ललितपुर। परिषदीय शिक्षकों की गोपनीय आख्या बनाने के आदेश को लेकर विरोध तेज होने लगा है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बाद अब बुंदेलखंड प्राथमिक शिक्षक संघ की बैठक में इसे काला कानून बताया गया।
इस मौके पर प्रांतीय प्रवक्ता वीर दुबे ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा शिक्षकों के लिए जो नियम बनाए जा रहे हैं, वह अव्यवहारिक और शोषण करने वाले हैं। प्रांतीय महामंत्री देवेश शर्मा ने कहा कि शिक्षकों के मूल्यांकन को लेकर गोपनीय आख्या के लिए फरमान जारी हुआ है। इसमें कायाकल्प के तहत होने वाले कार्यों के लिए भी शिक्षकों के अंक निर्धारण किया जाना है, जबकि यह कार्य पंचायती राज विभाग द्वारा किए जाते हैं। संगठन के संस्थापक व झांसी जिलाध्यक्ष जितेंद्र दीक्षित का कहना है कि विद्यालयों में प्रधानाध्यापक कंपोजिट ग्रांट से कार्य करता है। इसमें मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति कर पाना ही संभव नहीं होता। वार्षिक प्रवृष्टी के लिए तय मानक सीधे तौर पर शिक्षक विरोधी हैं। जिलाध्यक्ष मनोहर सिंह बुंदेला ने कहा कि नीतियां व्यवहारिक और सकारात्मक होंगी तो उनके अनुपालन में सरलता होगी, साथ ही सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिलेंगे। जिला प्रवक्ता विशाल जैन पवा ने कहा कि महानिदेशक के आदेश के अधिकांश बिंदू पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। इस मौके पर प्रांतीय कोषाध्यक्ष उमेश बवेले, उपाध्यक्ष भारतभूषण राय, झांसी जिलाध्यक्ष अनिरुद्ध रावत, महेश जगारिया, मुजफ्फर अली, गोविंद सिंह निरंजन, रविकांत आर्य, गजराज सिंह परमार, सुरेंद्र सिंह यादव, आजाद सिंह बघेल, रामप्रकाश तिवारी, अंकित चौधरी, जितेंद्र कुमार जैन आदि मौजूद रहे।
होंगे सेमिनार
संगठन के संस्थापक जितेंद्र दीक्षित ने बताया कि 23 जनवरी को नेता जी सुभाषचंद्र बोस की 125 वीं जयंती को पराक्रम दिवस, 25 जनवरी को 11वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस और 26 जनवरी को 72 वा गणतंत्र दिवस मनाने का निर्णय लिया गया। स्कूलों में विभिन्न कार्यक्रमों के उपरांत ऑनलाइन सेमीनार का आयोजन किया जाएगा।