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तैयार नहीं हो पा रहा पांच साल का लेखा जोखा

Thu, 11 Jun 2015 12:01 AM IST
ललितपुर/ ब्यूरो
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ललितपुर। परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को दोपहर का भोजन उपलब्ध कराने के लिए चलाई जा रही मिड डे मील योजना के प्रति खंड शिक्षा अधिकारी उदासीन बने हुए हैं। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खंड शिक्षा अधिकारियों ने अभी तक अप्रैल व मई माह का उपभोग प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया है, जिससे पांच साल का लेखा- जोखा तैयार नहीं हो पा रहा है।
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जिले के 1,560 विद्यालयों में संचालित मिड डे मील योजना को लेकर  खंड शिक्षा अधिकारी उदासीन बने हुए हैं। इसका जीता जागता उदाहरण अप्रैल व मई माह का उपभोग उपलब्ध नहीं कराना है, जिसके अभाव में पांच साल का लेखा- जोखा पूर्ण नहीं हो पा रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार मिश्रा ग्राम पंचायतों के पूरे हो रहे कार्यकाल को ध्यान में रखकर लेखा- जोखा तैयार करा रहे हैं। उनका मानना है कि इससे पता चल जाएगा कि ग्राम पंचायतों पर कोई अवशेष है या नहीं। यदि किसी ग्राम पंचायत पर वसूली बनती है तो उसकी कार्रवाई आसान हो जाएगी। लेकिन, विडंबना यह है कि खंड शिक्षा अधिकारी इस मामले में भी उदासीन नजर आ रहे हैं, जिससे बीएसए की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है।

 चार ग्राम पंचायतों को जारी हो चुके नोटिस
जिले की चार ग्राम पंचायतें गेहूं व चावल का अवशेष होने पर वसूली की कार्रवाई के लपेटे में आ गई हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से ग्राम पंचायत असऊपुरा, खांदी, कुम्हैड़ी और सौजना को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। चिह्नित ग्राम प्रधानों ने अपना पक्ष रखते हुए खुद को पाक साफ बताया है। अब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इन ग्राम पंचायतों के ब्योरे का मिलान कराने का निर्णय लिया है।
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सूचना देने में फिसड्डी हैं बीईओ
यह पहला अवसर नहीं है, जब खंड शिक्षा अधिकारियों की उदासीनता सामने आई है। इससे पहले भी कई बार खंड शिक्षा अधिकारी सूचना देने के मामले में फिसड्डी साबित हुए हैं। पिछले दिनों गलत चयन वेतनमान के चिह्नींकरण में भी खंड शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई थी।

फंस सकती हैं कई और ग्राम पंचायतें
गत शैक्षिक सत्र में विभिन्न ग्राम पंचायतों में मनमाने तरीके से मध्याह्न भोजन पकाया गया है। यदि पांच साल का अनाज व कन्वर्जन कास्ट के उपभोग का ब्योरा तैयार हो गया तो कई और ग्राम पंचायतें वसूली के लपेटे में आ जाएगी।
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