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रेशम की डोर से बंधा भाई-बहन का प्यार

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कैप्सन - भाई को राखी बांधती बहन - फोटो : TALDEHATE
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ललितपुर। सोमवार को रक्षाबंधन पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर भाइयों से रक्षा का वचन लिया।
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भद्रा नक्षत्र सोमवार को सुबह साढ़े आठ बजे तक रहा। इसके बाद दिन भर रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त रहा। रक्षाबंधन पर लोगों ने भगवान ठाकुरजी की विधि विधान से पूजा- अर्चना की एवं भगवान को राखियां अर्पित कीं। मंदिरों में भी पूजा अर्चना कर भगवान को राखियां भेंटकर आरती की गई। कोरोना महामारी ले चलते बहुत सी बहनें भी घर नहीं आ सकीं, जिसके चलते उन्होंने डाक पोस्ट के माध्यम से भाइयों को राखी भेजी और फोन करके राखी बांधने को कहा।
जिला कारागार में अपराधिक मामलों में बंद चल रहे कैदियों और बंदियों के लिए कोरोना महामारी के चलते मिलाई बंद चल रही है। लेकिन, रक्षाबंधन को देखते हुए एक अगस्त को शाम के चार बजे तक बंदियों की बहनों द्वारा भेजी गई राखियां, रोली व चावल को जेल प्रशासन ने एक लिफाफा में लेकर एक ओर बहन और दूसरी ओर भाई का नाम लिखा और सोमवार को जेल प्रशासन ने जिला कारागार में बंदियों को लिफाफा भेंट किया। बंदियों ने खुशी-खुशी लिफाफा लेकर राखियां खुद ही अपनी कलाइयों पर बांधीं। रक्षाबंधन पर बंदियों को पूड़ी, सब्जी और हलवा खाने के रूप में दिया गया। जेल अधीक्षक सुरेश कुमार ने बताया कि डीजी जेल के निर्देशानुसार लिफाफा में भेजी गई राखियां सभी को उपलब्ध कराई गई हैं।
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तालबेहट/ बिरधा/ पाली/ पुलवारा। भाई-बहन के प्यार का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन कस्बा तालबेहट, पाली, बार, पुलवारा बिरधा एवं महरौनी के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह के साथ मनाया गया।
बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर आरती उतारी, फिर उनकी कलाई पर रेशम की डोरी से मजबूत बंधन में बांध कर रिश्ते को और मजबूत किया। उनकी लंबी आयु के लिए भगवान से प्रार्थना की। मिठाई खिलाकर बहनों ने जहां बड़े भाइयों से आशीर्वाद लिया, वहीं छोटों को आशीर्वाद भी दिया। भाइयों ने भी अपनी बहनों को उपहार देते हुए उनकी रक्षा का संकल्प लिया। कोरोना काल में इस बार आवाजाही से लोग बचे, लेकिन बहनों ने ऑनलाइन राखी भेजकर भाइयों की रक्षा की कामना की।
नदवनी बगीचा मंदिर के पुजारी चंद्रभान महाराज ने बताया कि युगों- युगों से राखी की मान्यता चली आ रही है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी ने पाताललोक जाकर राजा बलि को राखी बांधकर उन्हें भाई बनाया था। उधर, तालबेहट में भाई- बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व नगर एवं क्षेत्र में परंपरागत तरीके से मनाया गया। बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधी और भाइयों ने उन्हें रक्षा का वचन देते हुए उपहार भेंट किए। कोरोना संक्रमण के कारण इस बार न तो अधिक बसों के संचालन की अनुमति थी और न ट्रेन का इंतजाम था। इसके बावजूद लोगों में रक्षाबंधन मनाने का उत्साह एवं जोश कम नहीं हुआ। भाइयों ने इस बार उन्हें उपहार जैसे सैनिटाइजर, आंवला मुरब्बा, आंवला कैंडी आदि भेंट किए। ग्राम बिजरौठा, पूराकलां, कड़ेसरा कलां, भुचेरा आदि क्षेत्रों में भी रक्षाबंधन परंपरागत तरीके से मनाया गया।
सामाजिक दूरी का नहीं रखा गया ध्यान
रक्षाबंधन पर आवागमन के लिए बसों की कमी होने के कारण आसपास के गांवों को जोड़ने वाले गांवों में प्राइवेट वाहन चालकों ने खूब चांदी काटी। इस दौरान न तो सामाजिक दूरी का ध्यान रखा गया और न मॉस्क का उपयोग किया गया।
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रक्षाबंधन पर मिठाई की दुकानों पर भीड़ रही। रविवार की अपेक्षा सोमवार को बाजार में राखियां भी खूब बिकीं और मिठाई की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ रही। दुकानदार बीते रोज बाजार में पसरे सन्नाटे से चिंतित थे, लेकिन सोमवार को उमड़ी भीड़ के कारण उनकी दुकानों पर अच्छी ग्राहकी हुई।
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