ललितपुर।
जिले में लगातार तीन बार से खराब हो रही किसानों की फसल का असर दीवाली
पर्व पर होने वाली आतिशबाजी के कारोबार पर भी पड़ा है। स्थिति यह है कि इस
बार पटाखा बाजार का कारोबार पिछले साल की तुलना में करीब 30 लाख रुपये कम
रहा। ग्रामीण लोगों ने नगरीय लोगों के सापेक्ष पटाखों की बहुत कम खरीदारी
की। इससे व्यापारियों में मायूसी रहीं, लेकिन शहर क्षेत्र में ग्राहकों की
कमी नहीं रही।
जनपद लगातार प्रकृति के प्रकोप से पीड़ित है। पिछले साल
रबी की फसल अधिक पानी व ओलावृष्टि से मर गई। इस बार पानी के अभाव में खरीफ
की फसल भी बर्बाद हो गई। पानी नहीं बरसने से बांध और नदियां खाली पड़े हैं।
ऐसे में रबी की फसल पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसका असर बाजार पर भी
पड़ रहा है। दीपों के त्योहार पर पटाखा बाजार की बिक्री पिछले साल करीब
डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक रही थी। ग्राहकों की दुकानों पर आवाजाही देखकर
व्यापारियों के चेहरे खिले रहे थे।
लेकिन, इस बार हालात इसके विपरीत
हैं। इस बार दुकानों पर ग्रामीणों ने पटाखों की खरीदारी तो की है, लेकिन
पिछले साल के सापेक्ष उन्होंने बजट पर अंकुश लगाए रखा। यही कारण है कि
नगरीय लोगों के सापेक्ष उन्होंने औसतन कम खरीदारी की।
तुवन मंदिर
प्रांगण में एक सैकड़ा दुकानदारों को पटाखा लाइसेंस दिया गया है। पिछले साल
लाइसेंस दीवाली से पांच दिन पहले दे दिया गया, इस कारण व्यापारियों ने
दुकानें पहले से लगा ली थीं और बिक्री शुरू कर दी थी। लेकिन, इस बार दीवाली
के तीन दिन पहले ही दुकानदारों को लाइसेंस दिया गया। एक दिन उन्होंने
सामान लाने में लगा दिया। इस कारण बिक्री के लिए दुकानदारों को बिक्री के
लिए बहुत कम समय मिला।
हालांकि, प्रशासन ने व्यापारियों की मांग को
देखते हुए दीवाली के दो दिन बाद तक दुकानें लगाने के निर्देश दिए है।
लेकिन, व्यापारियों की मानना है कि दीवाली के बाद लोग पटाखों की खरीदारी
करना छोड़ देते हैं तो बाद के दिनों में दुकानें लगाना का क्या फायदा होगा।
व्यापारियों की मानें तो इस बार 1.20 करोड़ रुपये के आसपास बिक्री हुई।
उनका मानना है कि नुकसान नहीं हुआ, लेकिन लोगों का रुझान कम रहा, जिसमें
खासकर ग्रामीणों का।
चार व्यवसायियों ने तो नदीपुरा में पटाखों की
दुकानें लगाईं। इससे शहर के बाहरी क्षेत्र के ज्यादातर ग्राहक वहीं से
खरीदारी करके निकल गए। इससे तुवन मंदिर प्रांगण के दुकानदार खुद का नुकसान
मान रहे हैं।
महंगाई के साथ पटाखा बाजार पर सूखे
का असर रहा। ग्रामीण लोगों ने सीमित खरीदारी की। हालांकि, नगरीय लोगों ने
खरीद में कोई कंजूसी नहीं दिखाई। बाजार धीमा रहा, लेकिन संतोषजनक रहा।
पिछले साल के सापेक्ष काफी कम खरीदारी हुई।
- भरत चौरसिया, पटाखा व्यापारी दुकान नंबर 27
व्यापारियों
को लाइसेंस ऐन वक्त पर दिए गए, इससे व्यापार करने का समय कम मिला। महंगाई
का भी बाजार पर असर दिखा। प्रशासन को लाइसेंस की प्रक्रिया 15 दिन पहले
पूरी कर देनी चाहिए थी, जिससे व्यापार करने को पूरा समय मिल जाता।
- मनोज चौरसिया, पटाखा व्यापारी दुकान नंबर 18
लाइसेंस में हुई मनमानी
पटाखा
व्यवसाय करने के लिए लाइसेंस के लिए नगर के 192 लोगों ने आवेदन किया था।
इसमें से लाटरी पद्घति से 100 लोगों का चयन किया गया। प्रशासन ने इस
प्रक्रिया को पारदर्शी बताया। लेकिन, इस प्रक्रिया में मनमानी की गई। इसमें
लिपिकों ने मनमर्जी से पर्ची निकाली, जिससे कई व्यापारी नाराज रहे।
उन्होंने कर्मचारियों पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए। लेकिन, प्रशासन ने
उनके आरोप को नहीं माना।
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प्रतिबंध होने के बाद बिका काशीराम
लंबे
समय से पटाखा बाजार में छाया रहने वाले कांशीराम पटाखा की खरीद व बिक्री
पर शासन ने रोक लगा दी है। लेकिन, इसके बावजूद यह दुकानों पर खुले में खूब
बिका।
15 स्टार बिका 400 रुपए में
बच्चों को भाई फुलझड़ी, चकरी, चिटपिटी
युवाओं को पसंद आया राकेट
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
तुवन मंदिर प्रांगण में लगाए गए पटाखा बाजार में 12 सोट्स 250 रुपये तथा
15 स्टार चार सौ रुपये में बिका। बच्चों को फुलझड़ी, चकरी, चिटपिटी और गन
खूब पंसद आई तो युवाओं को राकेट ने खूब लुभाया। बुधवार को पटाखा बाजार में
खरीदारों ने जमकर खरीद की।
एक सैकड़ा पटाखों की दुकानों पर बुधवार को
भीड़ उमड़ पड़ी। हालांकि, इन ग्राहकों में ग्रामीणों की संख्या कम थी।
लोगों ने जरूरी पटाखे खरीदे। दुकानों पर 12 सोट्स 250 रुपए, 300 कान्हा 350
रुपए, फेंटा स्काई फ्लैस 450 रुपए के पांच बिके। 5 स्टार आकाश में पांच
रंग छोड़ता है, जो 180 रुपये में बिका। गोल्ड स्पीड 200 रुपये, सुतली बम 15
से लेकर 30 रुपये, चिटपिटी गन 40 से 80 रुपये, अनार बम 40 रुपये, हंड्रेड
सीएम फुलझड़ी 180 व 200 रुपये में 1000 की लड़ी, पांच से बीस रुपये तक
चकरी, पांच से डेढ़ सौ रुपये तक रॉकेट व 10 से 50 रुपये तक फुलझड़ी की खूब
बिक्री हुई। छोटे बच्चों को चकरी, चिटपिटी, चिटपिटी गन और फुलझड़ी खूब
पसंद आई तथा युवाओं ने राकेट की खरीदारी की।