संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में अब संसाधन के अभाव में बच्चे कम सुनने व बहरेपन के शिकार नहीं रहेंगे। मेडिकल कॉलेज में ईएनटी विभाग ने बेरा जांच के साथ ही बच्चों की स्क्रीनिंग भी शुरू कर दी है। इससे अब बच्चों को स्क्रीनिंग व जांच के लिए कानपुर व अन्य महानगरों में नहीं जाना होगा।
जिले में अब तक जन्मजात मूकबधिर बच्चों में बहरेपन व सुनने की क्षमता की जांच की सुविधा नहीं थी। ऐसे में कानपुर, भोपाल या अन्य महानगरों में जाना पड़ता था। ऐसे में कई बच्चों के अभिभावक अधिक दूरी के चलते जांच के लिए नहीं जाते थे। इससे मूकबधिर बच्चों में कॉक्लियर इंप्लांट नहीं हो पाता था। इससे बच्चों में सुधार नहीं हो पा रहा था। महज सीमित बच्चे ही जांच व स्क्रीनिंग के बाद कॉक्लियर इंप्लांट करा पा रहे थे।
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यह है कॉक्लियर इंप्लांट
कॉक्लियर इंप्लांट एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो गंभीर रूप से बहरे या सुनने की क्षमता खो चुके बच्चों और वयस्कों को आवाज सुनने में मदद करता है। सामान्य हियरिंग एड के विपरीत, यह मशीन सीधे कान की सुनने की नसों को उत्तेजित करके काम करता है। इससे बच्चों में सुनने की क्षमता विकसित होती है। साथ ही बोलने भी लगते हैं।
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यह है बैरा जांच
बेरा (ब्रेन स्टेम एवोक्ड रिस्पांस ऑडियोमेट्री) मशीन है, जो मुख्य रूप से सुनने की क्षमता और कान से मस्तिष्क तक जाने वाली नसों की कार्यप्रणाली की जांच करने के लिए किया जाता है। इस जांच में किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है।
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मेडिकल कॉलेज में बेरा जांच के साथ ही मूकबधिर बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।
- डॉ. विशाल जैन, मीडिया प्रभारी