर। शनिवार को एटा जनपद में जहरीली शराब पीने से 17 लोगों की मौत के बाद चेते शासन के आदेश पर ललितपुर में कच्ची शराब के खिलाफ अभियान चलाया गया। रविवार को आबकारी व पुलिस विभाग ने मऊमाफी डेरा पर छापा मार कर सैकड़ों लीटर कच्ची शराब व लहन को नष्ट किया।
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जिलाधिकारी डॉ. रुपेश कुमार व पुलिस अधीक्षक मो. इमरान के निर्देश पर सीओ सदर बल्देव सिंह खनेड़ा, कोतवाली प्रभारी अजय पाल सिंह और आबकारी निरीक्षक पीके गिरी ने मऊमाफी में छापामार कार्रवाई की। यहां दो किलोमीटर की परिधि में कच्ची शराब बनाने का काम चल रहा था। इस दौरान 250 लीटर कच्ची शराब व 200 ड्रमों में रखे करीब 40 हजार किलोग्राम लहन को नष्ट किया गया। आबकारी विभाग द्वारा राजकुमारी, मंदाकिनी, सुनीता, मरीरा के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। दो किमी के इलाके में अवैध बिजली कनेक्शन, सबमर्सिबल, पाइप लाइन बिछी मिली।

ललितपुर। जनपद में बड़े पैमाने पर अवैध शराब का निर्माण किया जा रहा है। कबूतरों के डेरों के अलावा अनेक गांवों में भी शराब बनाई जा रही है। मुनाफे को देखते हुए अन्य लोग भी इस कार्य को अंजाम दे रहे हैं।
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जनपद की पुलिस व आबकारी विभाग ने भले ही समय-समय पर कार्रवाई कर सैकड़ों लीटर कच्ची शराब व लाखों लीटर लहन नष्ट किया हो, लेकिन प्रभावी कार्रवाई कभी नहीं हो सकी। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जनपद में एक दिन के लिए भी कच्ची शराब की बिक्री बंद नहीं हुई है।  
जनपद में कबूतरा जाति के लोग चीरा, मऊमाफी, घटवार, ऐरावनी, रजौरा, पाली, तालबेहट, टकटकी, उगरपुर, धौर्रा व लडैयामार में निवास करते हैं। यहां धड़ल्ले से शराब बनाई जाती है। योजना के तहत शराब बेचने का जिम्मा महिलाएं व बच्चे संभालते हैं। पुरुष शराब बनाने का काम करते हैं। अवैध कारोबार से होने वाले लाभ के कारण कबूतरा जाति के लोग आर्थिक तौर पर मजबूत हो गए हैँ। शानदार मकान, घर में लगे नौकर व गृहस्थी का सामान देख कर उनके रहन सहन का अंदाजा लगाया जा सकता है। खास बात यह है कि कबूतरा डेरों में रहने वाली शायद ही कोई महिला ऐसी हो, जिस पर आबकारी अधिनियम या पुलिस विभाग द्वारा मुकदमा पंजीकृत नहीं किया गया हो। जब कभी भी आबकारी विभाग या पुलिस द्वारा डेरों पर कार्रवाई की जाती है, तो वहां के सारे पुरुष फरार हो जाते हैँ। मौके पर केवल महिलाएं ही रहती हैं।
आबकारी निरीक्षक पीके गिरी बताते हैं कि कच्ची शराब के धंधे को कबूतरा जाति के लोगों ने खानदानी पेशा बना लिया है। विभागीय छापामार कार्रवाई में लाखों रुपये का नुकसान होने के बाद भी यह दूसरे दिन से ही शराब के धंधे को शुरू कर देते हैं। जनपद के बड़ेे कबूतरा डेरे अब केवल शराब बनाने का काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने फ्रेंचायजी भी देना शुरू कर दिया है। कई गांवों में डेरों पर तैयार होने वाली शराब सप्लाई की जाती है।

कानूनी पेच से बच जाते हैं अवैध कारोबारी
कबूतरा डेरों पर हजारों लीटर कच्ची शराब बरामद होने के बाद भी आरोपियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती है। कच्ची शराब बनाने व बेचने के आरोप में आबकारी अधिनियम 60 के तहत कार्रवाई की जाती है। इस धारा के तहत मौके पर या थाना स्तर से ही जमानत हो जाती है। जबकि, नकली शराब बनाने के संदेह में आरोपियों पर आईपीसी की धारा 272 व 273 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें आरोपी को जेल जाना पड़ता है। कई बार आबकारी विभाग द्वारा कच्ची शराब बनाने वालों पर आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। विभाग के अनुसार कोर्ट से जारी आर्डर में स्पष्ट लिखा गया कि शराब की जांच में मिथाइल एल्कोहल नहीं पाया गया है। इसमें एथाइल एल्कोहल था। जानकारों का कहना है कि इसी कारण आरोपी बच जाते हैं।

कई सरकारी ठेकों पर मिल रही नकली शराब
जनपद के कई ठेके ऐसे हैं, जिन पर बड़े पैमाने पर नकली शराब मिलती है। जनपद में दावनी, बुढ़वार, बार, मड़ावरा, छिपाई, रायपुर आदि गांवों में रोज सैकड़ों लीटर नकली शराब तैैयार की जाती है। इस शराब को कुछ सरकारी ठेकों पर भेजकर वहां से बेचा जाता है।

जनपद में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का निर्माण किया जाता है। रविवार को इस अवैध कारोबार पर अंकुश को बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। कबूतरा जाति के लोगों ने कच्ची शराब बनाना अपना पैतृक धंधा बना लिया है। इनकी सोच बदले बिना इस धंधे पर पूर्ण रोक लगाना मुमकिन नहीं है।  
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- एसपी पांडेय, आबकारी अधिकारी
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