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उधारी में बज रही शहनाई

Fri, 25 Nov 2016 12:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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note change news - फोटो : demo
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बैंकों से रुपए निकालने के कठोर नियमों के चलते जनपद में दर्जनों परिवारों में शादी ब्याह की शहनाई उधारी में बज रही है। हर बिल पर एजेंसी या संस्थान का एकाउंट नंबर देने की अनिवार्यता के कठोर नियम के कारण  महरौनी के प्रभारी सब रजिस्ट्रार मोतीलाल को भी ढाई लाख रुपये नहीं मिल सके। उन्हें पूरी शादी उधारी में करनी पड़ रही है। 
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पांच सौ व एक हजार रुपए की नोटबंदी के बाद शादी वाले परिवारों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। बेटे या बेटी की शादी के लिए लोग बैंकों में शर्तों के मुताबिक शपथ पत्र, शादी के कार्ड, मैरिज गार्डन व हलवाई, टेंट, क्राकरी आदि के बिल भी लगा रहे हैं। साथ ही शादी के लिए दूल्हा व दुल्हन के लिए खरीदे गए हर सामान के बिलों की कॉपी भी जमा कर रहे हैं। बैंक दूल्हा व दुल्हन का पहचान प्रमाण पत्र व उनके लिए दी जाने वाली राशि के लिए उनका एकाउंट नंबर भी मांग रहे हैं। ऐसे में कुछ हद तक लोग प्रयास कर ले रहे हैं, लेकिन बहुत से लोग हताश होकर इतनी कठिन प्रक्रिया होने के चलते बैंकों से आवेदन ही वापस मांग ले रहे हैं। 
महरौनी में सब उपनिबंधन कार्यालय में तैनात प्रभारी सब रजिस्ट्रार मोतीलाल ने बेटे हेमंत की शादी के लिए बैंक से अपने ही खाते से रुपए निकालने के लिए नोटरी अधिकारी द्वारा बनाया गया शपथ पत्र, बेेटे की शादी का कार्ड, मैरिज गार्डन व अन्य व्यवस्थाओं के बिल, साड़ियों क बिल, बेटे की पहचान प्रमाण पत्र आदि लगाकर भारतीय स्टेट बैंक में ढेाई लाख रुपए निकालने के लिए आवेदन किया। लेकिन बैंक ने उन पर इतनी शर्तें थोप दीं, कि वह उन शर्तों को पूूरा नहीं कर सके और अपने ही खाते से रुपए निकालने से वंचित रह गए। ऐसे में उन्हें गत दिवस अपने बेटे की शादी महरौनी में ही उधारी में करनी पड़ी। 
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उन्होंने बताया कि बैंक वाले उनसे जितने भी बिल लगाए गए हैं, उन सभी बिलों के मालिकों का एकाउंट नंबर मांग रहे हैं। बेटे की होने वाली पत्नी का पहचान पत्र व खाता मांग रहे थे, जो शर्तें वह पूरी नहीं कर सके। इसी के चलते बैंक द्वारा उनका ढाई लाख रुपए निकालने का आवेदन निरस्त कर दिया गया है। ऐसे में उन्होंने पूरी शादी उधारी पर की है। शादी के अगले ही किन्नर भी पहुंच गए, जिन्हें उन्हें बिना बिल के ही पंद्रह हजार रुपए गिफ्ट के रुप में देने पड़े। उन्होंने बाजार से ही हजारों रुपए की सब्जी भी खरीदी, पान वाले, जूता पॉलिस वाला, गाड़ियां आदि का इंतजाम भी किया था, जिसका कोई लिखित हिसाब किताब या कोई भी पक्का बिल नहीं है। 
 बृहस्पतिवार को बेटे की शादी का रिसेप्शन है, लेकिन कैश रुपए नहीं होने के कारण उन्हें तमाम मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। अब जब एक सब रजिस्ट्रार का बैंक की इतनी कठिन प्रक्रियाओं से परेशानी हो रही है, तो ग्रामीणों व आम लोगों पर नोटबंदी व बैंक की प्रक्रियाओं के फेर में परेशानी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। 

पीएनबी दे रहा लोगों को सीख
ललितपुर। एक ओर जहां लोग शादी व अन्य जरूरी खर्चों के लिए बैंक से अपना रुपया निकालने में परेशान हो रहे हैं, वहीं पीएनबी लोगों को नोटबंदी पर बैनर पोस्टर लगाकर सीख दे रहा है। बैंक में लगाए गए बैनरों पर लिखवाया गया है कि कुछ दिन जरूरतों पर खर्च कीजिए, शौक पर नहीं, कुछ दिन समझौता कीजिए, शिकायत नहीं, कुछ दिन समझदारी दिखलाइए, गुस्सा नहीं, बस कुछ दिन ही की तो बात है दोस्तो, अपना देश बदल रहा है। इसके साथ ही बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा भी लोगों को समझाकर अनावश्यक रुपए खर्च न करने के बारे में समझाया जा रहा है।
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