ललितपुर। फसलों के अवशेष (पराली) जलाने से फैल रहे प्रदूषण की रोकथाम के लिए कमेटियों का गठन किया गया है, जो क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी करेंगी। पराली जलाने पर संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएंगी। इसकी निगरानी के लिए जिला स्तर से लेकर तहसील स्तर पर कमेटी का गठन किया गया है। साथ ही एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है।
खेतों में फसलों के अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण फैलता है और मिट्टी की उर्वरक क्षमता पर भी असर पड़ता है। इससे खेतों में फसलों की पैदावार पर भी असर पड़ता है। पराली जलाने पर स्थानीय थाने में संबंधित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ ही लेखपाल को जिम्मेदार माना जाएगा। जिलाधिकारी अन्नावि दिनेश कुमार ने इसके लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया है। जिला स्तर पर एडीएम वित्त व राजस्व को अध्यक्ष, अपर पुलिस अधीक्षक को सदस्य, उप कृषि निदेशक को सचिव, जिला पंचायत राज अधिकारी व जिला विद्यालय निरीक्षक को सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा तहसील स्तर पर सभी उपजिलाधिकारी व क्षेत्राधिकारी और कृषि विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को शामिल किया गया है। टीम की जिम्मेदारी होगी कि किसान किसी भी परिस्थिति में पराली न जला सकें।
कृषि विभाग पराली न जलाए जाने के लिए जागरूक करेगा
इसके लिए तहसील व ब्लॉक के सभी लेखपाल और ग्राम प्रधानों को शामिल कर एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाएगा। यदि क्षेत्र में पराली जलाई जाती है तो ग्राम प्रधान व लेखपाल व्हाट्सएप ग्रुप व फोन कर तहसील स्तर पर गठित उड़नदस्ता को सूचित करेंगे। पराली व फसलों के अवशेष को गोआश्रय स्थल पर भेजने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान व सचिव की होगी। उड़नदस्ता संबंधित थाना में प्राथमिकी दर्ज कराएगा। कृषि विभाग पराली न जलाए जाने के लिए जागरूक करेगा। स्कूल व कॉलेजों में विद्यार्थियों को प्रदूषण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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पराली जलाए जाने से रोकने के लिए कमेटी का गठन किया गया है। किसानों को जागरूक भी किया जाएगा। इसके बाद भी जलाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संतोष कुमार सविता, उप कृषि निदेशक