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जिला अस्पताल में जांचे हुईं बंद, निजी पैथोलॉजी का ले रहे सहारा

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जिला महिला अस्पताल में खिड़की पर लगी जांच न होने की सूचना - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। जिला अस्पताल के पैथोलॉजी में संविदा कर्मचारियों की अनुबंध अवधि समाप्त हो जाने से जांचें प्रभावित हो गईं हैं। यहां पर एक हजार से अधिक जांचें होती थी, लेकिन अब घटकर 100 से भी कम रह गईं हैं। बायोकेमिस्ट्री की जांचें पूरी तरह से बंद हैं। इससे मरीजों को निजी पैथोलॉजी पर जांच कराना पड़ रही है। गरीब तबके के मरीज मायूस होकर लौट रहे हैं। एक कर्मचारी के भरोसे चल रही है पैथालॉजी।
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शासन ने जिला अस्पतालों में मरीजों को जांच की सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च करके मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। इन आधुनिक मशीनों में जांच में समय भी कम लगता है। मशीनों में एक साथ कई जांचें हो जाती हैं। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों की ओर रुख न पड़े। अस्पताल में सभी प्रकार की जांचों की निशुल्क सुविधा है। पर, संविदा कर्मियों की अवधि न बढ़ाए जाने से यह सारी सुविधाएं धरी की धरी रह गईं। अब रोगियों को जांच के लिए निजी पैथालॉजी का सहारा लेना पड़ रहा है।
शासन ने प्वाइंट ऑफ केयर टेस्टिंग कंपनी से एक वर्ष के लिए अनुबंध किया था। इससे अस्पताल में मरीजों की सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, ईएसआर, ब्लड शुगर, एचवीएवनसी, इलेट्रोलाइट जैसी महंगी जांचें अस्पताल में निशुल्क और कम समय में हो रही थी। प्रतिदिन लगभग एक हजार से अधिक मरीजों की जांचें हो रहीं थीं, लेकिन कंपनी का अनुबंध 28 फरवरी को समाप्त हो गया है। इस कारण संविदा कर्मचारियों ने काम करना बंद कर दिया है, इससे अस्पताल में जांचें भी पूरी तरह से प्रभावित हो गईं है। अस्पताल में लगी मशीनें शोपीस साबित हो रही हैं।
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अनुबंधित कंपनी के कर्मचारियों के जाने से सिलेक्ट्रा मशीन जो जांचों की सत्यता की जांच करती थी, अब इसका संचालन नहीं हो पा रहा है। बायोकेेमिस्ट्री की जांचें भी प्रभावित हो गई है। अस्पताल में एकमात्र लैब टैक्नीशियन तैनात है, जो केवल मलेरिया, एलटीसी, डीएलसी, हीमोग्लोबिन, यूरीन माइक्रोस्कोप आदि जांच करता है। जांचों की संख्या में भारी अंतर आ गया है। जहां एक घंटे में एक कर्मचारी चार जांच कर पाता है। अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा भले ही मरीज की जांच लिखी गई हो, लेकिन मरीजों को जांच की सुविधा निशुल्क नहीं मिल पा रही है। जिला महिला अस्पताल में खिड़की पर ही जांच नहीं होने की सूचना चस्पा कर दी गई है। कुछ निर्धन मरीज निजी पैथोलॉजी में रेट पूछकर बिना उपचार व जांच के अपने घर वापस हो गए। जिला अस्पताल में प्रतिदिन लगभग एक हजार जांचें होती थीं। वहीं, महिला अस्पताल में दो सौ जांच हो रही थीं। लेकिन, सोमवार को सभी प्रकार की जांचें प्रभावित रहीं।
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शासन निर्धनों को पांच लाख रुपये शक के इलाज की निशुल्क सुविधा दे रहा है, लेकिन कर्मचारियों के कमी के कारण सुविधाओं का लाभ नहीं मिदल पा रहा है। जिसका ताजा उदाहरण अस्पतालों में जांचें पूरी तरह से प्रभावित होना है। इससे मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिला अस्पताल में अपने रिश्तेदार को दिखाने के लिए आया था। चिकित्सक ने जांच कराने के लिए जांच लिखी, जो जिला अस्पताल में नहीं हो सकी।
- आकाश
अपने पुत्र को बीमार होने पर जिला अस्पताल ले आया , जहां पर जांच नहीं होने के कारण बिना इलाज के लिए वापस लौटना पड़ा।
- ग्यासी
जिला मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल इकलौती आस है। यहां पर भी मरीजों को उपचार की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
- सुनयना
महिला मरीज को लेकर जिला महिला अस्पताल में इलाज के लिए लाया, जहां पर जांच नहीं हो सकी। निजी पैथोलॉजी पर जांच कराना पड़ी।
- आनंद पटेल
जिला अस्पताल में पैथोलॉजी में कार्यरत कर्मचारियों का अनुबंध समाप्त होने से जांचें प्रभावित हो गई हैं। मशीनों के संचालन के लिए अस्पताल के अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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- डॉ. एसके वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल पुरुष
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