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बिजली: प्रचार-प्रसार के अभाव में फोरम से बनाई दूरी

Sun, 05 Jun 2016 02:04 AM IST
lalitpur
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इलैक्‍ट्रीस‌िटी - फोटो : demo pic
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ललितपुर। बिजली बिल संबंधी समस्याओं के निवारण के लिए बिजली विभाग में हर माह लगाए जाने वाले उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम में आवेदक कम पहुंच रहे हैं। जबकि, बिल संबंधी समस्याओं के निवारण के लिए रोजाना दर्जन भर से अधिक उपभोक्ता बिजली विभाग में भटकते रहते हैं। ऐसे में तय है कि उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम प्रचार-प्रसार के अभाव में रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है।
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बिजली विभाग हर माह उपभोक्ताओं द्वारा उपभोग की जाने वाली बिजली का बिल जारी करता है। विभाग द्वारा नियुक्त मीटर रीडर घर-घर जाकर मीटर में आने वाली रीडिंग के अनुसार या फिर मीटर खराब होने की स्थिति में आईडीएफ अथवा आरडीएफ के अनुसार बिल बनाकर उपभोक्ताओं को मुहैया कराते हैं। मीटर रीडिंग में आने वाली डिमांड के आधार पर मीटर रीडर हर माह लोड का निर्धारण कर किलोवाट के अनुसार बिल तैयार करता है। कई बार मीटर रीडर की गलती या फिर मीटरों में तकनीकी गड़बड़ी के कारण बिजली के बिल गलत बन जाते हैं। कई बार तो उपभोक्ताओं द्वारा बिल का भुगतान करने के बाद भी अगले महीने जारी होने वाले बिल में उक्त धनराशि जुड़कर आ जाती है। इतना ही नहीं, कई बार बिजली का उपयोग करने से कहीं अधिक रीडिंग दर्शाने वाले और अधिक विद्युत भार के बिल उपभोक्ताओं को थमा दिए जाते हैं। ऐसे में उपभोक्ता बिल सही कराने के लिए बिजली विभाग के चक्कर लगाता रहता है, लेकिन समस्या का निस्तारण एक बार में तो कभी होता ही नहीं है।


विद्युत उपभोक्ताओं की इस प्रकार की समस्याओं के निवारण के लिए शासन ने जिले के बिजली विभाग में हर माह की 10 तारीख को उपभोक्ता व्यथा निवारण फोरम लगाने का निर्णय लिया है। इसमें पूर्व जिला न्यायाधीश व मुख्य अभियंता कार्यालय में अधिशासी अभियंता स्तर के अधिकारियों को तैनात किया गया है। जनपद में हर माह व्यथा निवारण फोरम का आयोजन तो किया जा रहा है, लेकिन पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में उपभोक्ता जन अदालत में काफी कम संख्या में पहुंच रहे हैं। यदि गत महीनों का आकलन किया जाए तो, किसी माह सात, दस, बारह, अठारह, छह, अठ्ठाइस उपभोक्ता पहुंच रहे हैं। एक बार जरूर 39 उपभोक्ता पहुंच सके थे। कई बार तो मात्र दो उपभोक्ता ही पहुंचे हैं, जबकि बिजली विभाग में हर रोजाना दो से तीन दर्जन उपभोक्ता बिल सबंधी समस्याएं लेकर अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं। ऐसा नहीं है कि विभागीय अधिकारियों के पास पहुंचते ही उनकी समस्याओं का तत्काल निस्तारण कर दिया जाता हो। कई बार तो उपभोक्ता दो से महीने भटकने के बाद भी समस्या का निस्तारण नहीं होने से थक- हारकर विभागीय गलती को भी अपना लेता है और गलत बिलों का भी पूरा भुगतान कर देता है।
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मीटर रीडिंग में होता खेल
ललितपुर। हर माह बिजली के बिल का भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं के बिलों में कई बार रीडिंग बिजली उपभोग से काफी अधिक दर्शा दी जाती है, जिस कारण उपभोक्ताओं को बिजली विभाग के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ जाता है। यदि कोई उपभोक्ता मीटर रीडर को साध ले तो उसका बिल सही रीडिंग के अनुसार बनता रहेगा। लेकिन, जिसने इन्हें खुश नहीं किया उनका बिल गड़बड़ आना तय है।

शत-प्रतिशत नहीं होती बिलिंग
ललितपुर। मीटर रीडरों द्वारा हर माह शत-प्रतिशत बिजली के बिल नहीं बनाए जाने के कारण भी उपभोक्ताओं को कई माह का बिल एक साथ थमा दिया जाता है। ऐसे में रीडिंग और बिलों की राशि में गड़बड़ी आ जाती है और उपभोक्ताओं के मीटर सही होने के बाद भी रीडिंग के अनुसार नहीं, बल्कि फिक्स यूनिट के हिसाब से बिलों का भुगतान करना होता है।

इलेक्ट्रॉनिक मीटर में आ रही खराबी
ललितपुर। विद्युत विभाग द्वारा बिजली चोरी रोकने के लिए घरों के बाहर मीटर लगाए जा रहे हैं। घरों के अंदर लगे मीटर सही होने के बाद भी बदले जा रहे हैं, जबकि घरों के बाहर लगाए जा रहे मीटरों में भी शिकायतें मिल रही हैं। यदि मीटर बदल भी जाए तो मीटर का सीलिंग सर्टीफिकेट और मीटरों में आ रही रीडिंग को मीटर विभाग में दर्ज कराने में ही महीनों लग जाते हैं।
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