बाजार में खराब कीटनाशकों की भरमार
सवालों के घेरे में दवाओं की गुणवत्ता, किसान परेशान
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। बाजारों में बिक रहे कीटनाशक खरीफ फसलों को कीटों से बचाने में कारगर नजर नहीं आ रहे हैं। कहीं खरपतवारनाशक से खरपतवार नष्ट नहीं हो रही है तो कहीं दवा के छिड़काव के बाद भी पौध रोगमुक्त नहीं हो रहे हैं। ऐसे में दवाओं पर हजारों रुपये खर्च कर चुके किसान खुद को छला सा महसूस कर रहे हैं। कई किसानों ने अफसरों से बाजार में नकली दवाओं की बिक्री होने की शिकायत की है।
जिले में पिछले साल के मुकाबले इस साल ज्यादा रकबा में खरीफ की फसल बोई गई है। जिस पर किसानों ने लाखों रुपये खर्च कर दिए हैं। वर्तमान में फसलों के बीच घास उग आई है, तो कीटों का भी प्रकोप देखा जा रहा है। जिसे ध्यान में रखकर किसानों ने फसल बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं का इंतजाम करना प्रारंभ कर दिया है। किसी ने किसान क्रेडिट कार्ड, सहकारी बैंक तो कइयों ने साहूकारों से ऋण लेकर उड़द, सोयाबीन, मूंग, मूंगफली, मक्का, तिल आदि फसल पर कीटनाशक एवं खरपतवारनाशक दवाओं का छिड़काव किया है। लेकिन कम ही फसलों पर कीटनाशक दवाओं का असर दिखाई दे रहा है। इससे हजारों रुपये कीटनाशक पर खर्च कर चुके किसानों में गुस्सा है। उनका आरोप है कि बाजार में दुकानदारों ने कारगर दवा बताकर महंगे दाम वसूल कर लिए हैं, इसके बाद भी दवा का असर नहीं दिख रहा है। इस तरह की शिकायतें अब अफसरों के पास पहुंचने लगी हैं। जिसके मद्देनजर जिला कृषि रक्षा अधिकारी डा. रामऔतार ने तालबेहट, मड़ावरा, पाली सहित कई क्षेत्रों में दवाओं के नमूने लिए हैं। जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है। उधर, ब्लाक मड़ावरा के ग्राम तिसगना के किसान परशुराम सिंह का आरोप है कि उसने छह एकड़ जमीन में उड़द की फसल बोई है। उसे उम्मीद थी कि अच्छी फसल होगी, जिससे पहले से चला रहा कर्ज चुकता हो जाएगा। लेकिन मड़ावरा से खरीदे परशूट एवं सकूरा दवा का फसल पर दुष्प्रभाव पड़ गया। खरपतवार की जगह पौधे ही मुरझाए गए। ग्राम दिगवार निवासी हरज्ञान यादव ने बताया कि उसने दस एकड़ में खरीफ फसल बोई है। जिसमें खरपतनाशक दवा डाली थी। खेत के कुछ हिस्से में ही खरपतवार नष्ट हुई बाकी में आज भी घास खड़ी है।
पटेला दवाई का नहीं हुआ असर
खेत में खरपतवारनाशक पटेला नामक दवाई डाली। जिसका खेत में असर दिखाई नहीं दिया। आज भी चार एकड़ में बोई उड़द फसल के साथ घास खड़ी है। घास इतनी ऊंची हो गई है कि अब फसल दूर नजर नहीं आती है।
जगन कुशवाहा
ग्राम डोंगराखुर्द
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दुकानों पर नहीं लगाई रेट सूची
कीटनाशक बेचने वाले दुकानदार मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने विभागीय निर्देश के बाद भी दवाओं की रेट सूची नहीं लगाई है। जिससे दवा के सही रेट का पता नहीं चलता है। जब अंगूठाटेक किसान दुकान पर पहुंचते हैं तो उनसे मनमाना रेट वसूल लिया जाता है।
अनंदी सेन
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दवाओं की रसीद नहीं रहे कई दुकानदार
दुकानदार दवाओं की बिक्री करते समय किसानों को रसीद मुहैया नहीं करा रहे हैं। इससे में गुणवत्ताहीन दवाओं की बिक्री को बढ़ावा मिल रहा है। जिस तरह से गांव-गांव से कीटनाशक दवाओं को लेकर शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, उससे इन आशंकाओं को बल मिल रहा है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी कठोर कार्रवाई से बच रहे हैं।
भागीरथ रजक
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धोखाधड़ी से बचाने के लिए करें प्रशासन कार्रवाई
इस बार मानसून सीजन में अपेक्षा से कम बारिश हुई है। जिससे कीटनाशक एवं खरपतवारनाशक से फसल को बचाना मुश्किल हो रहा है। किसान किसी तरह फसल बचाने के लिए दवा खरीद रहे हैं, उसमें भी किसानों के साथ धोखाधड़ी हो रही है। इसके बाद भी दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।
लालाराम
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दवाओं के लिए जा रहे नमूने
कीटनाशक दवाओं के संबंध में कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जिसकी हकीकत जानने के लिए लगातार छापामार कार्रवाई कर दवाओं के नमूने लिए जा रहे हैं।
डा. रामऔतार
जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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किसानों की अनाज्ञता भी पड़ रही भारी
किसानों की अज्ञानता फसल में दवा डालने में भारी पड़ रही है। कोई सही घोल नहीं बना रहा है तो किसी ने समय रहते खरपतवारनाशक दवा नहीं डाली। यह बात कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा की जांच में सामने आया है।