महरौनी (ललितपुर)। रोशनी और दीपों के पर्व पर परंपरागत मिट्टी के दीपकों की बिक्री में आयी गिरावट से कुम्हार मायूस नजर आ रहे हैं। मिट्टी के दीपकों पर चायनीज आइटम भारी नजर आ रहे हैं।
मिट्टी के बर्तन और दीपक बेचकर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले लोग इस दीवाली पर अपने सामान की कम बिक्री होने से चिंतित हैं। पिछले कुछ वर्षों से चाइनीज झालर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का चलन तेजी से बढ़ा है, जिससे मिट्टी के दीपकों की बिक्री में काफी गिरावट आयी है। इससे कुम्हारों की आजीविका पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। दीवाली पर्व पर मिट्टी के दीपक, घड़े और अन्य परंपरागत सामान फुटपाथ पर सजाए बैठे दुकानदारों को ग्राहकों का बेसब्री से इंतजार करते हुए देखा गया।
इन दुकानों पर मिट्टी के दीपक 10 रुपए में सोलह नग और छोटे मिट्टी के घडे़ 20 से 25 रुपए प्रति नग की दर से बेचे जा रहे हैं। आमतौर पर दीवाली पूजन के दो-तीन दिन पहले से ही मिट्टी के दीपकों और घड़ों की बिक्री शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार इन दुकानों पर ग्राहक नजर नहीं आ रहे हैं।
मायूस दुकानदारों ने बताया कि दीवाली को एक दिन शेष रह गया है, जबकि अभी उनकी उम्मीद के अनुरूप बिक्री नहीं हो सकी है।
इन दुकानदारों ने अपनी पीड़ा उजागर करते हुए कहा कि महंगाई के इस दौर में मिट्टी के इन बर्तनों को बनाने के लिए जरूरी चिकनी मिट्टी का बमुश्किल इंतजाम हो सका और फिर बर्तनों को पकाने के लिए ईंधन की समस्या से दो-चार होना पड़ता है, तब कहीं जाकर यह दीपक और बर्तन बनते हैं। लेकिन, बाजार में ग्राहकों की अनदेखी से दुकानदार मायूस हैं।