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संभालकर नहीं रख पाए चंदेल शासकों की विरासत

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नवागढ़ मंदिर में स्थित भगवान की मुर्ति - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। चंदेल शासकों द्वारा बनवाए किले, गढ़ी, सरोवर, मंदिर व बावड़ी उचित देखरेख के अभाव में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसा ही एक स्थल शहर से 65 किलोमीटर दूर नवागढ़ तीर्थस्थल है, जो महरौनी विकासखंड में सोजना के निकट स्थित है। यहां खुदाई करने पर वर्षों पुरानी मूर्तियों के निकलते रहने की वजह से यह शोधार्थियों के लिए शोध का केंद्र बन गया है।
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नवागढ़ प्रागैतिहासिक क्षेत्र का इतिहास काफी पुराना है। चंदेल शासकों द्वारा विभिन्न नगरों में विशाल किले, गढ़ी, सरोवर, बावड़ी, कूप और मंदिरों का निर्माण कराया गया। यहां पर कई अति प्राचीन मूर्तियां और पुरातात्विक साक्ष्य, औजार मिले हैं। जैन तीर्थंकर का सिर और आदिनाथ भगवान की सिर विहीन पद्मासन प्रतिमा, पाषाण कलश, खंडित अभिलेख, कलाकृतियां एवं मृदभांड प्राप्त हुए हैं, जो नवागढ़ की प्राचीनता, संपन्नता, समृद्धि एवं संस्कृति को सिद्ध करते हैं। खुदाई में पाषाण कालीन औजारों की शृंखला प्राप्त हुई है। वर्ष 2019 से नवागढ़ से झांसी परिवहन निगम की बस सेवा यहां शुरू हो चुकी है।
धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक केंद्र रहा नवागढ़
माना जाता है कि नवागढ़ की स्थापना गुप्तकाल में की गई। चंदेल शासक मदन वर्मन ने यहां धार्मिक, सांस्कृतिक विरासत को अत्यंत विस्तार दिया। सन 1289 में हुए युद्ध में पृथ्वीराज चौहान द्वारा महोबा, लासपूर, सलक्षनपुर, दुदही, चांदपुर, मदनपुर के साथ नवागढ़ को भी ध्वस्त किया गया। डा. केपी त्रिपाठी की पुस्तक बुंदेलखंड का इतिहास में इसका उल्लेख मिलता है।
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पत्थर बजाने पर निकलती संगीतमय ध्वनि
यहां एक ऐसा पहाड़ी है जिसका पत्थर बजाने पर संगीतमय ध्वनि निकलती है। ऐसा प्रतीत होता है कि संगीत के यंत्र घंटी, ढोलक आदि बजाई जा रही हो।
गूढ़ रहस्य वाली मिली शैल चित्रावली
खोज में नवागढ़ क्षेत्र के निकट बगाज टोरिया (छोटी पहाड़ी), मुंडी टोरिया, मटकाटोर टोरिया, सिद्धों की टोरिया, फायटोन टोरिया, जैन पहाड़ी का अनवरत गंभीरता से निरीक्षण करने पर कई तथ्य एवं रहस्य उद्घाटित हुए हैं। जैन पहाड़ी की कच्छप शिला के आधार एवं छत में 8000 वर्ष प्राचीन जैन दर्शन के गूढ़ रहस्य वाली शैल चित्रावली मिली, जिसमें प्राकृतिक दृश्य, पहाड़,सरोवर, बावड़ी, पंचमहाव्रत, क्रोध आदि कषाय, सल्लेखना निशीतिका, केवलज्ञान सूर्य, जीवनमुक्त सिद्धों का सांकेतिक चित्रण किया गया है। विगत दिनों रूप सिंह गुर्जर के यहां खनन में पार्श्वनाथ भगवान की खंडित प्रतिमा प्राप्त हुई थी, जो अत्यंत विलक्षण और प्राचीन है। पुरा संपदा पर कई छात्र दिल्ली में पीएचडी कर रहे हैं।
पूर्ण समर्पण भाव से वास्तु कला एवं प्राचीनता को सुरक्षित रखते हुए सुंदरीकरण का कार्य संपन्न कराया गया है। सन 2011 में हुए पंचकल्याणक एवं गजरथ महोत्सव से नवागढ़ जन-जन की आस्था का केंद्र बन गया। आज भी खेतों एवं मकान की नींव में धार्मिक सांस्कृतिक, पुराने औजार आदि सामग्री मिलती हैं।
- ब्रह्मचारी जय कुमार निशांत भैया, क्षेत्र निर्देशक
नवागढ़ में निरंतर हो रहे अनुसंधान से प्राप्त हो रहे नए तथ्यों से कई बहुमूल्य जानकारी प्राप्त हो रही हैं। नवागढ़ क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
- राजकुमार जैन, कोषाध्यक्ष नवागढ़ तीर्थक्षेत्र
यह क्षेत्र भारतीय संस्कृति की अनमोल धरोहर है। हमारी भावना है ऐसे अनमोल प्राचीन क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण होता रहे, जिससे भविष्य में हमारी पीढ़ियां अपने इतिहास को जान सकें।
- नरेन्द्र जैन मैनवार, कोषाध्यक्ष
यहां कई बावड़ियां थी, जो धीरे-धीरे नष्ट होती गई। क्षेत्र के निर्देशक ब्र. जय निशांत भैया ने हाल ही में यहां नष्ट होती 40 फुट वृत्ताकार विशाल बावड़ी की सफाई का कार्य कराया। इसमें जैन तीर्थंकर का सिर एवं आदिनाथ भगवान की सिर विहीन पद्मासन प्रतिमा, पाषाण कलश, खंडित अभिलेख, कलाकृतियां एवं मृदभांड प्राप्त हुए हैं, जो नवागढ़ की प्राचीनता, संपन्नता, समृद्धि एवं संस्कृति को सिद्ध करते हैं।
- डॉ. सुनील संचय, मंत्री उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड तीर्थक्षेत्र कमेटी

नवागढ़ में मिली प्राचीन मूर्ति- फोटो : LALITPUR

नवागढ़ मंदिर में स्थित स्तम्भ- फोटो : LALITPUR

नवागढ़ मंदिर में मिली प्राचीन मूर्ति- फोटो : LALITPUR

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