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Lalitpur News: रबी सीजन में एक नवंबर से चालू होंगी नहरें

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ललितपुर। रबी सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने हेतु सिंचाई विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने एक नवंबर से नहरों का संचालन शुरू करने का रोस्टर तैयार किया है। इस सीजन में सिंचाई विभाग के छह बांधों से करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है।
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नहरों के संचालन से किसानों को गेहूं, चना, मटर, मसूर और अन्य रबी फसलों की बोआई के लिए पलेवा करने में मदद मिलेगी। ललितपुर जनपद को बांधों के नाम से जाना जाता है, जहां चौदह बांध परियोजनाएं हैं। इनमें भोंरट बांध परियोजना अभी निर्माणाधीन है। जिले के किसान अपनी खेती के लिए बारिश और सिंचाई के साधनों पर काफी निर्भर रहते हैं। खरीफ की फसलों की कटाई के बाद किसान अब रबी की फसल बोआई की तैयारी में जुटे हैं।

नहरों के संचालन की तैयारी
रबी फसल बोआई के लिए बांधों से संचालित नहरों का समय पर शुरू होना महत्वपूर्ण है। सिंचाई विभाग नहरों में जमा सिल्ट हटाने, झाड़ियां काटने और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का काम कर रहा है। इससे पानी का प्रवाह सुचारु बना रहेगा। राजघाट निर्माण खंड और सिंचाई खंड के अंतर्गत आने वाले गोविंद सागर, शहजाद, जामनी, सजनाम, उटारी और रोहिणी बांध की नहरों का संचालन एक नवंबर से होगा। इसी रोस्टर के अनुसार नहरों का संचालन किया जाएगा।
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सिंचाई के लिए बांधों से निकली नहर प्रणाली और लक्ष्य
बांध का नाम - मुख्य नहरों की लंबाई - सिंचित क्षेत्र का लक्ष्य
गोविंद सागर बांध - 190.90 किमी - 21000 हेक्टेयर
शहजाद बांध - 116.60 किमी - 14000 हेक्टेयर
जामनी बांध - 230.70 किमी - 34000 हेक्टेयर
सजनाम बांध - 109.08 किमी - 16000 हेक्टेयर
उटारी बांध - 20.00 किमी - 1600 हेक्टेयर
रोहिणी - 19.99 किमी. - 3200 हेक्टेयर

तालाबों से 11500 हेक्टेयर भूमि सिंचाई का लक्ष्य
बांधों से निकली नहरों के अलावा सिंचाई विभाग के तालाबों से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। इस रबी सीजन में इन तालाबों से करीब 11500 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने का लक्ष्य रखा गया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक तय किए गए लक्ष्य से अधिक हेक्टेयर क्षेत्रफल भूमि की सिंचाई कराई जाएगी।
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नहरों की सिल्ट सफाई को लेकर उठते सवाल
रबी सीजन में खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नहरों की सफाई महत्वपूर्ण मानी जाती है। नहरों में सिल्ट जमा होने, झाड़ियां उगने और क्षतिग्रस्त हिस्सों के कारण पानी का प्रवाह प्रभावित होता है। इसके लिए सिंचाई विभाग नहरों की सिल्ट सफाई और झाड़ियों की कटाई नहर संचालन से पूर्व ही करवाता है। लेकिन इस कार्य में लापरवाही भी देखी जाती है। कुछ हिस्सों में काम करवाकर इतिश्री कर ली जाती है। इस कारण से जब नहरों का संचालन होता है तो पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता है और किसान पानी के लिए परेशान होते हैं।

रबी सीजन में किसानों को सिंचाई के लिए नहर का संचालन एक नवंबर से किए जाने का रोस्टर तैयार किया गया है। इस रबी सीजन में करीब एक लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित करने का लक्ष्य रखा गया है। नहरों के अंतिम छोर टेल तक पानी पहुंचाया जाएगा।
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जितेंद्र सिंह कनौजिया, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई कार्यमंडल ललितपुर।

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