राजस्व न्यायालयों में राजस्व मैनुअल का नहीं हो रहा पालन
अधिवक्ताओं ने खोला राजस्व न्यायालयों में भी भ्रष्टाचार पर मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। गत दिवस जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई चकबंदी अधिकारियों व उनके साथ कर्मचारियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद अब अधिवक्ताओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। वहीं, अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन देकर आरोप लगाया है कि राजस्व न्यायालयों में राजस्व मैनुअल के अनुसार कार्य नहीं किया जा रहा है और उक्त न्यायालयों की पूरी कार्यवाही मात्र पेशकार व अहलमद के भरोसे सक्रिय है, इसमें पीठासीन अधिकारियों की कोई जबावदेही नहीं है, जिससे इन न्यायालयों में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है और बेखौफ होकर यहां भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत होती जा रही हैं।
अधिवक्ताओं ने डीएम को एक ज्ञापन देकर बताया है कि गत दिवस स्थानांतरित चकबंदी अधिकारी व उसके साथ तीन अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जो कार्रवाई की गई है, वह न्यायिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार को समाप्त करने वाली है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाते हुए बताया कि जिले की राजस्व न्यायालय में राजस्व मैनुअल का पालन नहीं हो रहा है। बहस सुने जाने के बाद निर्णय के लिए तय तारीख को फैसले नहीं सुनाए जाते हैं, फैसलों के लिए अनंत व अनिश्चितकालीन समय का इंतजार करना पड़ता है, जो भ्रष्टाचार की बड़ी वजह है। इसके साथ ही न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों के बैठने का समय भी निश्चित नहीं है। यहां पूरी कार्यवाही केवल पेशकार व अहलमद के भरोसे सक्रिय है। इस सबके लिए पीठासीन अधिकारियों की जबावदेही भी कुछ नहीं है। यदि न्यायालयों में समय व मैनुअल के अनुरूप कार्य हो सके तो काफी हद तक भ्रष्टाचार समाप्त हो सकता है। इसके साथ ही न्यायिक फैसले भी समय से न आने के कारण जनता में जो प्रतिरोध होता है और जिसकी वजह से आपराधिक घटनाएं घटी हैं, वह भी रोकी जा सकती हैं। अधिवक्ताओं ने उनकी भावनाओं के अनुरूप कार्यवाही करने राजस्व न्यायालयों को न्यायिक दृष्टि से बेहतर बनाए जाने के लिए जिलाधिकारी से आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उक्त ज्ञापन में जिला अधिवक्ता संघ के पूर्व महामंत्री अधिवक्ता राजेश देवलिया, प्रतीश तिवारी, प्रभुदयाल सेन, रामपाल निरंजन, मुकुट बिहारी रावत, राजेश कुमार चतुर्वेदी, गौरव रावत, मनोहर लाल चतुर्वेदी, जय कुमार चौधरी, सुरेश कुमार, अशोक खत्री आदि के हस्ताक्षर मिले हैं।
चकबंदी कार्यालय में जनसुविधाओं का अभाव
अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन देकर चकबंदी कार्यालय परिसर में वादकारियों के लिए जनसुविधा घर बनाए जाने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि कचहरी परिसर में चकबंदी का एससीओ कार्यालय है, जहां हर रोज जिले के सुदूर महरौनी व मड़ावरा तहसील के वादकारी आते हैं, लेकिन यहां उनके लिए यहां जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान भ्रष्टाचार के अलावा जनसुविधाओं की ओर नहीं है। वादकारियों के लिए यहां न तो पेयजल का कोई इंतजाम है और न ही प्रसाधन आदि की व्यवस्था ही है। इससे यहां विभाग में आने वाले वादकारियों को खुले में निस्तारण के लिए बाध्य होना पड़ता है। अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी से मांग की कि चकबंदी कार्यालय परिसर में पर्याप्त स्थान है और यहां शासन की मंशानुसार जनसुविधा घर बनाए जाना सुनिश्चित किया जाए।