नगर में 23,600 विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा बिजली का उपभोग किया जा रहा है। ऐसे सभी उपभोक्ताओं को विद्युत खपत के अनुसार विद्युत विभाग द्वारा हर माह मीटर सही होने पर रीडिंग और मीटर खराब होने की दशा में आईडीएफ श्रेणी का विद्युत बिल मुहैया कराया जाता है, इसके लिए नगर में एक कार्यदाई संस्था को विद्युत बिलिंग का जिम्मा सौंपा गया है। इसके तहत लखनऊ से डाटा मिलने के बाद हर माह की दस तारीख को कंपनी के मीटर रीडरों द्वारा घर-घर जाकर मीटरों की रीडिंग लेकर विद्युत बिल मुहैया कराए जाते हैं। मीटर रीडरों को विद्युत बिल बनाने के लिए विभाग द्वारा रीडिंग के अनुसार एक बिल पर 7.50 रुपए और आईडीएफ के बिल पर 3.50 रुपए मिलते हैं। लेकिन, मीटर रीडरों द्वारा विद्युत बिलों में भारी गड़बड़ी की शिकायतें लगातार विभाग को मिल रही हैं। उपभोक्ताओं को बिलों में सुधार के लिए विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार मीटर रीडरों की बिलिंग संबंधी जानकारी के लिए ऑनलाइन निकाली जाने वाली- 509 रिपोर्ट के अनुसार विगत माह जुलाई में 768 डुप्लीकेट विद्युत बिल बनाए जाने की जानकारी मिली है। इनमें उपभोक्ताओं के डबल बिल बनाए तो गए हैं, लेकिन उपभोक्ताओं तक मुहैया नहीं कराए जा सके हैं। हालांकि, इसके लिए आनलाइन निकाली जाने वाली एक अन्य रिपोर्ट- 131 के अनुसार मीटर रीडरों ने एसबीएम मशीन कब उठाई यह तक जानकारी भी की जा सकती है, जो विभाग को आसानी से उपलब्ध हो जाती है, जिसके तहत एसबीएम मशीन से बिल बनाने की संख्या और समय की जानकारी भी मिल जाती है। एक ऐसी ही रिपोर्ट में एक एसबीएम मशीन से एक घंटे में 100 बिल बनाने तक की रिपोर्ट की जानकारी प्राप्त हुई है, जिससे मीटर रीडरों की भूमिका पर सवाल खड़े होना लाजमी है। वहीं, विभागीय जानकारों के अनुसार ऐसे संदिग्ध मीटर रीडरों को उपलब्ध कराई जाने वाली एसबीएम मशीनों को अपलोड होने के बाद विभाग में जमा कराया जाना चाहिए, ताकि विद्युत बिलिंग में गड़बड़ी को रोका जा सके। यदि इसी प्रकार हर माह सात से आठ सौ विद्युत बिल फर्जी तरीके से बनाए जाते हैं तो ऐसी स्थिति में इन मीटर रीडरों द्वारा विभाग को हर माह 25 से 27 हजार रुपए का चूना लगाया जा रहा है। हालांकि, विभाग द्वारा ऐसी किसी भी गड़बड़ी की आशंका से इंकार किया जा रहा है।