डोंगराखुर्द। यूनेस्को द्वारा संरक्षित स्मारक देवगढ़ के विश्व प्रसिद्ध दशावतार मंदिर के निकट पर्यटकों की सुविधा के लिए कैफेटेरिया खुलवाया जाएगा। इसमें स्मारक का संपर्क मार्ग, वातानुकूलित टिकट घर, शौचालय जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी।
देवगढ़ में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक एकड़ जमीन में गार्डन विकसित किए जा रहे हैं। इसमें देशी और विदेशी फूल लगाए जाएंगे। पर्यटकों को रंग-बिरंगे खूबसूरत फूलों की महक के साथ सुंदर एवं शांत वातावरण मिलेगा। टिकट घर व बुक सेंटर का निर्माण शुरू हो गया है। बेतवा नदी के तट पर स्थित भगवान विष्णु को समर्पित दशावतार मंदिर को प्रारंभ में पंचरत्न मंदिर के नाम से भी जाना जाता था। गुप्त काल में बना यह मंदिर प्राचीन कला का उत्कृष्ट नमूना है। गंगा और यमुना के आकर्षक चित्र मंदिर के प्रवेश द्वार पर बने हैं। प्रदेश द्वार से मंदिर के गर्भगृह तक मंदिर की दीवारों पर बने नर नारायण तपस्या और अनंतशायी भगवान विष्णु, निचले हिस्से में बनी नक्काशी आकर्षक है।
मंदिर के अधिष्ठान पर मूर्ति फलकों के माध्यम से रामायण के अलावा श्री कृष्ण जन्म, नंद, यशोदा और बलदेव के चित्र आकर्षक हैं। मंदिर के चारों कोनों में लघु मंदिर के अवशेष हैं, जो देखे जा सकते हैं। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए चारों तरफ से सात सीढ़ियों से युक्त चार सोपान निर्मित हैं। यह मंदिर गुप्त कालीन मंदिरों की शैली का सर्वोत्तम उदाहरण है। दीवारों पर अद्भुत प्रतिमाएं उत्कीर्ण हैं। लेकिन, मंदिर का शिखर नष्ट हो गया है।
निर्माण कार्य फरवरी से चल रहा है। अभी बजट के अभाव में काम बंद चल रहा है। बजट आने पर कार्य एक महीने में पूरा हो जाएगा।
- रविकांत रुस्तगी, अवर संरक्षण सहायक देवगढ़
देवगढ़ में स्थित दशावतार मंदिर- फोटो : LALITPUR