अघोषित कटौती व लो-वोल्टेज ने बढ़ाई मुश्किलें
किसान हजारों रुपये का डीजल जलाकर कर रहे जनरेटर से सिंचाई
अमर उजाला ब्यूरो
डोंगराखुर्द (ललितपुर)। बिरधा विद्युत सब स्टेशन के अंतर्गत नाराहट फीडर से जुड़े दर्जनों गांवों में लो-वोल्टेज और घंटों की अघोषित बिजली कटौती के कारण किसानों को मात्र आठ से दस घंटे ही बिजली मिल रही है, साथ ही जितने समय बिजली मिल भी रही है, उस दौरान भी कई घंटों तक लो-वोल्टेज की वजह से किसानों को नलकूप विद्युत कनेक्शन लेने के बाद भी हजारों रुपये का डीजल जलाकर जनरेटर से सिंचाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
बिरधा विद्युत सब स्टेशन के अंतर्गत नाराहट फीडर से जुड़े दर्जनों गांव में वर्षों से ओवरलोड की स्थिति बनी हुई है। इसके चलते इस बार बिजली विभाग द्वारा इस फीडर को दो भागों में बांटा गया है। इसके तहत इस फीडर को काटकर नाराहट और सरखड़ी फीडर बनाया गया है। इसके बाद विभाग द्वारा आधे गांवों को रात में तो आधे गांव को दिन में बिजली आपूर्ति की जा रही है। इसके बाद भी नाराहट फीडर का ओवरलोड कम नहीं हो सका है। वहीं, शासन द्वारा गांवों को 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर तो जारी किया है, लेकिन लगातार ओवरलोड होने के कारण इस फीडर के गांवों को मुश्किल से आठ से दस घंटे ही बिजली आपूर्ति हो रही है। किसानों द्वारा हजारों रुपये खर्च करके ट्यूबवेल के स्थाई और अस्थाई विद्युत कनेक्शन लिए गए, लेकिन पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के चलते मजबूरी में किसानों को जनरेटरों का सहारा लेना पड़ रहा है और सैकड़ों किसानों को हजारों रुपये का डीजल जलाकर जनरेटर से सिंचाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है। वहीं, किसानों को डीजल से सिंचाई के बाद भी बिजली का बिल भी लगातार दिया जा रहा है। इस तरह किसान दोगुना रुपया व्यय करके फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, जिससे अधिकांश किसान कंगाली की कगार पर आ चुके हैं। फसल उपजाने में किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। किसानों ने कर्ज करके किसी प्रकार बीज, उर्वरक, कीटनाशक फसल बुबाई में हजारों खर्च किए थे और अब फसलें सिंचाई के लिए तैयार खड़ी हैं, लेकिन अघोषित कटौती व लो-वोल्टेज किसानों कोफसलों को पानी मिल पाना बड़ी चुनौती के रुप में आड़े आ रही है। कुल मिलाकर किसानी करना इस सीजन में किसानेें के लिए घाटे का सौदा साबित होता दिख रहा है। खरीफ की फसल उपजाने में जहां अन्ना मवेशियों के झुंड आई फसल उजाड़ देते हैं, तो वहीं रबी की फसल उपजाने में बिजली का अभाव बड़ी मुसीबत बना हुआ है।बताया गया कि विद्युत सप्लाई अधिकांश समय बाधित रहती है, रात्रिकालीन कटौती में तो किसानों को रतजगा भी करना पड़ता है। अनेक घरेलू बिजली उपकरण मात्र दूर दार्शनिक बनकर रह गये हैं। थोड़ी बहुत बिजली आती भी है तो बल्ब दीपक की तरह लो वोल्टेज दिखता है। इसकी कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत भी की जा चुकी है, लेकिन विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा लो-वोल्टेज की समस्या से निपटने के लिए सङखरी जमोरा फीटर बनाया तो गया, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों ने बदहाल बिजली व्यवस्था दुरुस्त कराए जाने की मांग विभागीय अधिकारियों से की है। वर्तमान में नाराहट, दिगवार, तरावली, बरेजा, महाराजपुरा, मकरीपुर, ललितापुर, बछरई, बनयाना, अर्जुन खिरिया, दौलतपुर, ङोगरा खुर्द, पटना, गुरयाना, चांदोरा, गुढ़ा-खिरिया, गदोरा, धोलपुरा, सिंगरवारा आदि ग्रामों में बिजली व्यवस्था काफी दयनीय है।
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बिजली आपूर्ति अधिकांश बाधित रहती है
आठ से दस घंटे तक ही बिजली मिल रही है। साथ ही लो-वोल्टेज आने से वजह से मोटरें नहीं चल पा रही हैं। इसी वजह सेहजारों रुपये का डीजल जलाकर सिंचाई करनी पड़ रही है।
-पुष्पेन्द सिंह, किसान, ङोगरा खुर्द।
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कर्जा लेकर कराया था कनेक्शन
सिंचाई के लिए कर्जा लेकर कनेक्शन लिया था, लेकिन बिजली कम आती है और अगर आती भी है तो बिल्कुल लो-वोल्टेज आ रहा है। ज िससे मोटर लोड ही नहीं ले पा रही है।
-गुलाब सिंह लोधी, किसान, बरेजा