जलवायु में बढ़ती कार्बन डाई आक्साइड से हो रहे परिवर्तन को रोकने के लिए अब पेड़ों की कार्बन क्रेडिट आंकी जाएगी। इसके लिए जीपीएस का सहारा लिया जाएगा। जापान इसकी एवज में देश को पौध रोपण के लिए धन मुहैया कराएगा। इस परियोजना को एआरसीडीएम नाम दिया गया है। जिस पर वन विभाग ने काम शुरू कर दिया है।
कारखानों की चिमनियों एवं वाहनों से निकलने वाली कार्बन डाई आक्साइड आसमान में जमा हो रही है। जिसका असर जलवायु पर पड़ रहा है। जलवायु के गरम होने से फसलों व बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। जापान सरकार पर्यावरण के स्वच्छ विकास के लिए संचालित एआरसीडीएम (अस्सिट रिजनरेशन क्लीन डेवलेपमैंट मैकेनिज्म) परियोजना में फंडिग कर रही है। देश में परियोजना पर काम शुरू हो गया है। इसमें कुछ शर्ते तय की गई हैं। विकसित देशों से कार्बन क्रेडिट की एवज में मिले धन को उन जगहों पर लगाया जाएगा, जहां पर पच्चीस वर्ष से जंगल नहीं हैं। जंगल नहीं होने को भी स्पष्ट किया गया है। यदि जंगल में 100 में से 15 या उससे कम पेड़ लगे हैं, उन स्थानों को चिह्नित कर पौधे लगाए जाएंगे।
वन विभाग ने जायका परियोजना अंतर्गत गठित 14 संयुक्त वन प्रबंध समितियों के क्षेत्रफल को शामिल किया है। इसमें तालबेहट रेंज की करेंगा, कंधारीकलां, पिपरई, तिंद्रा, विजयपुरा, कड़ेसराकलां, टेटा, धौजरी, कुसमाड़, बिल्ला, पाह, गंगचारी, दैलवारा, हंसरी समिति शामिल हैं। इस तरह जिले में एआरसीडीएम परियोजना में कुल 416.09 हेक्टेयर क्षेत्रफल को लिया गया है। इन क्षेत्रों में पेड़ों की गणना, उनकी लंबाई व मोटाई की माप व स्पॉट चिह्नित किए जा रहे हैं। ऐसे स्थानों पर जीपीएम सिस्टम को प्रभावी बनाने के लिए पिलर लगाए जा रहे हैं। जब जंगल में जीपीएस सिस्टम काम करने लगेंगे, उसके पश्चात सेटेलाइट के माध्यम चिह्नित क्षेत्रों की फोटो आसानी से ली जा सकेगी।
ये भी जानें
1- जापान सरकार पर्यावरण के स्वच्छ विकास के लिए संचालित एआरसीडीएम (अस्सिट रिजनरेशन क्लीन डेवलेपमैंट मैकेनिज्म) परियोजना में फंडिग कर रही है।
2- जेएफएमसी (ज्वाइंट फारेस्टमेनेजेमेंट कमेटी) है। यह जंगल के आसपास रहने वाले निर्धन परिवारों का समूह है जो पौधरोपण में वन विभाग का सहयोग करता है।
3- इस परियोजना को देश के चौदह जिलों में चलाया जा रहा है। जिसमें उत्तर प्रदेश के दस जिलों में ललितपुर भी शामिल हैं। सभी जिलों में एक साथ परियोजना संचालित की गई है। शुरुआत में स्पॉट चिह्निकरण, पौधों की गणना आदि कार्य कराए जा रहे हैं।
क्योटो सम्मेलन में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए विकसित देशों ने अनुबंध किया था। जिसके तहत एआरसीडीएम परियोजना चलाई जा रही है। इसमें पौधों की मोटाई मापकर कार्बन की क्रेडिट ली जाएगी। जापान सरकार इसकी यूनिट केे आधार धन मुहैया कराएगी।
- आरके त्रिपाठी, एसडीओ वन ललितपुर।
ऐसे की जाएगी माप तौल
पेड़ पौधों का भोजन कार्बन डाई आक्साइड होता है। हवा में पाई जाने वाली कार्बन डाई आक्साइड पेड़ों में फोटोसिन्थेसिस द्वारा पहुंचती है। जितने ज्यादा पेड़ होंगे उतनी ही ज्यादा कार्बन डाई आक्साइड हवा से कम होकर पेड़ों में समा जाएगी। सीडीएम (क्लीन डेवलेपमेंट मैकेनिज्म) के तहत हम जितनी कार्बन डाई आक्साइड हवा से लेकर पेड़ों में रखेंगे, उतनी ही हमें कार्बन क्रेडिट मिलेगी। इस कार्बन क्रेडिट को हम विक्रय कर सकते हैं।