परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को अब जुलाई के बाद से पुरानी व खाकी रंग की यूनिफार्म पहनकर विद्यालय नहीं आना पड़ेगा। शासन ने आदेश जारी कर दिए हैं कि आगामी एक जुलाई से समस्त विद्यालयों में ड्रेस (यूनिफार्म) का वितरण कार्य शुरू कर दिया जाए और इसके 15 दिनों के भीतर पूर्ण कर लिया जाए। अब बच्चे गुलाबी चेकदार शर्ट/ कर्ता व भूरी पैंट व स्कर्ट वाली नई ड्रेस में नजर आएंगे। इससे ड्रेस माफिया को तगड़ा झटका भी लगा है।
नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 व उत्तर प्रदेश नि:शुल्क और अनिवार्य बाल अधिकार शिक्षा का अधिकार नियमावली 2011 के तहत प्रत्येक नवीन शैक्षिक सत्र में परिषदीय विद्यालयों, सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों व मदरसों, राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को दो सेट नि:शुल्क ड्रेस (यूनिफार्म) का वितरण किया जाता है। विगत 01 अप्रैल से परिषदीय विद्यालयों का नवीन शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन बच्चों को अब तक ड्रेस नसीब नहीं हो सकी है। 21 मई से शुुरू होने वाले ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म होने के बाद जब एक जुलाई से बच्चे अपने-अपने विद्यालय पहुंचेंगे तो बच्चों को पुरानी ड्रेस नहीं पहननी पड़ेगी। 01 जुलाई से समस्त परिषदीय विद्यालयों में ड्रेस वितरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और 15 जुलाई तक प्रत्येक बच्चे के पास अपनी ड्रेस होगी। इस संबंध में शासन के मुख्य सचिव राहुल भटनागर ने जिला शिक्षा परियोजना समिति को शासनादेश जारी करके गुणवत्तापूर्ण ड्रेस वितरित कराने के संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। ड्रेस वितरण का कार्य जनपद स्तरीय गठित कमेटी के संरक्षण में किया जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी होंगे, इसके अलावा सदस्यों में मुख्य विकास अधिकारी या अपर जिलाधिकारी, प्रबंधक जिला उद्योग विभाग, वरिष्ठ कोषाधिकारी, डायट प्राचार्य, डीआईओएस, जिला पंचायत राज अधिकारी रहेगें और सचिव जिला बेसिक शिक्षा रहेगें। इसके अलावा शासन ने ड्रेस की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ड्रेस को स्थानीय स्तर पर सिलवाने, कपड़े के टुकड़े को धोकर देखने व सैंपन के रुप में विद्यालय के रिकोर्ड में रखने, क्रय समिति का गठन करने, ब्लॉक स्तरीय जांच टीम गठित करने, बच्चों के नाप की ड्रेस सिलवाने समेत अन्य सख्त निर्देश दिए गए हैं।
एकाउंट पेयी चेक से होगा भुुगतान
शासन से साफ निर्देश हैं कि ड्रेस वितरण में होने वाले व्यय का कोई भी भुगतान नगद धनराशि से नहीं किया जाएगा। इस दौरान जो भी खर्चा होगा उसका पूरा भुगतान एकाउंट पेयी चेक के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा ड्रेस वितरण की कुल धनराशि का 75 प्रतिशत भुगतान शुरुआत में ही किया जाएगा और बाकी 25 प्रतिशत भुगतान करीब एक माह पूर्व किया जाएगा, ताकि इस एक माह में ड्रेस की गुणवत्ता की सही तरीके से जांच हो सके। इसके अलावा यह भी साफ कहा गया है कि यदि ड्रेस वितरण में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो इसके लिए गठित समस्त टीमों के अधिकारियों से रिकवरी की जाएगी।
ड्रेस माफिआयों को लगा झटका
शासन ने ड्रेस का रंग बदल दिया है, इससे जनपद में सक्रिय ड्रेस माफियाओं को झटका लगा है। जनपद में इस वर्ष करीब 1.80 लाख बच्चों को ड्रेस वितरित की जानी है। बीते वर्षों में वितरण के नाम पर विभागीय कागजों पर तो खानापूर्ति कर ली जाती है, लेकिन ड्रेस वितरण का काम जनपद की कुछ ही फर्म करती हैं। इन ड्रेस माफियाओं को राजनैतिक पार्टियों का भी पूरा सहयोग रहता है। यह माफिया बाहर से सस्ती व रद्दी रेडिमेट ड्रेस खरीदते हैं और यहां विद्यालयों में सप्लाई करते हैं। इस सत्र में शासन ने ड्रेस का रंग बदल दिया है, ऐसा होने से जो ड्रेस माफिया पहले से अपनी गोदामों में स्टॉक करके रखे हुए थे उनको तगड़ा झटका लगा है।
भद्दी लगती थी खाकी ड्रेस
वर्तमान में सरकारी विद्यालयों के बच्चों की जो खाकी रंग की ड्रेस है वह काफी भद्दी लगती है। गुलाबी व भूरे रंग की नई ड्रेस बच्चों को पहनने व हमें देखने में भी काफी अच्छी लगेगी।
-नन्द सिंह
स्थानीय नागरिक।
सख्ती से हो ड्रेस का वितरण
ड्रेस का वितरण सख्ती से होना चाहिए, अब तक ठेकेदारों द्वारा ही ड्रेस वितरित होती आई हैं। सस्ते दामों में खरीदी गई रेडीमेड ड्रेस जल्द ही रंग छोड़ देती हैं और सिकड़न भी आ जाती है। इससे ड्रेस देखने में काफी बेकार लगने लगती है, बच्चों का भी पहनने का मन नहीं होता है।
-दशरथ सिंह
स्थानीय नागरिक।
शासन की मंशा के अनुरूप होगा वितरण
यूनिफार्म वितरण के संबंध में शासनादेश प्राप्त हो चुका है और विभागीय तैयारियां भी शुरू हो गई है। 30 अप्रैल तक का छात्रांकन एकत्रित किया जा रहा है, अगले सप्ताह तक डिमांड शासन को भेज दी जाएगी। यूनिफार्म का वितरण शासन की मंशा के अनुरुप किया जाएगा।
-संतोष कुमार राय
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।