परिवर्तन रैली को लेकर भाजपा की ओर से बड़े- बड़े दावे किए गए थे। दो दिन पहले आयोजित पत्रकार वार्ता में जिला मुख्यालय की रैली में दस हजार लोगों के जुटाने की बात कही गई थी। सोमवार को रैली का हाल देखकर भाजपा की स्थानीय इकाई की कार्यशैली उजागर हो गई। सभा स्थल गिन्नौट बाग में रैली के दौरान मुश्किल से हजार लोगों की भीड़ नहीं जुट पाई। लोगों के बैठने के लिए करीब एक हजार कुर्सियां लगाईं गई थी। सभा का समय दो बजे तय किया गया था, लेकिन सभा तीन घंटे देरी से शुरु हो सकी।
सभा स्थल पर लाइट की व्यवस्था नहीं की गई थी, लेकिन देरी के कारण आनन फानन में एक लाइट को मंच पर लगाया गया। जब तक यह लाइट लगती, तब तक उमा भारती को छोड़कर सबके भाषण हो चुके थे। परिवर्तन रैली का शुभारंभ देवगढ़ से होना था, लेकिन स्थानीय भाजपा नेता अपनी क्षमता को जानते थे। इस लिए उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम में भीड़ न जुटा पाने का बहाना लेते हुए कार्यक्रम को स्थगित करा लिया था।
भीड़ जोडने में भाजपाई रहे असफल
विधान सभा चुनाव के नजदीक आने पर कार्यकर्ताओं के उत्साह एवं जोश के दम पर भारी संख्या में भीड़ जुटने का अनुमान लगाने वाले भाजपा नेताओं का गणित पूरी तरह से फेल रहा। सोमवार को परिवर्तन रथ यात्रा के मौके पर होने वाली सभा के लिए भाजपाइयों ने उपजिलाधिकारी हरीओम शर्मा से तीन हजार लोगों के उपस्थित होने की अनुमति ली थी। रैली में भीड़ एकत्रित करने के लिए भाजपा के क्षेत्रीय नेताओं ने गांव गांव में काफी प्रचार किया। सोमवार को रैली में मात्र तीन सैकड़ा लोगों के मौजूद रहने से भाजपा के नेता असमंजस की स्थिति में नजर आए। देर से शुरू हुई रैली में अनुमान के मुताबिक भीड़ नहीं पहुंची। पीछें रखी काफी कुर्सिया खाली रहीं।