फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शराब सेवन से मौत के मामले में फांसी की सजा

विज्ञापन
विज्ञापन
डेरों पर धधकती रहती हैं भट्ठियां
विज्ञापन

ललितपुर।
अवैध शराब का गढ़ माने जाने वाले ललितपुर में कबूतरा समुदाय द्वारा अवैध शराब का निर्माण किया जाता है। आबकारी विभाग की ओर से लगातार दविश दिए जाने के बाद भी इन पर लगाम नहीं लग पा रही है। हालांकि ललितपुर जिले में अवैध शराब के सेवन से किसी भी व्यक्ति की मौत सामने नहीं आई है।
गौरतलब हो कि अवैध शराब कारोबारियों पर शिकंजा कसने के लिए प्रदेश सरकार ने कैबिनेट की बैठक में आबकारी अधिनियम में कुछ संशोधन किए हैं। इसमें अवैध शराब पीने से मौत होने पर सरकार ने आरोपी के खिलाफ फांसी की सजा का प्रावधान किया है। शराब कारोबारियों के खिलाफ इतना कड़ा कानून लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। इससे जहां एक ओर आबकारी विभाग को आरोपियों पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी वहीं कारोबारियों में प्रशासन का खौफ भी पैदा होगा। ललितपुर जिले में कबूतरा जाति द्वारा अवैध रूप से कच्ची शराब का निर्माण किया जाता है। इसके लिए जिले में चीरा डेरा, मऊमाफी, घटवार, धौर्रा समेत एक दर्जन गढ़ हैं, जहां पर बड़े पैमाने पर शराब बनाई जाती है। इन कुख्यात डेरों पर महुआ, लहन समेत कई पदार्थों से शराब का निर्माण किया जाता है।
विज्ञापन


आधुनिक संसाधनों का उपयोग कर बढ़ा रहे मुनाफा
अवैध शराब के धंधे में जुड़े कारोबारी आधुनिक होते जा रहे हैं। इसके लिए वह मिश्रित और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक शराब का निर्माण करने से भी नहीं चूक रहे हैं। इससे जहां एक ओर मुनाफा अधिक मिलता है वहीं कम लागत और समय में अधिक शराब का उत्पादन हो जाता है। आधुनिक होते कारोबारी स्प्रिट, यूरिया समेत कई तरह के केमिकलों से निर्मित शराब धड़ल्ले से भी बना रहे हैं। इससे जहां एक ओर जहरीली शराब बनने का खतरा भी बना रहता है। वहीं, यह शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के कारण लोग धीरे-धीरे काल के गाल में समाते चले जाते हैं।

सरकार बदलते ही आई अभियान में तेजी
सरकार बदलते ही अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में आबकारी विभाग ने तेजी लाई है। इसके लिए आए दिन होने वाली दविशों से कारोबारियों के हौसले पस्त हो रहे हैं। पिछले छह महीनों के दौरान जिले में आबकारी विभाग ने सौ से अधिक बार अवैध कारोबारियों के गढ़ पर कार्रवाई की है। वहीं हजारों लीटर कच्ची शराब बरामद की है। वहीं चीरा डेरा से स्प्रिट बरामद होने के बाद विभाग ने स्प्रिट से शराब बनाने से रोकने के लिए विशेष कार्रवाई करने पर जोर दिया है।

अन्य समुदाय भी जुड़े इस गोरखधंधे में
अवैध शराब के कारोबार में अभी तक कबूतरा समुदाय का ही प्रभुत्व माना जाता रहा है। लेकिन कम लागत में अधिक मुनाफा होने के कारण अन्य समुदाय के लोग भी शामिल हो रहे हैं। अधिकांश लोग कबूतरा समुदाय से कच्ची शराब सस्ती कीमत पर खरीदकर गांव-गांव जाकर पहुंचाने का काम करते हैं। वहीं कई जगहों पर इनका निर्माण भी किया जाता है। मड़ावरा के करीब एक दर्जन गांव जिसमें तिसगना, गोराकला, सोरई, मदनपुर, दिदोनिया, उल्दनाखुर्द, धोरीसागर, गिरार, दारुतला, पिसनारी, सीरोन, गोराकछया अवैध शराब के गढ़ बनते जा रहे हैं। मध्य प्रदेश की सीमा से सटे होने के कारण यहां कच्ची शराब के अलावा मध्य प्रदेश निर्मित शराब भी आसानी से मिल जाती है। वहीं महरौनी के पचौड़ा गांव में भी कबूतरा डेरा द्वारा अवैध शराब का निर्माण किया जाता है।

अपराध बढ़ने का डर
कबूतरा समुदाय की आय का स्रोत सिर्फ अवैैध शराब का निर्माण करके जीवकोपार्जन करना ही है। ऐसे में इन पर होने वाली कार्रवाई से इनको अपराध की ओर मुड़ने से रोकना भी पुलिस के लिए एक चुनौती है। अवैध शराब बनाने पर कार्रवाई कर रोकने से इस समुदाय के लोगों का हत्या, लूटपाट जैसी घटनाओं में बढ़ोत्तरी हो जाती है।

कानून को और मजबूत करने की मांग
आबकारी अधिकारियों की मानें तो अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ और मजबूत कानून होना चाहिए। गौरतलब हो कि अवैध शराब का निर्माण करते या फिर बेचते पकड़े जाने पर आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। लेकिन इसमें सात साल से कम की सजा का प्रावधान होने के कारण आरोपी मौके पर ही अपनी जमानत ले लेते हैं और न्यायालय से भी जल्द राहत मिल जाती है।
विज्ञापन


वर्जन
जहरीली शराब के सेवन से मौत के मामले अभी संज्ञान में नहीं आए हैं। इसको रोकने के लिए कोशिशें जारी रहती हैं। पुलिस की मदद से दविशें दी जाती रहती हैं।
एसपी पांडेय, जिला आबकारी अधिकारी

चीरा डेरा में कार्रवाई के दौरान मिश्रित शराब बनाने का केमिकल मिला था। इस कारण इन केमिकल के प्रयोग से शराब का निर्माण करवाने से रोकने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दबिशें भी निरंतर जारी रहती हैं।
संजीव तिवारी, आबकारी निरीक्षक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें