ललितपुर/मड़ावरा। बरसात के मौसम में क्षतिग्रस्त पुलिया खतरनाक रूप लेती जा रही हैं। यह समस्या अकेले शहर की ही नहीं है, ग्रामीण क्षेत्रों में भी कई सड़कों की पुलिया क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। इसकी अनदेखी कर हल्के, बड़े वाहन इन पर से गुजर रहे हैं, जिससे वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का अंदेशा बना रहता है।
बारिश में पानी के कटाव से अक्सर पुलिया क्षतिग्रस्त हो जाती है, ऐसे में उनकी तुरंत मरम्मत की आवश्यकता होती हैं। इसके बाद भी जिम्मेेदार विभाग द्वारा ध्यान नहीं दिया जाता है। इसका खामियाजा स्थानीय लोगों को परेशान होकर भुगतना पड़ता है। शहर के मोहल्ला घुसयाना में हनुमान धारा लक्ष्मीनारायण मंदिर के रास्ते पर एक पुलिया बनी हुई है। लगभग दो साल से इस पुलिया की सुध नहीं ली गई है। शुरुआत में पुलिया के किनारे सड़क को छोड़ने लगे थे लेकिन इस पर वाहनों की आवाजाही बनी रही। इसके दवाब में धीरे-धीरे पुलिया का आधा हिस्सा एक ओर झुक गया। वर्तमान में पुलिया इस स्थिति में पहुंच गई है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। नगर पालिका परिषद के प्रतिनिधि कई बार नवीन पुलिया बनवाने का आश्वासन दे चुके हैं लेकिन अभी तक निर्माण प्रारंभ नहीं हो सका है।
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हनुमान धारा लक्ष्मीनारायण मंदिर से सैकड़ों लोगों की श्रद्घा है। जिस कारण तमाम लोग मंदिर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसके बाद भी मंदिर के रास्ते की उपेक्षा हो रही है। क्षतिग्रस्त पुलिया पर शायद कोई दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है।
प्रशांत शुक्ला
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हनुमान धारा मंदिर जाने के लिए रास्ते में नाला पड़ता है। इस पर वर्षों पहले पुलिया का निर्माण किया गया था जो अब धसक गई है। अन्य कोई रास्ता मंदिर जाने के लिए नहीं है। ऐसे में लोगों को उसी क्षतिग्रस्त पुलिया से होकर निकलना पड़ता है।
सुनील पटैरिया
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इस पुलिया की मरम्मत कराने के लिए कई बार मंदिर के महंत ने जिम्मेदारों से बात की। इस दौरान उन्हें आश्वासन ही हाथ लगा। मंदिर के रास्ते की क्षतिग्रस्त पुलिया का निर्माण वरीयता से कराना चाहिए।
मयंक वैद्य
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दो साल से क्षतिग्रस्त पुलिया की नहीं ली सुध
डोगरा खुर्द। ग्राम गुरयाना पारौल का रास्ता पूरी तरह खस्ताहाल हो गया है। न केवल पुलिया क्षतिग्रस्त है बल्कि सड़क पर छोटे-बड़े गड्ढे हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पर सङ़क को बनाते समय उसकी गुणवत्ता का बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया है। सड़क निर्माण में काली मिट्टी का प्रयोग किया गया है, जिस कारण बारिश होते ही सड़क पर छोटे-बड़े गड्ढे उभर आते हैं। जब इसका निर्माण कराया गया था, उसके ठीक चार महीने में ही सड़क खराब होने लगी थी। सड़क की मरम्मत के नाम पर लीपापोती की गई है। इससे ग्रामीणों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। इस सड़क से दर्जनों गांव के लोगों का आना-जाना रहता है। इसमें गौना, नाराहट, बछरई, मकरीपुर, ललितपुर, बनयाना, ककरूआ, अर्जुन खिरिया, तरावली, महाराजपुरा, बरेजा, दिगवार, डोंगराखुर्द, चांदोरा, गुढाखिरिया, गुरयाना, देवरी, सिंगवारा, पटना पारौल आदि गावों के राहगीर इसी सड़क से निकलते हैं। वाहन चालकों को खस्ताहाल सड़क से निकलने में परेशानी हो रही है। बरसात के समय सड़क के छोटे-बड़े गड्ढों में आए दिन वाहन फंस जाते हैं। करीब पांच किलोमीटर सड़क वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा सफर साबित हो रहा है। दर्शनीय स्थल पांडव वन जाने वाले दर्शनार्थियों एवं पर्यटकों को इसी सड़क से गुजरना पड़ता है। मकर संक्रांति पर पांडव वन में मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रृद्धालु पहुंचते हैं।
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मड़ावरा। कस्बा से हसरा संपर्क मार्ग पर बनी पुलिया के पास मिट्टी का कटाव होने लगा है। इससे वाहन चालकों को आने-जाने में असुविधा हो रही है। कई हल्के वाहन अनियंत्रित हो जाते हैं, ऐसे में वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का अंदेशा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि मड़ावरा से हसरा करीब आठ किलोमीटर पड़ता है और यहां से गिरार तक छह किलोमीटर का सफर है। इस तरह करीब चौदह किलोमीटर का रास्ता वाहन चालकों के लिए जोखिम भरा है। इस मार्ग से ग्राम हसरा, बम्होरी, दौरी, सेमरखेड़ा, मानपुरा, बड़वार, गर्रोलीमाफ, गिरार आदि के गांव के लोगों का आना-जाना रहता है।
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पुलिया निर्माण का टेंडर हो चुका है। ठेकेदार को निर्माण शुरू कराने के लिए आदेशित किया गया है। एक-दो दिन में निर्माण प्रारंभ होने की उम्मीद है।
रजनी साहू
अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद