आजादी के 70 साल बाद भी साहूकारी का ‘शिकंजा’
- अधिक ब्याज वसूल कर होता मजबूरों का शोषण, आजिज हैं कर्ज लेने वाले
- महरौनी, मड़ावरा, बार, तालबेहट व ललितपुर के लोग सबसे अधिक प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। आजादी के 70 साल बाद आज भी जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में साहूकारी प्रथा जारी है। इस कारण से आए दिन कर्ज के बोझ तले दबे दर्जनों किसान व ग्रामीण आत्महत्या तक करने को मजबूर हो रहे हैं। देश में 42 वर्ष पूर्व साहूकारी अधिनियम तो बना दिया गया और उसके दायरे भी निश्चित कर दिए गए, लेकिन साहूकारी की आड़ में कई गुना ब्याज लगाकर कर्जदारों की कमर तोड़ दी जाती है।
प्रदेश में वर्ष 1976 में साहूकारी अधिनियम लागू तो हो गया। लेकिन जनपद में सहरिया समुदाय व आर्थिक रूप से पिछड़े कई लोग साहूकारों के ब्याज के तले कई पीढ़ियों से कर्जदार चले आ रहे हैं। जाखलौन, धौर्रा, मदनपुर, राजघाट क्षेत्र में ऐसे कर्जदार दर्जनों मजदूर कर्ज चुकाने के लिए बंधुआ बनकर रह गए हैं। इसी प्रकार मड़ावरा, महरौनी, तालबेहट, बार, नाराहट, पाली क्षेत्र के सैकड़ों किसान व ग्रामीण साहूकारों के बोझ तले वर्षों से दबे हुए हैं। अधिकांश किसान फसल बुवाई के लिए कीमती जेवर, ट्रैक्टर व अन्य वाहन यहां तक कि जमीन और घर तक गिरवी रख देते हैं और निर्धारित किए गए रेट के ब्याज पर कर्ज लेकर काम चलाते हैं, लेकिन 40 प्रतिशत से अधिक किसान व ग्रामीण समय पर कर्ज नहीं चुका पाते हैं और उन पर चक्रवृद्धि ब्याज लगना शुरू हो जाता है, जो हर महीने दोगुना और तीन गुना तक हो जाता है, जो मूलधन से कई गुना बढ़ जाता है और कर्जदार उसकी ब्याज के फेर में फंसा रह जाता है।
ऐसे में कई किसान तो आत्महत्या तक कर रहे हैं। यहां तक कि गल्ला व सराफा व्यापारियों का भी जनपद में साहूकार का व्यापार खूब फलफूल रहा है, जिनके घर सैकड़ों किसान कर्ज के बोझ में दबे हुए हैं और वह उन किसानों से जमकर ब्याज वसूल रहे हैं। वहीं शहरी क्षेत्र में तालाबपुरा, नदीपुरा, नेहरुनगर, रामनगर, हरदीला, पिसनारी क्षेत्र में सबसे अधिक कर्जदार जुआ और सट्टा के शौकीन हैं। यह लोग अवैैध साहूकारों से कई गुना ब्याज पर कर्ज लेकर जुटा व सट्टा खेलते हैं और फिर कंगाल होने पर वह कई प्रकार की आपराधिक गतिविधियों में भी शामिल हो जाते हैं।
यह है साहूकारी नियमावली
उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम 1976 के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना लाइसेंस के साहूकारी का काम नहीं कर सकता है। इसमें अप्रतिभूत पर 17 प्रतिशत वार्षिक और प्रतिभूत ऋण पर 14 प्रतिशत ब्याज ऋणी से साहूकार ले सकता है। लेकिन पांच हजार रुपये से अधिक ऋण कृषि के अलावा अन्य कार्य के लिए लिया हो तो उस पर आपसी तय रेट से ब्याज देय होता है। साहूकारी पंजीकरण एक वर्ष के लिए होता है और उसका प्रत्येक वर्ष नवीनीकरण अगले वर्ष के लिए कराना होता है। साहूकार प्रत्येक वर्ष की समाप्ति के एक माह पूर्व नवीनीकरण देने का प्रावधान है और प्रत्येक वर्ष की समाप्ति के दो माह बाद वार्षिक विवरणी पेश करना होता है। वर्तमान में प्रत्येक वर्ष एक अप्रैल से शुरू होकर अगले वर्ष की 31 मार्च को समाप्त होगा। साहूकारी लाइसेंस का प्रारंभ पत्र के साथ शुरू में साहूकार को मौजूदा साहूकारी का विवरण प्रस्तुत करने का नियम था लेकिन अधिनियम प्रभावी होने के बाद से अब नया साहूकारी पंजीयन के लिए आवेदन आगे व्यवसाय करने के लिए किया जाता है। नया साहूकारी पंजीयन हासिल करने में विधि के प्रावधानों में कोई अवरोध नहीं है, लेकिन व्यवहार में कई अड़चनें आती हैं।
पूरे जिले में 92 साहूकार पंजीकृत, नगर क्षेत्र में अकेले 60 साहूकार
पूरे जनपद में कुल 92 साहूकार वर्तमान में पंजीकृत चल रहे हैं, जबकि यदि शहर की ही बात करें तो सूची में 60 साहूकार अकेले नगर क्षेत्र से ही पंजीकृत हैं। इसके बाद भी हर तहसील के एक-एक गांव में दस से बारह या इससे अधिक साहूकार व्यक्ति अवैध रूप से साहूकारी का व्यवसाय कर रहे हैं, जो शासन की सूची में दर्ज नहीं हैं। बार, पाली, नाराहट, तालबेहट, जाखलौन, धौर्रा, मदनपुर, मड़ावरा, महरौनी, कैलगुवां, बानपुर आदि क्षेत्रों में जमकर अवैध रूप से साहूकारी का व्यवसाय चल रहा है और किसान व ग्रामीणों से कई गुना ब्याज पर कर्ज देकर बाद में उनका तरह-तरह से शोषण किया जाता है।
अवैध साहूकार होंगे चिह्नित, कार्रवाई के निर्देश
जिला साहूकारी रजिस्ट्रार/अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने ललितपुर, महरौनी, पाली, तालबेहट, मड़ावरा तहसील के उपजिलाधिकारियों और जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व के साथ बैठक करते हुए साहूकारों के संबंध में आवश्यकता के साथ अवैध साहूकारों, सूदखोरों का चिह्नीकरण करने के निर्देश दिए। अवैध साहूकारी पाए जाने पर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा। इसके साथ ही वैध लाइसेंस धारकों के संबंध में भी सूची तैयार कराई गई हैं। वहीं उन्होंने वैध एवं पंजीकृत साहूकार के निर्धारित दर से अधिक ब्याज वसूलते पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई कर उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। लाइसेंसधारियों की अवधि समाप्त होने पर उनके नवीनीकरण की कार्रवाई कराई जाएगी। साहूकारी लाइसेंसधारियों द्वारा गत पांच वर्षों में बैनामा कराने के संबंध में सहायक महानिरीक्षक निबंधन से जांच आख्या एक सप्ताह में देने के निर्देश दिए। साहूकारों के कार्यों के नियम से कार्य करने की जांच आख्या संबंधित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी करेंगे और वह अपर जिलाधिकारी को उपलब्ध कराएंगे। लेेखपालों के माध्यम से एसडीएम अपने क्षेत्र में खुफिया जांच कराकर ब्याज वसूलने का पता भी लगाएंगे और इसकी जांच आख्या भी एक सप्ताह में उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं बताया कि पंजीकृत साहूकारों द्वारा एक हजार रुपये की धनराशि नकद दिए जाने एवं इससे अधिक राशि दी जाती है तो वह चैक द्वारा दिए जाने का प्रावधान है। किसी साहूकार द्वारा किसानों को देय ऋण की वसूली के लिए उत्पीड़न व शोषण तो नहीं किया जा रहा है, इसकी रिपोर्ट भी मांगी। साहूकारों द्वारा लेखा-वही का नियमित रुप से रख रखाव जांचने के निर्देश भी दिए।
अवैैध रुप से साहूकारी करने वाले और गरीबों को शोषित करने वालों के विरुद्घ अधिनियम के तहत न्यायालय में कार्रवाई करते हुए मुकदमा चलाया जा सकता है, जिसमें अधिकतम दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान भी है।
सुभाष चंद्र जैन, अधिवक्ता।
अवैध रूप से साहूकारी करने वालों एवं अपंजीकृत साहूकारों को चिह्नित कर जांच आख्या तहसीलों के एसडीएम से मांगी गई है और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं। साथ ही अधिक ब्याज वसूलने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
योगेंद्र बहादुर सिंह, जिला साहूकार रजिस्ट्रार/अपर जिलाधिकारी।