ललितपुर। जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में गंदगी, टूटे स्टेचर पर जाते मरीज और कोराना मरीजों की जांच मशीन के पास ही सामान्य रोगियों का उपचार किए जाने की बड़ी लापरवाही देखकर कमिश्नर का पारा चढ़ गया। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को फटकार लगाते हुए तत्काल व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
मंडलायुक्त सुभाष चंद्र शर्मा ने आइसोलेशन वार्ड में स्थित कोरोना जांच मशीन ट्रू-नॉट को हटाकर पैथोलॉजी के पास स्थापित करने को कहा, जिससे सामान्य रोगियों को कोरोना मरीजों से दूर रखा जा सके। लगातार बढ़ रहे कोरोना वायरस संक्रमण के समय में भी जिला अस्पताल प्रबंधन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है। यहां पर बायोमेडिकल वेस्ट मैटेरियल का व्यवस्थित तरीके से निस्तारण नहीं किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण में सामाजिक दूरी का पालन नहीं किया जा रहा है। कोविड वार्ड में किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं रहती है। लेकिन, जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में संक्रमण नियंत्रण को लेकर बचाव के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
मंडलायुक्त ने निरीक्षण के दौरान आइसोलेशन वार्ड में वेंटीलेटर की जानकारी ली और उसके बाद उन्होंने पूछा कि ट्रू- नॉट मशीन कहां स्थापित है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एसके वासवानी ने बताया कि सामान्य वार्ड में है, यहीं पर कोरोना संदिग्धों की जांच की जाती है। इस पर मंडलायुक्त ने सीएमएस को फटकार लगाते हुए कहा कि जहां पर कोरोना मरीजों को भर्ती की सुविधा है, वहीं जांच की जानी चाहिए। सामान्य रोगों की जांच कराने के लिए आने वाले अधिकांश व्यक्ति वार्ड में कोरोना जांच होती देख संक्रमण से डरकर भाग जाएंगे। उन्होंने ट्रू-नॉट मशीन को आइसोलेशन वार्ड से अलग स्थापित करने के निर्देश दिए। सीएमएस से स्थान खाली नहीं होने का हवाला दिया तो उन्होंने कहा कि इतने बड़े अस्पताल में कहीं जगह खाली नहीं है। इस मशीन को शीघ्र ही पैथोलॉजी विभाग के पास में स्थापित कराया जाए। जहां पर सामान्य लोगों की जांच हो और सैंपल लिए जाएं।
उन्होंने चिकित्सकों की जानकारी ली और लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। टूटे स्ट्रेचर को ठीक कराए जाने को कहा। इस दौरान उपजिलाधिकारी सदर गजल भारद्वाज, अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. प्रताप सिंह, सीएमएस डा. एसके वासवानी आदि अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
पहले भी हो चुकी है लापरवाही
जिले में पहला कोरोना मरीज जिला अस्पताल में संविदा पर तैनात काउंसलर संक्रमित पाया गया था, संदिग्ध होने के बाद उसे प्राइवेट वार्ड में भर्ती कर लिया था, इस पर अस्पताल के सभी मरीज भाग गए थे। जिला अस्पताल के कई कर्मचारियों के सैंपल लेकर जांच की गई थी। इसी प्रकार दूसरा मरीज मोहल्ला नेहरुनगर निवासी एक महिला थी, जिसे जांच से पूर्व लक्षणों के आधार पर सैंपल लेकर संदिग्ध होने के बाद भी डिस्चार्ज कर दिया था। संक्रमण होने की पुष्टि पर अस्पताल प्रशासन के हाथ- पैर फूल गए थे, आनन- फानन में अस्पताल लाकर झांसी रेफर किया गया था।