संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पांच माह से जिला कारागार में निरुद्ध चल रहे एनडीपीएस के मामले में सजायाफ्ता बंदी 63 वर्षीय नंदू कुशवाहा निवासी ग्राम डोंगराखुर्द थाना नाराहट की बुधवार सुबह हालत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई की। जेल प्रशासन ने पेट में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होने पर उसे जेल अस्पताल से रेफर होने के बाद मेडिकल कॉलेज भेजा था।
प्रभारी जेल अधीक्षक प्रशांत उपाध्याय ने बताया कि 31 जनवरी 2026 को नंदू और उसकी पत्नी बरखेरा बाई, तीसरे नंबर के पुत्र मिठ्ठू और पुत्रबधू चंदा को थाना नाराहट में वर्ष 2017 में दर्ज एनडीपीएस के मामले में न्यायालय के आदेश पर जिला कारागार लाया गया था। तीन फरवरी 2026 को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई और नंदू, बरखेरा बाई, मिठ्ठू और चंदा को 12-12 साल की सजा दी गई। साथ ही 1.20 लाख का अर्थदंड लगाए जाने के बाद जेल में लाया गया। तभी से वे लोग अलग-अलग बैरकों में जेल में निरुद्ध चल रहे थे। 23 जुलाई को नंदू को बुखार होने पर जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उसका इलाज चल रहा था।
बुधवार सुबह करीब 11 बजे नंदू ने जेल चिकित्सक से पेट में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत की। चिकित्सक ने उसका प्राथमिक उपचार शुरू किया, लेकिन वह अचेत हो गया। आनन-फानन में उसे मेडिकल काॅलेज रेफर किया गया। जेल पुलिसकर्मी नंदू को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां सुबह करीब पौने बारह बजे चिकित्सकों ने उसके शरीर का परीक्षण करने के बाद मृत घोषित कर दिया।
जेल प्रशासन ने आगे की कार्रवाई करते हुए नंदू की मौत होने की सूचना उसके गांव डाेंगराखुर्द में उसके अन्य तीन पुत्रों तक पहुंचाई। साथ में जेल में निरुद्ध चल रही उसकी पत्नी बरखेराबाई, पुत्र मिठ्ठू व पुत्रबधू चंदा को जानकारी दी। जानकारी होने के बाद तीनों ने रोना-चिल्लाना शुरू कर दिया। वहीं सजायाफ्ता बंदी नंदू की मौत का सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय पैनल और वीडियोग्राफी में पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
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सजा होने के बाद से चल रहा था परेशान, जेल अधीक्षक को सुनाया था दर्द
प्रभारी जेल अधीक्षक के मुताबिक नंदू ने करीब तीन-चार दिन पूर्व उनसे कहा था कि सजा के बाद वह परेशान है। उसका दर्द था कि पुत्र और पुत्रबधू सहित उसकी पत्नी जेल में 12 साल कैसे काटेंगे। इसके साथ उनके साथ निरपराध पांच साल के नाती के भी उनके साथ रहने की परेशानी साझा की थी। प्रभारी जेल अधीक्षक ने बताया कि हालांकि उन्होंने उसे समझाया था और दिलासा भी दिया था। वहीं जेल में मां चंदा के साथ रहने वाले उसके पांच साल के बेटे को जेल से बाहर निकालने के लिए उसकी जेठानी उसे गोद लेने की तैयारी कर रही थी। जिसकी प्रक्रिया चल रही थी।
मां-बेटा और बहू एक साथ मिले तो खूब रोए
नंदू की मौत होने की सूचना जेल प्रशासन ने महिला बैरक में बंद उसकी पत्नी बरखेरा बाई और पुत्रबधू चंदा और पुरुष बंदीगृह में निरुद्ध चल रहे पुत्र मिठ्ठू को दी। इसके बाद तीनों को जेल परिसर में ही एक-दूसरे से मिलाया गया। जब तीनों एक साथ मिले तो वह एक-दूसरे से लिपटकर खूब रोए और अपने भाग्य को कोसते नजर आए। हालांकि जेल पुलिसकर्मी उनको सांत्वना देते रहे।
हाईकोर्ट में जमानत के लिए किया था आवेदन
प्रभारी जेल अधीक्षक के मुताबिक नंदू और उसके परिजनों को जनपद स्तर से सजा होने के बाद उसके अन्य परिजनों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में जमानत के लिए 24 फरवरी 2026 को आवेदन दिया था, जो 28 फरवरी को स्वीकृत हो गया था। 12 मार्च को पहली तारीख हुई थी। इसके बाद हाल ही में 9 जुलाई को तारीख हुई थी।
यह था मामला
थाना नाराहट क्षेत्र के ग्राम डोंगराखुर्द में वर्ष 2017 में एक खेत में गांजे की खेती पुलिस ने पकड़ी थी। इसमें पुलिस ने नंदू कुशवाहा, बरखेराबाई, मिठ्ठू और चंदा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। जांच के बाद पुलिस ने चारों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिए थे। जनवरी माह में इस केस में फैसले की सुनवाई हुई और 31 जनवरी को चारों को दोषी करार दिया था। 3 फरवरी को चारों दोषी अभियुक्तों को 12-12 साल की सजा और 1.20 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया था। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक वर्ष अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई थी।
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जेल में निरुद्ध चल रहे सजायाफ्ता बंदी नंदू कुशवाहा जोकि जेल अस्पताल में बुखार के चलते भर्ती था ने पेट दर्द व सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत जेल चिकित्सक से की थी। जिसके बाद उसका प्राथमिक इलाज किया गया, लेकिन उसकी हालत गंभीर होती गई तो उसे मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत का सही कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा। जेल में बंद उसकी पत्नी, पुत्र व पुत्रबधू के साथ-साथ उसके गांव डोंगराखुर्द में अन्य परिजनों को इसकी सूचना दे दी गई है।
प्रशांत उपाध्याय, प्रभारी जेल अधीक्षक, जिला कारागार