ललितपुर। कोरोना काल के दौरान बीते तीन महीनों में सर्राफा बाजार काफी मंदा रहा। लॉकडाउन में जहां सराफा व्यापारियों को काफी नुकसान झेलना पड़ा, वहीं कोरोना काल के दौरान साठ फीसदी तक कारोबार प्रभावित रहा। इसकी मुख्य वजह ग्रामीण क्षेत्रों में शादियां तो हुईं, लेकिन सादगी और कोरोना गाइड लाइन के चलते छिपते छिपाते की गईं। वहीं, शहर में नब्बे फीसदी तक शादियां आगे टाल दी गईं। अब सहालग आने के चलते सर्राफा व्यापारियों को कुछ उम्मीद जरूर बंधी है, लेकिन अब भी मार्केट में मंदी बनी हुई है। गिने चुने लोग ही जेवरात लेने के लिए पहुंच रहे हैं। सर्राफा व्यापारियों के अनुसार ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। अब जब बाजार खुल गया है तो लोगों में डेल्टा वैरियंट का डर फैला हुआ है, वहीं सितंबर अक्टूबर तक तीसरी लहर की संभावना के चलते लोगों द्वारा अब बाजार में खरीददारी बढ़ गई। हालांकि, यह सहालग का अंतिम सीजन है, जिसके चलते बाजार में कुछ उम्मीद जागी है और पिछले दिनों से बाजार की स्थिति भी सुधरी है। इस संबंध में जब सर्राफा कारोबारियों से बात की, तो उन्होंने कोरोना काल में बाजार की स्थिति के बारे में बताया।
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कारोना काल व लॉकडाउन में सर्राफा बाजार की स्थिति काफी खराब रही है। इस बार सर्राफा बाजार को करीब साठ फीसदी तक नुकसान हुआ है। रेगुलर ग्राहक भी नहीं आए और सहालग में भी कोरोना काल के चलते शादियां नहीं हुई हैं, इससे मार्केट काफी डाउन रहा है। अब लॉकडाउन खुलने के बाद सहालग सीजन में कुछ उम्मीद है।
-मज्जू सोनी।
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कोरोना काल में मार्केट बहुत डाउन रहा, जबकि लॉकडाउन में तो मार्केट पूरा ही बैठ गया था। अब बाजार खुलने पर एक माह से स्थिति सामान्य हो रही है। इस बार अक्षय तृतीया पर भी मार्केट की स्थिति पचास फीसदी ही रही। शहर में तो लोगों ने सभी शादियां आगे टाल दीं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने छिपकर ही शादियां की हैं और घर में रखे हुए पुराने जेवरात को भी इस्तेमाल किया है।
अजय सोनी, सर्राफा कारोबारी।
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कोरोना काल में तो बस किसी प्रकार मार्केट चलाना भी मुश्किल रहा है। अब बाजार खुलने के बाद कुछ उम्मीद है। इस महीने सहालग होने के कारण सीजन के अंत में मार्केट में सोने चांदी की बिक्री सामान्य रहने की उम्मीद है।
-मनोज सर्राफ, सर्राफा कारोबारी।
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कोरोना काल में सभी लोग परेशान रहे हैं। सहालग होने पर भी लोगों को कोरोना से बचने को शादियां कैंसिल करनी पड़ी। शहर में काफी कम शादियां हुई हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में शादियां तो हुई हैं, लेकिन लॉकडाउन व कोरोना काल में सीमित संसाधनों के तहत ही शादियां की हैं। इसका असर बाजार पर काफी पड़ा है।