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Lalitpur News: तीर्थंकर ऋषभदेव के मोक्ष जाने की घोषणा होते ही गूंजे जयकारे

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ललितपुर/मड़ावरा। श्री दिगंबर जैन आदिनाथ अतिशय क्षेत्र गिरारगिरी में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव का बुधवार को रथोत्सव के साथ समापन हो गया। इस दौरान सुबह भगवान ऋषभदेव को मोक्ष की प्राप्ति होते ही जयकारे गूंजने लगे। चर्या शिरोमणि, आध्यात्मिक संत आचार्य विशुद्ध सागर महाराज के सानिध्य और ब्र. जय कुमार निशांत, पंडित सनत कुमार, विनोद कुमार जैन के प्रतिष्ठाचार्यत्व में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में सुबह मोक्ष कल्याणक की क्रियाएं की गईं। सुबह पात्र शुद्धि, अभिषेक, शांतिधारा, नित्य महापूजन किया गया। तीर्थंकर भगवान को सुबह 7.24 बजे मोक्ष की प्राप्ति हुई। जैसे ही तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान के मोक्ष जाने की घोषणा प्रतिष्ठाचार्य ने की तो जयकारों से आकाश गुंजायमान हो गया। इस दौरान मोक्ष कल्याणक की पूजा हुई। वहीं विश्व शांति महायज्ञ में पूर्णाहुति दी गई। इस मौके पर बंडा के विधायक तरवर सिंह लोधी, पूर्व विधायक सुनील जैन सागर ने आचार्यश्री का आशीर्वाद लिया।
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इसके बाद निकाली गई रथयात्रा में आचार्य विशुद्ध सागर महाराज 27 साधुओं के साथ शामिल रहे। प्रमुख रथ पर श्रीजी विराजमान थे। वहीं अन्य रथों पर पंचकल्याणक के पात्र भगवान के माता-पिता राजेश जैन, रचना जैन, सौधर्म इंद्र -सुनील कुमार नेहा जैन, कुबेर सुनील कुमार जैन, विधि नायक डॉ. बालचंद, कमल कुमार, महायज्ञ नायक विनोद कुमार जैन, यज्ञ नायक सिंघई आशीष जैन, ईशान इंद्र प्रकाश चंद सिंघई, सनत कुमार इंद्र राजेंद्र राजू, माहेंद्र इंद्र नीरज जैन शास्त्री, राजा श्रेयांस आनंद जैन, राजा सोम दीपचंद, भरत चक्रवर्ती अभिषेक कुमार जैन, दीपू चौधरी, बाहुबली प्रदीप जैन, मड़ावरा, लांतव इंद्र जिनेंद्र जैन, कापिष्ठ आशीष चौधरी, महाशुक्र कमल जैन, शुक्रेंद्र अंकित कोठिया, सतारेंद्र इंजी. विशेष जैन, आणतेंद्र कैलाश चंद्र, महामंडलेश्वर सिंघई प्रकाशचंद्र, राजेश जैन, सेठ कमलेश, सुरेश चंद्र, त्रिलोक जैन, आशीष, विनोद जैन, मुकेश सिलोनिया मंगलगान करते हुए चल रहे थे।

चरमोत्कृष्ट आस्था है मोक्ष : विशुद्ध सागर महाराज
आध्यात्मिक संत आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने कहा कि वास्तव में मोक्षगमन जैन दर्शन के चिंतन की चरमोत्कृष्ट आस्था है। जो प्रत्येक हृदय में फलित होना चाहिए। मोक्षगमन को देखना इस निश्चय को दोहराना है कि जीवन के सभी कार्य तब तक सफल नहीं कहे जा सकते जब तक उसका अंतिम लक्ष्य मोक्षगमन न हो। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर भगवान कषाय, काय से रहित हुए, अभी हम इन दोनों से युक्त हैं। मोक्ष के उपरांत आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन, अनंत सुख और अनंत शक्ति में आ जाती है। ऐसी आत्मा को सिद्ध कहते हैं।
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ये रहे मौजूद
अतिथियों का स्वागत महामहोत्सव एवं ट्रस्ट कमेटी अध्यक्ष संतोष जैन, महा महोत्सव के महामंत्री अजित जैन, आशीष चौधरी, प्रकाश जैन,आलोक जैन, प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष विनोद चंदेरिया, महामंत्री अभिषेक जैन दीपू , कोषाध्यक्ष मुकेश जैन, महा महोत्सव कार्यकारी अध्यक्ष प्रकाश चंद्र ,चक्रेश जैन, राजेंद्र जैन, राकेश जैन, कोषाध्यक्ष जिनेंद्र जैन, कमलेश जैन, वीरेंद्र जैन, राजेश जैन, देवेंद्र, त्रिलोक जैन, प्रीतेश जैन, मयंक जैन, प्रदीप जैन मड़ावरा, नीरज शास्त्री ने किया।
आचार्य संघ का नवागढ़ महोत्सव के लिए हुआ पद विहार
प्रचार मंत्री डॉ. सुनील संचय ने बताया कि आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ससंघ का पद विहार बुधवार को पंचकल्याणक महोत्सव संपन्न होने के बाद नवागढ़ महोत्सव के लिए हो गया। रात्रि विश्राम ग्राम खुटगुवां हुआ। बृहस्पतिवार को आहारचर्या श्री शांतिनाथ अतिशय क्षेत्र कारीटोरन में होगी।
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