ललितपुर। मध्याह्न भोजन निधि के खाता परिवर्तन के अभाव में चार माह की कन्वर्जन कास्ट अटककर रह गई है। इसका विपरीत प्रभाव योजना के संचालन पर पड़ रहा है।
छह से 14 वर्ष की आयु वर्ग के सभी बच्चों का स्कूल में ठहराव बनाने के उद्देश्य से मिड-डे मील योजना चलाई जा रही है। योजनांतर्गत प्राथमिक विद्यालय में 3.76 रुपये व पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 5.64 रुपए प्रति बच्चा के हिसाब से कन्वर्जन कास्ट प्रदान की जाती है।
इस राशि से प्रधानाध्यापक मिड-डे मील के लिए सब्जी, गैस, दूूध और मसाले का इंतजाम करते हैं। पिछले कई महीनों से विद्यालयों को कन्वर्जन कास्ट नहीं मिल सकी है। शुरुआत में ग्रांट की कमी पड़ गई, इसके बाद पंचायत चुनाव आ गए और अब कन्वर्जन कास्ट की कमी ने योजना को पटरी से उतार दिया है। पंचायत चुनाव निपटने के बाद विभागीय अफसर योजना को फिर से पटरी पर लाने की कोशिशों में जुट गए हैं।
पिछले दिनों जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एसपी यादव ने विद्यालयवार कन्वर्जन कास्ट का लेखाजोखा तैयार कराया। इसमें जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्तूबर माह की कन्वर्जन कास्ट भेजी जानी है। लेकिन, अब मध्याह्न भोजन निधि के खाते परिवर्तन नहीं हो पाने की समस्या सामने आ गई है, जिससे विभागीय अफसर चार माहों के कन्वर्जन कास्ट को हस्तांतरित करने में कन्नी काटने लगे हैं।
मध्याह्न भोजन निधि खाता का संचालन ग्राम प्रधान व विद्यालय के प्रधानाध्यापक के संयुक्त हस्ताक्षर से होता है। हाल ही में निर्वाचित प्रधानों को शपथ दिलाई गई है।
जब तक नवनिर्वाचित प्रधानों के नाम मध्याह्न भोजन निधि के खाते में शामिल नहीं होंगे, तब तक कन्वर्जन कास्ट की धनराशि निकलना मुश्किल है। इन हालात में शिक्षक योजना िको उधार में चलने को मजबूर हैं।
जेब पर भारी पड़ा संशोधित मेन्यू
मध्याह्न भोजन योजना का मेन्यू पिछले दिनों संशोधित कर दिया है गया, जिसमें प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को डेढ़ सौ मिली लीटर और पूर्व माध्यमिक विद्यालय के बच्चों को दो सौ मिलीलीटर दूध देने की व्यवस्था की गई है। इससे शिक्षकों में विभाग के प्रति रोष पनप रहा है।
उनका कहना है कि मामूली कन्वर्जन कास्ट से दूध की पूर्ति करना मुश्किल है, उस पर कन्वर्जन कास्ट भी नियमित नहीं दी जा रही है। ऐसे में योजना को सुचारु रखना उनके लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।