झांसी। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में तीन दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग कई मदों के लिए आए बजट को खर्च करने में जुटा हुआ है। ऐसे में स्कूल के बैंक खातों में धड़ाधड़ धनराशि भेजी जा रही है। शिक्षकों पर तीन दिन में कंपोजिट ग्रांट खर्च करने का दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही कहा गया है कि बिना वेंडर के कोई भी सामान नहीं खरीदा जाएगा। इस स्थिति में शिक्षक टेंडर-वेंडर ढूंढने में लगे हैं। जबकि इन कामों से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा 1452 स्कूलों को कंपोजिट ग्रांट के नाम पर छात्र संख्या के अनुसार बजट जारी किया गया है। छात्र संख्या के अनुसार 25 हजार से लेकर 1 लाख तक की ग्रांट स्कूलों के बैंक खातों में पहुंच चुकी है। लेकिन, ग्रांट खर्च करने की प्रक्रिया में शिक्षक चकरघिन्नी बन गए हैं। नियम के मुताबिक कंपोजिट ग्रांट से स्कूल का कोई भी सामान खरीदने से पहले उन्हें वेंडर ढूंढना होगा। इसके बाद ही शिक्षक सामान खरीद सकेंगे।
वहीं सोमवार को वार्षिक परीक्षा के खर्च की धनराशि भी स्कूलों के बैंक खाताें में भेजी जाने लगी है। शिक्षकों ने बताया कि उन पर तीन दिन में वेंडर ढूंढकर बजट खर्च करने का दबाव है। बता दें कि अबतक शिक्षक कंपोजिट ग्रांट का महज 40 प्रतिशत ही खर्च पाए हैं। शेष 60 प्रतिशत कंपोजिट ग्रांट तीन दिन में खर्च करने की कवायद जारी है। बताया जा रहा है कि तीन दिन में बजट खर्च नहीं किया तो पैसा लैप्स हो जाएगा।
बीएसए नीलम यादव के अनुसार वार्षिक परीक्षा के लिए परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद के लिए बजट जारी किया जा चुका है।
इस कारण कंपोजिट ग्रांट खर्च करने में हुई देरी
कंपोजिट ग्रांट के लिए स्कूलों के नए एसएमसी बैंक खाते खुलवाए गए थे। शिक्षकों ने बताया कि उनको जनवरी और फरवरी माह में बैंक खातों के संचालन के अधिकार मिले थे। लेकिन, ग्रांट खर्च कर पाने की प्रक्रिया पूरी तरह से नहीं बताई गई थी। मार्च महीने के पहले सप्ताह में शिक्षा विभाग ने बैंक खातों के संचालन के लिए प्रशिक्षण दिया गया।