फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वन विभाग की पहुंच से दूर जड़ी बूटी कारोबारी

विज्ञापन
विज्ञापन
वन विभाग की पहुंच से दूर हैं जड़ी-बूटी कारोबारी
विज्ञापन

ललितपुर।
वन विभाग जिले में चल रहे जड़ी-बूटी के अवैध कारोबार पर अभी तक अंकुश लगाने में नाकाम रहा है। इसका खामियाजा सहरिया आदिवासियों को भुगतना पड़ रहा है, उन्हें कीमती जड़ीबूटी के औनेपौने दाम मिल पा रहे हैं। इस स्थिति के लिए कुछ हद तक वन निगम भी जिम्मेदार है।
बुंदेलखंड के ललितपुर जिले में जंगल का सबसे बड़ा क्षेत्र है। इसमें जड़ी-बूटी पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। इनसे कई असाध्य बीमारियों का उपचार होता है। सहरिया आदिवासियों को वनाधिकार अधिनियम के तहत जड़ी-बूटी संग्रहीत करने की आजादी दी गई है। इसके पीछे उनके भरण पोषण की व्यवस्था करना है। वन निगम सहरियों से संग्रहीत जड़ी-बूटी खरीदने के लिए बिक्री केंद्र खोलती है। लेकिन, जब से वन निगम कार्यालय झांसी स्थानांतरित हुआ है, तब से बिक्री केंद्रों को खोलने में हीलाहवाली बरती जाने लगी है। इसका अनुचित लाभ जड़ी-बूटी कारोबारी उठा रहे हैं। वर्तमान में जड़ी-बूटी का कारोबार खूब फलफूल रहा है। ललितपुर नगर में मुहल्ला आजादपुरा, इलाइट चौराहे के पास, देवगढ़ रोड, जेल चौराहा, कैलगुवां रोड के आसपास अवैध तरीके से खरीदी जा रही जड़ी-बूटी का भंडारण हो रहा है। कई कारोबारी इसकी पैकजिंग कर लाखों का व्यापार कर रहे हैं। वहीं, सहरिया आदिवासियों के हाथ चंद रुपये ही लग रहे हैं। बीते महीनों से वन विभाग की छापामार कार्रवाई थमी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इनका होता अवैध भंडारण
बेल गूदा, अर्जुन की छाल, गुरबेल, घमरा, खेर के बीज, गांद, आंवला, धतूरा, वनककरी, निबोरी, बबूल के बीज सहित दर्जनों प्रकार की जड़ी बूटी का भंडारण होता है। ललितपुर वन रेंज के दूधई, धौर्रा, देवगढ़, पाली, गौना वन रेंज व मड़ावरा वन रेंज में जड़ी बूटी पर्याप्त मात्रा में है।

संज्ञान में आने पर होगी कार्रवाई
जड़ी-बूटी के भंडारण की शिकायत जहां से प्राप्त होगी तो वहां कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सचल दल को रेकी कर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
वीके यादव, प्रभारी डीएफओ, ललितपुर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें