करीब 12 घंटे बाद शाम को जैसे ही तीन एंबुलेंस से शव मोहल्ले में पहुंचे, परिजनों में चीख-पुकार मच गई। एक साथ छह अर्थियां मोहल्ले से श्मशान घाट के लिए निकलीं, तो माहौल गमगीन हो उठा और हर आंख नम हो गई।
सिलावन (ललितपुर)। सड़क हादसे में आठ लोगों की मौत से कस्बा महरौनी में गहरा शोक छा गया। हादसे की खबर मिलते ही सुबह से ही लोग मृतकों के घरों पर जुटने लगे। करीब 12 घंटे बाद शाम 6:40 बजे जैसे ही तीन एंबुलेंस से शव मोहल्ले में पहुंचे, परिजनों में चीख-पुकार मच गई। परिजन अपने-अपने प्रियजनों के शव घर ले गए। शाम करीब 7:15 बजे जब एक साथ छह अर्थियां मोहल्ले से श्मशान घाट के लिए निकलीं, तो माहौल गमगीन हो उठा और हर आंख नम हो गई। करीब डेढ़ किलोमीटर दूर बाईपास स्थित श्मशान घाट पर सभी का अंतिम संस्कार किया गया।
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टीकमगढ़ रोड स्थित खरवाचपुरा मोहल्ला, जहां एक दिन पहले तक मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर रौनक थी, वहां सोमवार को सन्नाटा पसरा रहा। हादसे की सूचना मिलते ही कई लोग सुबह ही घटनास्थल के लिए रवाना हो गए थे। इधर, कस्बे में शोक के चलते बाजार बंद रहा और कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। शाम को जब तीन एंबुलेंस से शव पहुंचे, तो खरवाचपुरा मोहल्ले में मातम का माहौल हो गया। इस दौरान राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ, पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, भाजपा जिलाध्यक्ष हरिश्चंद्र रावत, सपा जिलाध्यक्ष नेपाल सिंह सहित कई जनप्रतिनिधि व गणमान्य लोग मौजूद रहे।
पिता का शव देखते ही बेटी हुई बेहोश
मृतक मनोज भोड़ेले का शव घर पहुंचते ही उनकी बेटी बदहवास हो गई और रोते-रोते बेहोश हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने उसे संभाला और होश में लाने का प्रयास किया। यही मंजर अन्य मृतकों के घरों पर भी देखने को मिला, जहां महिलाओं और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था।
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मोहल्ले में पसरा सन्नाटा।
- फोटो : संवाद
दिनभर पसरा रहा सन्नाटा, गूंजती रहीं चीत्कारें
घटना के बाद पूरे दिन कस्बा महरौनी में सन्नाटा पसरा रहा। बाजार बंद रहे और लोगों के चेहरों पर गहरा दुख साफ झलकता रहा। खरवाचपुरा मोहल्ले में दिनभर परिजनों की चीख-पुकार सुनाई देती रही। शाम को शव पहुंचते ही चारों ओर से करुण क्रंदन की आवाजें गूंज उठीं, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।
राज्यमंत्री ने परिजनों को ढांढस बंधाया
राज्यमंत्री मनोहर लाल पंथ शाम को महरौनी पहुंचे और मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
हादसे से पहले अयोध्या में सरयू तट पर सेल्फी लेते हुए।
- फोटो : सोशल मीडिया
इनके परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
शशिकांत तिवारी : बेकरी का संचालन करते थे, एक पुत्र है।
कृष्णकांत नायक : शिक्षा विभाग में शिक्षक थे और अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। परिवार सहित ससुराल पक्ष की जिम्मेदारी भी उन पर थी और उसकी दो पुत्रियां हैं।
स्वामी प्रसाद तिवारी : निजी विद्यालय में शिक्षक थे और उनके दो पुत्र हैं।
मनोज भोड़ेले : माता-पिता की इकलौती संतान और भागवत आचार्य के साथ शास्त्री थे। उनकी दो पुत्री व एक पुत्र है।
देशराज नामदेव : इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे और इलेक्ट्रिकल्स की दुकान का संचालित करते थे। उनकी दो पुत्रियां हैं।
उमेश तिवारी : परिवार में सबसे छोटा था और अविवाहित था।
बृजभूषण तिवारी : किसान थे। दो बेटियां हैं, जिनमें वैष्णवी तिवारी ने इसी वर्ष इंटरमीडिएट की परीक्षा में टॉप-10 में स्थान पाया।
दीपक तिवारी : अविवाहित थे और निजी कार्य करते थे।