गौरैया का घोंसला लगाते हुए बच्चे।
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ललितपुर। वर्तमान समय में बढ़ती आबादी के कारण जंगलों का सफाया हो रहा है। इस कारण गौरैया को अपना घोंसला बनाने के लिए जगह नहीं मिल रही है। इसके लिए बच्चे आगे आ रहे हैं, वह गौरैया का घोंसला तैयार कर रहे हैं। साथ ही लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं।
पहले कच्चे मकान गौरैया के लिए प्राकृतिक वातावरण और तापमान के लिहाज से अनुकूल वातावरण उपलब्ध करते थे लेकिन आधुनिक मकानों में यह सुविधा अब उपलब्ध नहीं होती है। वहीं शहर से लेकर गांवों तक मोबाइल टावर एवं उससे निकलते रेडिएशन से इनकी जिंदगी संकट में है। इन्हें संरक्षण देने के लिए करुणा इंटरनेशनल संस्था अभियान चलाकर बच्चों को गौरैया के संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही है। करुणा इंटरनेशनल के सदस्य समर सराफ बताते हैं कि उन्होंने एक सौ गत्ते के घोंसले बनाकर विद्यालयों में लगाए हैं जिनमें गौरैया अपना घर बना रही हैं। शिक्षिका आकांक्षा विश्वकर्मा बताती हैं कि बच्चे लकड़ी के सुंदर गौरैया घरों को बनाने के साथ ही चित्रकला के माध्यम से गौरैया की सुंदर आकृतियों को भी उकेरकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। संयोजक पुष्पेंद्र जैन ने बताया कि विश्व गौरैया दिवस को लेकर बच्चे उत्साहित हैं। घरों में गौरैया घोंसला लगाकर फोटो शेयर कर रहे हैं।