सांड़ के हमले से वृद्ध गंभीर
कड़ेसराकलां। छुट्टा जानवरों पर रोक लगाने के इंतजाम बेअसर साबित हो रहे हैं। ग्राम कड़ेसराकलां क्षेत्र में एक आवारा बैल क्षेत्र के कई लोगों पर हमला कर चुका है। रविवार को इसके हमले से शौच के लिए गया वृद्ध गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया गया।
प्रशासन छुट्टा और आवारा जानवरों पर रोक लगाने के लिए गांव-गांव में गोशालाएं और गोआश्रय स्थल खुलवा रहा है, लेकिन इसके बाद भी छुट्टा जानवर कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। सड़क और गांव की गलियों में जानवर घूमते रहते हैं। रविवार को सुबह ग्राम हनौता निवासी सरमन पाल (65) पुत्र रामदीन मकान के समीप बने खेतों पर शौच के लिए गया था। उसी समय एक सांड़ ने उसके ऊपर हमला कर दिया, जिससे सींग उसके पेट में घुस गया और उसकी आंतें बाहर निकल आईं। कुछ देर बाद लोगों ने वृद्ध को तड़पते देखा तो उसे उपचार के लिए सीएचसी तालबेहट लाए। जहां उसकी गंभीर हालत होने पर उसे मेडिकल कालेज झांसी रेफर कर दिया गया। परिजनों के अनुसार उसकी हालत अभी नाजुक बनी हुई है।
घटना के बाद ग्रामीण हमलावर बैल को पकड़ने के लिए अपने हाथों में डंडा और रस्सी लेकर जुट गए। मशक्कत के बाद उस पर काबू कर पाया जा सका। इसके बाद ग्रामीणों ने उसकी दोनों सीगों को काट दिया। ग्रामीणों ने बताया कि इसकी सूचना उन्होंने पुलिस एवं वन विभाग को दी थी, परंतु दोनों विभागों का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
कई लोगों पर कर चुका है हमला
तालबेहट। बैल इससे पूर्व ग्राम हनौता निवासी सखी (55) पत्नी सूरज पर हमला कर चुका है, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी और झांसी रेफर किया गया था। 11 सितंबर को इसी बैल ने ग्राम झरर निवासी रतिराम यादव की पत्नी सुखवती (55) पर भी हमला कर दिया था, जिससे उसकी झांसी में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी।
वृद्ध के भाई को मगरमच्छ ने खाया था
कड़ेसराकलां। यह इत्तफाक ही है कि कुछ माह पहले सरमन पाल के बड़े भाई भगवानदास को बेतवा नदी में एक मगरमच्छ ने उस समय पकड़ लिया था, जब वह नदी में आया था। इससे उसकी मौत हो गई थी।