पाली। आधुनिकता के दौर में आज कल के बच्चों में हिंदी के पढ़ने की आदत कम होती जा रही है। बच्चों में हिंदी पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए विद्यालयों में कहानी, कविता, वाद-विवाद और लेखन जैसी रचनात्मक गतिविधियों को नियमित रूप से आयोजित किया जाना चाहिए। शिक्षकों का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में भाषा के प्रति रुचि बढ़ने के साथ उनकी अभिव्यक्ति क्षमता भी विकसित होगी। बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा के साथ-साथ हिंदी विषय भी अध्यापकों को पढ़ाना चाहिए। पेश है हिंदी प्रवक्ताओं के बातचीत के अंश...।
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यह बात सही है कि बच्चों में हिंदी पढ़ने की आदत कम होती जा रही है। इसके लिए विद्यालयों में कहानी, कविता, वाद-विवाद और लेखन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना जरूरी है। सरकार प्रत्येक विद्यालय में समृद्ध पुस्तकालय, आधुनिक डिजिटल सामग्री और शिक्षकों के बेहतर प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाए, तो हिंदी शिक्षा को नई मजबूती मिल सकती है।-मोहम्मद अली, हिंदी प्रवक्ता जिला परिषद इंटर कॉलेज पाली
बच्चों में हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए नियमित पठन-पाठन, लेखन और बोलने का अभ्यास जरूरी है। हिंदी को केवल एक विषय तक सीमित न रखकर ज्ञान, संस्कृति और अभिव्यक्ति की सशक्त भाषा के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए।-कृष्ण कुमार चौरसिया, प्रवक्ता जिला परिषद इंटर कॉलेज पाली