सिलावन (ललितपुर)। महरौनी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम बम्होरी बहादुर सिंह गांव में एक दर्जन बच्चे चिकन पॉक्स की चपेट में हैं। एक संस्था द्वारा आयोजित सामुदायिक विकास कार्यक्रम के तहत गांव में आयोजित हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया था। हेल्थ कैंप में इसका खुलासा हुआ है।
करीब एक सप्ताह पूर्व बच्चों को यह शिकायत हुई थी, लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। मंगलवार को स्वयं सेवी संस्था जीवन ज्योति ने सामुदायिक विकास कार्यक्रम के तहत गांव में हेल्थ कैंप आयोजित किया। इस दौरान गांव के बच्चों में चिकन पॉक्स के लक्षण दिखाई दिए। बच्चों व उनके परिजनों को चिकन पॉक्स से बचाव तरीके बताए। गांव के 173 बच्चों का चेकअप कर दवाइयों का वितरण किया गया। जिन बच्चों में बीमारी के लक्षण पाए गए हैं, उनमें ग्राम बम्होरी बहादुर सिंह निवासी दीपेंद्र (15), सोनू (17) पुत्रगण काशीराम, पूजा (8) पुत्री रामकिशोर, राज (12) पुत्र रामकिशोर, मयंक (7), महक (04) पुत्रगण मुकेश, वीर प्रताप (13) पुत्र मोहनलाल, बृजेंद्र (15) पुत्र उदय प्रताप, दीपक (17) पुत्र कांशीराम और शिवा (08) पुत्री दीनदयाल हैं। रोग फैलने का सिलसिला एक सप्ताह पूर्व शुरू हुआ था। कैंप में इस मौके पर डा. सिस्टर लूड्स, डा.शिवांग उपाध्याय, सिस्टर क्लेमनटीना, पंचम, कलावती उपस्थित रहे।
स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कार्यप्रणाली पर सवाल
ग्राम बम्होरी बहादुर सिंह में चिकन पॉक्स जैसी संक्रामक बीमारी का फैलना गांव में तैनात स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग दज्वारा गांव- गांव में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की तैनाती की गई है, ताकि ग्रामीण महिलाओं और बच्चों का समय से टीकारण हो सके और गांव में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों का पता लगाकर समय से उपचार मुहैया करा सके। लेकिन, एक सप्ताह से बच्चे बीमारी से ग्रसित होने के बाद भी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
गंभीर बीमारी है चिकन पॉक्स
डा. सिस्टर लूड्स का कहना है कि चिकन पॉक्स गंभीर संक्रामक बीमारी है, जिसका वायरस एक रोगी से दूसरे रोगी तक तेजी से फैलता है। इसमें तेज बुखार के साथ शरीर में दाने निकल आते हैं। यह रोग सात दिनों में स्वत: ठीक हो जाता है, लेकिन इसका वायरस दिमाग व शरीर के अंदरुनी भागों तक फैल सकता है, जो खतरनाक साबित होता है।
यह रखें सावधानी
- रोगी को अलग कमरे में रखे
- कपड़ों को गर्म पानी में धोएं
- दूसरे बच्चों के संपर्क न रखें
- चिकित्सक से नियमित उपचार लें
इनका कहना है
ऐसी कोई जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। लेकिन, बीमारी की जांच के लिए टीम गांव में भेजी जाएगी, ताकि पीड़ितों का उपचार किया जा सके।
- डा. मुकेश चंद्र दुबे
मुख्य चिकित्साधिकारी।