ललितपुर। शहर में कई स्थानों पर अंग्रेजी काल में बने कई पुराने भवन जर्जर हो चुके हैं। अब यह जर्जर भवन आम लोगों के लिए खतरा बन चुके हैं, जो गंभीर हादसों को न्यौता दे रहे हैं। जर्जर स्कूल भवन, पुरानी टाकीज की बिल्डिंग, पुराना कलेक्ट्रेट भवन समेत तमाम ऐसे निजी व सरकारी भवन हैं, जो गिरने की कगार पर हैं। कभी भी तेज हवा या आंधी में जमींदोज हो सकते हैं।
शहर के बीचोंबीच मुख्य बाजार नझाई बाजार में सबसे पुराना सिनेमाघर स्थित है, जो एक दशक पूर्व तक लोगों के लिए मनोरंजन के लिए उपयोग में लाया जाता रहा। लेकिन अब यह सिनेमाघर की बिल्डिंग काफी जर्जर हो चुकी है। जबकि इसी सिनेमा घर की बिल्डिंग के नीचे ही 12 दुकानदार अपना व्यवसाय कर रहे हैं। जबकि कई फुटकर दुकानदार भी इसी भवन से सटकर सड़क पर अपनी दुकानें सजाकर अपना व्यवसाय कर रहे हैं, जबकि एक हिस्से में तो करीब चार फीट की गली में ही सड़क के दूसरी ओर कई दुकानें संचालित हो रही हैं। इस भवन छत का जर्जर हिस्सा कई बार जमीन पर गिर चुका है, जिससे यहां दुकानदार भी अक्सर भयभीत रहते हैं। जबकि शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों लोग यहां खरीदारी के पहुंचते हैं, जिससे अक्सर यहां इस जर्जर भवन की छत के गिरने का भय बना रहता है। वहीं तेज हवा और आंधी में तो यहां और भी अधिक खतरा बना रहता है। इससे भी बुरा हाल राजकीय इंटर कॉलेज के पुराने भवन का भी है। यह स्कूल का भवन भी हर ओर से इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी तेज हवा या आंधी में जमींदोज हो सकता है। यहां तक कि आम दिनों में भी इसके गिरने का खतरा बना हुआ है। जबकि इस स्कूल भवन के किनारे से होकर ही हर रोज सैकड़ों स्कूली बच्चों का निकलना होता है। यही हाल कचहरी परिसर स्थित पुराने कलेक्ट्रेट भवन का भी है। पुराने कलेक्ट्रेट की जर्जर भवन के पास कचहरी परिसर में कई अधिवक्ता अपना बस्ता जमाकर विधि व्यवसाय करते हैं। पिछले डेढ़ वर्ष में इस भवन की छत से करीब तीन से चार बार बड़े पत्थरों के टुकड़े अचानक से जमीन पर गिरने से बड़ा हादसा होने से बचा है। जिसके चलते अधिवक्ताओं द्वारा पूर्व में जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर उक्त भवन की या तो मरम्मत कराए जाने या फिर उस भवन को पूरी तरह गिराने की मांग की थी। लेकिन प्रशासन द्वारा इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाने के कारण आए दिन यहां छत की पत्थरों के टुकड़े गिरता रहता है। जिससे अधिवक्ताओं में यहां से निकलने के दौरान हादसों का भय बना रहता है। यदि शीघ्र ही प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं तो इन स्थानों पर कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है। ऐसी ही कुछ स्थिति नझाई बाजार गेट की भी है, यह गेट भी काफी पुराना और मरम्मत आदि नहीं होने के कारण जर्जर हो चुका है। जबकि इस नझाई गेट से हर रोज हजारों लोगों व वाहनों का आना जाना है।
जर्जर हो चुके भवनों पर चेतावनी बोर्ड लगाकर उनमें आवाजाही को रोका जाएगा और उन भवनों के संबंध में नगर पालिका के माध्यम से आगे की कार्रवाई कराई जाएगी।
योगेंद्र बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकारी।