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Lalitpur News: फर्जी चिकित्सक मामले में पति-पत्नी के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल

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ललितपुर। अमेरिका में रह रहे बहनोई की पहचान और डिग्री का इस्तेमाल कर मेडिकल कॉलेज में करीब तीन साल तक हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में नौकरी करने वाले अभिनव सिंह और उसकी पत्नी लवीना सिंह के खिलाफ पुलिस ने करीब 200 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। कोतवाली पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज होने के 255 दिन बाद अंतिम विवेचना पूरी कर आरोपपत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल किया। दोनों अभियुक्त फिलहाल जिला कारागार में बंद हैं। अब इस मामले में अदालत में सुनवाई होगी।
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पुलिस के अनुसार, अभिनव सिंह ने अमेरिका में रह रहे अपने बहनोई डॉ. राजीव गुप्ता की पहचान और शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। इन्हीं के आधार पर वह मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग विशेषज्ञ के पद पर तैनात हुआ और करीब तीन वर्ष तक मरीजों का इलाज करता रहा। मामले का खुलासा होने के बाद 10 दिसंबर 2025 को कोतवाली में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने 12 दिसंबर को उसे गिरफ्तार कर लिया था।
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने अभिनव की नियुक्ति और शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की। जांच टीम ने मथुरा के छाता स्थित मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2019 में उसकी नियुक्ति से संबंधित अभिलेख खंगाले। इसके अलावा आईआईटी रुड़की से संबंधित शैक्षणिक दस्तावेज, ललितपुर सिंचाई विभाग में अधिशासी अभियंता रहे उसके पिता चंद्रपाल सिंह की सेवा फाइल और नगरपालिका समेत अन्य विभागों में डॉ. राजीव गुप्ता के नाम से प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की भी जांच की गई।
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पत्नी भी निकली फर्जी डॉक्टर
जांच आगे बढ़ने पर अभिनव की पत्नी लवीना सिंह की भूमिका भी सामने आई। पुलिस के अनुसार, अभिनव की बहन डॉ. दीपाली गुप्ता और उसके पति डॉ. राजीव गुप्ता अमेरिका के फ्लोरिडा में रहते हैं। अभिनव और लवीना ने दोनों के मेडिकल दस्तावेज हासिल कर उनमें कूटरचना की और उनका इस्तेमाल अपने लिए किया। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लवीना ने मध्य प्रदेश के बीना क्षेत्र में चिकित्सक के रूप में नौकरी की।
लवीना के खिलाफ भी पुलिस ने साक्ष्य जुटाए। इस साल 14 मई को तत्कालीन एसपी ने उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके बाद 21 मई को कोतवाली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। दोनों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की गहनता से जांच की।

कई शहरों से जुटाए अभिलेख
पूरे प्रकरण की जांच एसआईटी कर रही थी। जांच टीम ने अभिनव सिंह के शैक्षणिक और नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की पड़ताल के लिए कोलकाता, मथुरा, रुड़की, फर्रुखाबाद और अलीगढ़ समेत कई स्थानों से अभिलेख जुटाए। लवीना की भूमिका सामने आने के बाद मिर्जापुर, मेरठ और बीना से भी उसके दस्तावेज संकलित किए गए। इन सभी अभिलेखों और अन्य साक्ष्यों को विवेचना में शामिल किया गया।

बहन की शिकायत से खुला फर्जीवाड़ा
मामले का खुलासा दिसंबर 2025 में हुआ था। अमेरिका से आईं डॉ. सोनाली सिंह ने जिलाधिकारी और मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति डॉ. राजीव गुप्ता की पहचान और डिग्री का इस्तेमाल कर उनके भाई अभिनव सिंह मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में नौकरी कर रहे हैं।
शिकायत के बाद जिलाधिकारी ने एडीएम वित्त एवं राजस्व के नेतृत्व में जांच समिति गठित की थी। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद पुलिस ने अभिनव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया था। विवेचना के दौरान उसकी पत्नी लवीना की भूमिका भी सामने आई।
कोट-
फर्जी चिकित्सक मामले की कोतवाली पुलिस ने गहनता से जांच की है। विवेचना पूरी होने के बाद करीब 200 पन्नों का आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है।
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- कालू सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक

इंजीनियर से फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट बनने तक का सफर
- अभिनव सिंह ने आईआईटी रुड़की से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की।
- तीन वर्ष की तैयारी के बाद मुंबई में कस्टम अधिकारी के पद पर तैनात हुआ।
- वर्ष 1999 में भ्रष्टाचार के मामले में अभियोग दर्ज होने के बाद फरार हो गया।
- वर्ष 2013 में बहनोई की डिग्री और पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
- वर्ष 2017 में मथुरा के छाता स्थित मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में तैनात हुआ।
- वर्ष 2019 में सीबीआई ने उसे मथुरा से गिरफ्तार कर मुंबई जेल भेजा।
- 16 महीने जेल में रहने के बाद जुलाई 2020 में रिहा हुआ।
- वर्ष 2022 में एनएमएम के तहत मेडिकल कॉलेज ललितपुर में कार्डियोलॉजिस्ट के पद पर तैनात हुआ।
- वर्ष 2022 से 2025 तक मरीजों का इलाज किया और ओपीडी व सीसीयू की जिम्मेदारी संभाली।
- दिसंबर 2025 में अमेरिका से आई बहन की शिकायत के बाद फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
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