ललितपुर। सूखे से निपटने के लिए बुंदेलखंड में तालाबों का पुनरोद्धार कराने के नाम पर सिंचाई विभाग के अधिकारी बंदरबांट करने में जुटे हैं। लेकिन, केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को अंधेरे में रखकर बजट जारी कराया गया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुंदेलखंड के तालाबों को संवारने के लिए समाजवादी जल संचयन योजना के तहत सौ तालाबों को खुदवाने का कार्य शुरु कराया है। इसमें करीब अस्सी फीसदी काम पूरा हो चुका है। दिलचस्प यह है, कि जनपद के जिन 25 तालाबों में 24 करोड़ रुपए से खुदाई काम शुरु कराया गया है, उनमें से 13 तालाबों को केंद्र सरकार के जल संसाधन मंत्रालय की त्वरित सिंचाई प्रबंधन कार्यक्रम योजना थ्री- आर (रिपेयर, रिनोवेशन व रेस्टोरेशन) कार्यक्रम के तहत भी चयनित करा लिया गया। केंद्र सरकार द्वारा बजट विशेष शर्तों के साथ जारी किया गया है। इन शर्तों में सबसे मुख्य शर्त यह है कि केंद्र सरकार की ओर से जारी बजट जिस काम के लिए जारी किया गया है, उस काम को किसी दूसरी योजना के तहत चयनित नहीं किया गया हो। लेकिन, सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस तथ्य को छिपाकर केंद्र सरकार की थ्री- आर योजना के तहत बजट जारी करा लिया और इन्हीं 13 तालाबों में समाजवादी जल संचयन योजना के तहत काम शुरु हो गया है। इतना ही नहीं समाजवादी जल संचयन योजना के तहत बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के ठेकेदारों की मशीनें, डंपर व ट्रैक्टर लगाकर काम कराया गया, जबकि थ्री- आर योजना के तहत पूरी तरह पारदर्शी योजना के तहत टेंडर प्रक्रिया अपनाकर ही बजट खर्च करने की शर्त है।
सेंट्रल वाटर कमीशन ने पकड़ी कारगुजारी
31 मार्च को केंद्रीय जल मंत्रालय की ओर से 13 तालाबों के लिए बजट जारी किया गया था। इन तालाबों के साथ ही सिंचाई विभाग की ओर से 18 तालाबों को बजट की मंजूरी दिलाने के लिए एक प्रस्ताव केंद्रीय जल मंत्रालय को भेजा गया था। सिंचाई विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने पहले गए प्रस्ताव के चार तालाबों को दूसरे प्रस्ताव में भी शामिल करा दिया था और एक ऐसे तालाब को भी प्रस्ताव में शामिल कर दिया, जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं था। सेंट्रल वाटर कमीशन लखनऊ ने जब प्रस्ताव को मंजूरी का अनुमोदन देने के पहले दोनों प्रस्तावों का अध्ययन किया तो सिंचाई विभाग की कारस्तानी पकड़ में आ गई। वाटर कमीशन की नाराजी पर आनन- फानन में प्रस्ताव में सुधार किया गया और दूसरे प्रस्ताव में पांच तालाबों को अलग कर दिया गया।
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मुखिया के संसदीय क्षेत्र में हो रहा खेल
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी बजट की बंदरबाट जनपद में कोई नई बात नहीं है। इसके पहले भी कचनौदा बांध को लिए जल मंत्रालय की ओर से जारी बजट की गलत रिपोर्ट मंत्रालय भेजकर खर्च किया गया। बिडवंना यह है कि केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की केंद्रीय मंत्री उमा भारती के मंत्रालय के बजट में गड़बड़ी उनके ही संसदीय क्षेत्र में की जा रही है और उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
तालाब केंद्रीय बजट (लाख रु में)
लागौन - 89.43
किसलवास- 118.38
दैलवारा - 89.33
बुदावनी- 58.63
पूराबिरधा- 65.67
चुरावनी- 50.20
मऊ- 129.42
पवा-163.65
सीरोन खुर्द- 139.89
बम्हौरी सहना- 43.28
कुंआगांव- 50.18
धौरीसागर- 128.49
म्यांव- 73.37
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कुल - 10.99 करोड़ रुपए
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इनका कहना है
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समाजवादी जल संचयन योजना के तहत जिन तालाबों में खुदाई काम हो रहा है, उनमें से 13 तालाबों के लिए केंद्रीय जल मंत्रालय की ओर से बजट जारी किया गया है। अब केंद्रीय मंत्रालय की गाइड लाइन को कैसे फालो किया जाए और केंद्रीय बजट को कैसे खर्च करना है, इसका निर्णय उच्च अधिकारी लेंगे।
- एके सिंह
(नोडल अधिकारी)
समाजवादी जल संचयन योजना