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जिला में सुरक्षित नहीं बेटियां, कहीं बलात्कार तो कहीं नाबालिकों से आ रहे छेड़छाड़ के मामले

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सुरक्षित नहीं बेटियां, दुष्कर्म और छेड़छाड़ हो रही
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ललितपुर। हैदराबाद में महिला चिकित्सक के साथ बलात्कार के बाद बेरहमी से जलाकर मार डालने से पूरे देश में आक्रोश है। वहीं, जिले में एक वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो बलात्कार के पांच और पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत 26 मामले विभिन्न थानों में दर्ज हुए हैं।
बहुत से मामलों में पुलिस में सुनवाई नहीं होने पर महिलाएं और बेटियां न्यायालय की शरण लेने को मजबूर हैं। अकेले नवंबर में कोर्ट के आदेश पर बलात्कार व छेड़छाड़ के दो मामले थाना सौजना व बार में दर्ज हुए हैं। ऐसा कोई महीना नहीं गुजरता होगा, जब बेटियों के साथ बलात्कार, छेड़छाड़ की घटना न हो। इनमें कई बार तो पढ़े-लिखे नौजवान बेटियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। इस वर्ष एक जनवरी से 30 नवंबर तक बलात्कार के पांच और पॉक्सो एक्ट के 26 मामले दर्ज हुए हैं। पॉक्सो एक्ट में बलात्कार, अपहरण व छेड़छाड़ सभी प्रकार के मामले आते हैं। इस महीने में ही विभिन्न थानों के अंतर्गत बलात्कार व पॉक्सो एक्ट के तहत अलग-अलग नौ मामले दर्ज हुए हैं। इसमें से दो मामले कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए हैं।
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इनमें एक मामला थाना पाली अंतर्गत सामूहिक दुुष्कर्म व अनैतिक देह व्यापार से संबंधित है, जिसमें कोर्ट के आदेश पर दस आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। दूसरा मामला सौजना थाने के अंतर्गत कोर्ट के आदेश पर बलात्कार का दर्ज हुआ है। थाने में एक मामला छेड़छाड़ का दर्ज हुआ है। थाना कोतवाली में छेड़छाड़ और बलात्कार के तीन मामले दर्ज हुए। इन मामले से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिले में गंदी मानसिकता के लोग अब भी बहू- बेटियों को सम्मान की नजर से नहीं देखते।
न्यायालय ने सुनाई सजाएं
इस वर्ष बलात्कार व पॉक्सो एक्ट के मामलों में न्यायालय ने सजाएं भी सुनाई हैं। इनमें एक पुलिस कर्मी को लगभग साठ वर्ष की सजा सुनाई गई थी। एक नाबालिग को नशे की हालत में देह व्यापार में धकेलने के मामले में अपर जिला और सत्र न्यायाधीश उमेश कुमार सिरोही की अदालत ने इसी वर्ष मुख्य आरोपी माही उर्फ छाया सिंह परमार को आजीवन कारावास एवं एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इसी मामले में पुलिस कर्मचारी समेत तीन आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में साठ-साठ वर्ष के कठोर कारावास एवं चार-चार लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। इसी मामले में चार अन्य आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में तीस-तीस वर्ष एवं दो-दो लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। एक अन्य मामले में पॉक्सो एक्ट में दोषी पाते हुए एक आरोपी को चार वर्ष का कठोर कारावास एवं चालीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। 26 सितंबर को बलात्कार व पॉक्सो एक्ट में सुनवाई के दौरान एक आरोपी को दस वर्ष के कठोर कारावास एवं पांच लाख दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई थी। इसी प्रकार अपर सत्र न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) ने भी सात जून को बलात्कार और एससीएसटी एक्ट के मामले में सुनवाई करते हुए एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
परिवार का दायित्व है कि लड़के गलत दिशा में जा रहे हैं तो उनकी गतिविधियों पर नजर रखें। समाज का दायित्व है कि यदि इस प्रकार की घटना होती है तो पुलिस को तत्काल सूचित करें और पुलिस भी उन मामलों में अपना दायित्व निभाए। पुलिस का यह भी दायितव है कि ऐसे मामलों को फास्टट्रैक कोर्ट में अपील कर आरोपी को जल्द सजा दिलवाए।
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- कैप्टन एमएम बेग, पुलिस अधीक्षक
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अपराध खत्म तो नहीं किया जा सकता है, लेकिन नियंत्रित जरूर किया जा सकता है। तत्काल न्याय दिलाने से अपराध नियंत्रण संभव हो सकता है। यदि पुलिस जल्दी पैरवी करे तो न्यायालय से जल्द से जल्द न्याय दिलाया जा सकता है।
- खुशीलाल लोधी, अपर जिला शासकीय अधिवक्ता
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