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अदालत: आत्महत्या के लिए उकसाने वाले पति को सात साल की सजा

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आत्महत्या के लिए उकसाने वाले पति को सात साल की सजा
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11 साल पहले का मामला, झगड़ा होने पर कुएं में कूदकर दी थी जान
ललितपुर।
बालाबेहट थानाक्षेत्र के रामनगर गांव में 11 साल पहले पति से झगड़ा होने पर महिला द्वारा कुएं में कूदकर जान देने के मामले में अपर जिला और सत्र विशेष न्यायाधीश दस्यू प्रभावित क्षेत्र मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मृतका के पति को सात साल की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न अदा करने की स्थिति में छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लखन लाल यादव ने बताया कि बालाबेहट थानाक्षेत्र के पठारीखेरा गांव निवासी भागीरथ पुत्र जैसा बंजारा ने 18 मई 2011 को पुलिस को सूचना दी कि उसकी बेटी पानबाई की शादी रामनगर गांव निवासी कैलाश पुत्र कन्ना बंजारा के साथ तीन साल पहले हुई थी। 10 मई 2011 की सुबह आठ बजे पानबाई ने अपने पति से खर्च के लिए एक हजार रुपयों की मांग की। इस पर कैलाश ने असमर्थता जताते हुए रुपये न होने की बात कही। इसी बात पर पति-पत्नी में विवाद होने लगा। इस पर गुस्से में पानबाई ने कहा कि में कुएं में कूदकर आत्महत्या कर लूंगी। इस पर कैलाश ने उसे उकसाते हुए कहा कि मर के दिखा। इसी बात पर पानबाई ने गांव के बाहर स्थित कन्ना पुत्र कालू बंजारा के कुए में कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। वर्तमान में आरोपी पति जमानत पर चल रहा था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अपर जिला एवं सत्र विशेष न्यायाधीश दस्यू प्रभावित क्षेत्र मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप को सही मानते हुए मृतका के पति कैलाश को सात साल की कठोर सजा सुनाई है। इसके साथ ही पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न अदा करने की स्थिति में छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। सजा सुनाए जाते ही आरोपी को जेल भेज दिया गया।
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