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नहरों के पानी पर कब्जा, सत्तर फीसदी खेत खाली

Fri, 25 Nov 2016 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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bundelkhand ka dard - फोटो : demo
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तीन वर्ष से दैवी आपदा झेल रहे किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मानसून की मेहरबानी के बाद भी किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। तीन सप्ताह से नहरें फुल गेज पर चल रही हैं, लेकिन कई गांवों के किसान अब भी पानी के इंतजार में बुवाई को बैठे हैं। प्रभावशाली लोग जहां-तहां नहरें काटकर अपने खेतों में पानी दे रहे हैं। इसे सिंचाई विभाग के अफसर भी स्वीकारते हैं, लेकिन कार्रवाई किसी पर नहीं की जा रही है। स्थिति यह है कि क्षेत्र के लगभग सत्तर फीसदी खेत पानी के अभाव में बिना बुवाई के पड़े हैं। 
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 किसानों के खेतों में पानी पहुंचाने के लिए  राजघाट और शाहजाद बांध से नहरें निकली हैं। राजघाट से निकली एलआरसी से बिजरौठा, खांदी, म्याव, तिदरा, उदगुवा, ककड़ारी, दौलता, चन्द्रापुर, कड़ेसराकलां, बंदेसरा आदि तथा  शहजाद बांध से  निकली नहरों से बरीकलां, बरीखुर्द, रजपुरा, हसारकलां, हसगुवा, भुचेरा, बलरगुवा, सारसेड, पूराकलां, दिदौरा, धमना, पूराविरधा, नत्थीखेड़ा, झॉवर, पुराखुर्द, उगरपुर आदि गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है।        
तीन सप्ताह से दोनों बांधों से नहरें फुल गेज पर चल रही हैं, लेकिन अब तक टेल के  कई गांवों में  पानी नहीं पहुंच सका है। तालबेहट, खांदी, बंदेसरा, चन्द्रापुर, बिजरौठा, कड़ेसराकलां आदि गांवों के किसानों को नहर से पानी की एक बूंद नसीब नहीं हो पा रही है। किसान नहरों में पानी आने की आस में रात भर जाग रहे हैं। किसानों ने बताया कि प्रभावशाली लोगों द्वारा आड़ा लगाकर या नहर काटकर पानी पहले ही ले लिया जा रहा है, जिससे आगे के किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। सिंचाई विभाग भी पेट्रोलिंग नहीं कर रहा है, जिससे नहरें रोकने वाले किसानों की पौ बारह है। जब तक नहरों के पानी पर  कब्जा करने वाले लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक नहर से पानी मिलना संभव नहीं है। 
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नोटबंदी ने खाद- बीज भी छीना
तालबेहट(ललितपुर)।  
क्षेत्र का किसान इस बार नोट बंदी का भी शिकार हो गया। पानी के साथ-साथ किसान खाद बीज को भी परेशान है।  बंदेसरा निवासी किसान मनोहर सिंह ने बताया कि  समितियों पर खाद, बीज लेने के लिए पुराने नोटों के स्थान पर नए नोट मांगे जा रहे हैं। दुकानदारों को बट्टा देना पड़ रहा है। इस मामले में अधिकारी भी मौन साधे हुए हैं।   
    
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केसीसी पर बैंक नहीं दे रहे भरपूर पैसा 
क्षेत्र के बड़ी जोत के कई किसानों को अभी तक अतिवृष्टि की शासन से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। उनके पास किसान क्रेडिट कार्ड हैं परन्तु पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा है। बैंक एक बार में मात्र चौबीस हजार रुपए दे रहे हैं, जबकि उन्हें इससे अधिक राशि की आवश्यकता मात्र बीज के लिए होती है। ऐसी स्थिति में वह मजबूरी में अपनी जमीन साहूकारों के यहां गिरवी रखने या बटाई पर देने को मजबूर हैं।       

दुबारा करना पड़ रहा है पलेवा 
 नत्थीखेड़ा के किसान नाथूराम ने बताया कि समय पर खाद व बीज न मिलने के कारण बुवाई करने के लिए दूसरी बार पलेवा करना पड़ रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ किसानों को आज तक खाद- बीज नहीं मिल पाया है। किसान इसके लिए बीजगोदाम के चक्कर लगा रहे हैं परन्तु वहां पर कार्यरत कर्मचारी अपने चहेतों को बीज पहले दे रहे हैं। 

इंजन चला कर लेना पड़ रहा है पानी 
 ग्राम कड़ेसराकलां निवासी देवसिंह ने बताया कि नहर का पानी न आने के कारण उन्हें पलेवा के लिए बेतवा नदी पर इंजन रख कर सिंचाई करनी पड़ रही है। इंजन से पानी लेने के लिए डीजल के साथ- साथ पाइपों का प्रबंध करना पड़ रहा है। 
 
किसानों के खाते में भेज दिया गया पूरा पैसा - प्रीति जैन      
तालबेहट(ललितपुर)।  तहसीलदार प्रीति जैन ने बताया कि पूर्व में लगभग 52 करोड़ रुपए किसानों को वितरित करने को मिला था। कुछ दिन पूर्व 2 करोड़ ग्यारह लाख रुपये और मिले थे, जिन्हें 58 गांवों के लगभग चौदह हजार किसानों के खातों में ई पेमेंट द्वारा भेज दिया गया है। न्याय पंचायत खांदी के कई गांवों के किसानों को आज तक पैसा नहीं मिलने के संबंध में उन्होंने बताया कि पैसा बैंक में होगा और बैंक अधिकारी इस समय काम के बोझ के चलते किसानों के खाते में उसे न भेज सके होंगे।

नहर काटने वालों पर होगी कार्रवाई -अजय भारती
सिंचाई निर्माण खंड के सहायक अभियंता अजय भारती का कहना है कि  नहर को काटने वाले और पानी को अवरुद्ध करने वालों का पता लगा कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार को इस संबंध में उन्होंने उपजिलाधिकारी हरीओम शर्मा से मुलाकात कर सहयोग भी मांगा है।

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तालबेहट(ललितपुर)।  पिछलें कई वर्षो से प्राकृतिक आपदा का दंश झेल रहा क्षेत्र का किसान इस बार नोट बंदी का शिकार हो गया। इस समय किसान खाद, बीज और पानी के लिए बेहद परेशान है। क्षेत्र के लगभग सत्तर फीसदी खेत पानी के अभाव में बिना बुबाई के खाली पड़े है। किसानों ने बताया कि नोट बंदी के चलते उन्हें पुराने नोटों में सरकार के खाद बीज मिलने के निर्देशों के बाबजूद बीज एवं खाद नहीं मिल रहा है। उनकी समस्या के निदान के लिए नेेता और अधिकारी मौन साधे हुए है। कई किसानों को तो बीज समय पर न मिल पाने के कारण दूसरी बार पलेवा करना पड रहा है।       
तालबेहट विकास खंड के किसानों को सिचाई के लिए पानी मुहैया कराने के  लिए राजघाट बांध और शाहजॉद बांध से नहरें निकली है। राजघाट से निकली एलआरसी से बिजरौठा, खांदी, म्याव, तिदरा, उदगुवा, ककड़ारी, दौलता, चन्द्रापुर, कड़ेसराकलां, बंदेसरा आदि गॉवों के किसानों को तथा  शहजॉद बॉध से  निकली नहरों से बरीकलां, बरीखुर्द, रजपुरा, हसारकलां, हसगुवा, भुचेरा, बलरगुवा, सारसेड, पूराकलां, दिदौरा, धमना, पूराविरधा, नत्थीखेड़ा, झॉवर, पुराखुर्द, उगरपुर आदि गॉवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है।         इस समय दोनों बॉधों से नहरों का पानी छोड़े हुए लगभग तीन सप्ताह का समय हो गया है परन्तु आज तक क्षेत्र के किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुचां। इसका प्रमुख कारण है कि नहर से पानी छोड़ें जाने के बाद से विभागीय अधिकारियों ने आज तक एक भी बार नहर पर पेट्रोलिंग नहीं कराई और न ही नहर के पानी को अवरूद करने वालों पर कोई सख्ती की है। जिसके चलते टेल  के किसानों की बात तो दूर नहर से सटे खेत पानी के लिए तरस रहे है।       
इस समय तालबेहट, खांदी, बंदेसरा, चन्द्रापुर, बिजरौठा, कड़ेसराकलां आदि गॉव के किसानों को नहर से पानी की एक बूंद नसीब नहीं हो पा रही है। किसान नहरों में पानी आने की आस में रात भर जाग रहा है। किसानों ने बताया कि नहरों के पानी पर  कब्जा करने वालें दबंगों के खिलाफ जब तक सख्ती नहीं की जाएगी तब तक किसान को नहर से पानी न मिलने की समस्या दूर नहीं हो सकती है। वही नहरों से पानी न मिलने के कारण किसानों ने नदी, नालों से पाइप लगा कर पानी लेना प्रारम्भ कर दिया है। 
   
पानी, के अलावा किसानों को नहीं मिल रहा है खाद बीज -- मनोहर सिंह बंदेसरा      
तालबेहट(ललितपुर)।  
बंदेसरा निवासी किसान मनोहर सिंह ने बताया कि इस समय किसान खाद, बीज और पानी के लिए परेशान है। समितियों पर खाद, बीज लेने के लिए पुराने नोटों के स्थान पर नए नोट मांगे जा रहे है। इससे किसान को मजबूरी में दुकानों से खाद, बीज का प्रबंध करना पड़ रहा है। जिसके लिए उसे दुकानदारों को बट्टा देना पड़ रहा है। किसानों की समस्या पर भी अधिकारी पूरी तरह से मौन साधे हुए है।       
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केसीसी पर बैंक नहीं दे रहा है भरपूर पैसा 
तालबेहट (ललितपुर)। क्षेत्र के बड़ी जोत के कई किसानों ने बताया कि बडे किसान होने के कारण उन्हें अभी तक अतिवृष्टि की शासन से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। उनके पास किसान केडिट कार्ड है परन्तु वह कई बार की प्राकृतिक आपदा की मार के चलते उससे काफी पैसा पूर्व में निकाल चुकें है। ऐसी स्थिति में उनके पास खेती के लिए घन जुटाना मुसीबत भरा हो रहा है। बैंक एक बार में मात्र चौबीस हजार रूपए दे रहा है जबकि उन्हें इससे अधिक राशि की आवश्यकता मात्र बीज के लिए होती है।  ऐसी स्थिति में वह मजबूरी में अपनी जमीन साहूकारों के यहा गिरबी रखने को या बटाई पर देने को मजबूर है।       
दुबारा करना पड रहा है पलेवा - नाथूराम यादव नत्थीखेड़ा
तालबेहट(ललितपुर)।  नत्थीखेड़ा के किसान नाथूराम ने बताया कि समय पर खाद बीज न मिलने के कारण कुछ किसानों को बुबाई करने के लिए दूसरी बार पलेवा करना पड़ रहा है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ किसानों को आज तक खाद बीज नहीं मिल पाया है। किसान इसके लिए बीजगोदाम के चक्कर लगा रहें है परन्तु वहां पर कार्यरत कर्मचारी अपने चहेतों को बीज पहले दे रहा है। 
  
इंजन चला कर लेना पड़ रहा है पानी --- देव सिंह कड़ेसराकलां       
तालबेहट(ललितपुर)। ग्राम कड़ेसराकलां निवासी देवसिंह ने बताया कि उनके खेतों में नहर का पानी न आने के कारण उन्हें पलेवा के लिए बेतवा नदी में इंजन रख कर  पानी लेना पड़ रहा है।  इंजन से पानी लेने के लिए किसानों को डीजल के साथ साथ पाइपों का प्रबंध करना पड़ रहा है। इससे किसानों को दुहरी मार उठानी पड़ रही है।       
      
किसानों के खाते में भेज दिया गया पूरा पैसा - प्रीति जैन      
तालबेहट(ललितपुर)। क्षेत्र के कई गांवों के किसानों के खाते में आज तक अतिवृष्टि का एक धैला न जाने पर तहसीलदार प्रीति जैन ने बताया कि शासन द्वारा पूर्व में लगभग 52 करोड़ रूपए मिला था। कुछ दिन पूर्व 2 करोड़ ग्यारह लाख रूपये मिला था। जिसें 58 गॉवों के लगभग चौदह हजार किसानों को ई पेमेंट के द्वारा किसानों के खातों में भेज दिया गया है। जब उन्हें बताया कि न्याय पंचायत खांदी के कई गांवों के किसानों को आज तक पैसा नसीब नहीं हुआ है तो उन्होंने बताया कि वह पैसा बैंक में होगा और बैंक अधिकारी इस समय काम के बोझ के चलते किसानों के खाते में उसे न भेज सकें हो।
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