गैंगेस्टर के तीन अपराधियों को सात-सात वर्ष की सजा
ललितपुर।
अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम/विशेष न्यायाधीश गिरोहबंद अधिनियम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने गैंगेस्टर एक्ट के तहत दोषी पाते हुए मध्य प्रदेश निवासी तीन अपराधियों को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि 20 अगस्त 2006 को एसओ शिवशंकर पांडे हमराहियों के साथ थाना सोजना से साढ़े बारह बजे दिन में गश्त पर थे। ग्राम गुढ़ा, भदौरा व छापछौल में उन्हें पता चला कि मध्य प्रदेश के जनपद टीकमगढ़ के थाना बड़ागांव क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम उमरी के कुख्यात अपराधी बड़े राजा उर्फ रज्जू उर्फ हरदेव सिंह उर्फ जयपाल सिंह, व सित्तू उर्फ सीताराम, जो शातिर किस्म के चोर हैं एवं अवैध शस्त्र व कारतूस रखते हैं। इनका ग्राम उमरी थाना क्षेत्र की सीमा से लगा होने व इनकी रिश्तेदारी ग्राम छापछौल में होने के कारण आवागमन रहता है। अभियुक्त बड़े रज्जू व सित्तू एक गैंग बनाए हैं, इस गैंग का नेतृत्व बड़े रज्जू करता है। उनकी तहरीर पर गैंग की आपराधिक गतिविधियों एवं गैंग चार्ट के अनुमोदन के आधार पर उक्त अभियुक्तों बड़े रज्जू एवं सित्तू के विरुद्घ गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया। विवेचना के दौरान उक्त मामले में एक अन्य अभियुक्त राममिलन का नाम भी बढ़ाया गया और न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए गए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। बृहस्पतिवार को अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायाधीश ने तीनों अभियुक्त बड़े रज्जू, सित्तू व राममिलन को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास व पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।