ललितपुर। देवगढ़ के पास स्थित बौद्ध गुफाओं को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पुरातत्व विभाग द्वारा 10 करोड़ रुपये का विकास का प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसके एप्रोच मार्ग, पैनल बोर्ड, बौद्ध गुफाओं तक जाने के लिए रेलिंग युक्त सीढ़ियां, पेयजल, बेंच आदि की व्यवस्था यहां पर की जाएगी। यह प्रस्ताव पुरातत्व विभाग द्वारा शासन को भेजा जाएगा और पर्यटकों की सुविधाओं के अनुसार काम कराया जाएगा।
बुंदेलखंड में ललितपुर के पुरातत्व स्थल देवगढ़ के पास बेतवा नदी के तट पर पहाड़ियों के बीच बौद्घ गुफाएं धार्मिकता के साथ ही पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्व का स्थल है। यह स्थल जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर गुप्तकालीन दशावतार मंदिर के पास प्राचीन बौद्ध गुफाएं स्थित हैं। यहां पर बौद्ध धर्म के लोग रहकर साधना करते थे और आसपास के गांव में भिक्षा मांगकर जीवन यापन किया करते थे। लंबे समय से रख-रखाव नहीं होने के कारण इनकी स्थिति खराब हो गई है। प्राकृतिक खूबसूरती और पुरातत्व संपदा से भरपूर ललितपुर के देवगढ़ में बौद्ध गुफा की खोज के बाद उसे राज्य पुरातत्व विभाग ने वर्ष 2018 में संरक्षण में लिया था। लेकिन रास्ता सुगम नहीं होने की वजह से यहां तक लोगों को पहुुंचने में काफी दिक्कत होती है, लेकिन अब बौद्ध गुफाओं का रास्ता सुगम बनाने के साथ पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना भी तैयार की गई है। इसके लिए पुरातत्व विभाग द्वारा करीब दस करोड़ रुपये की धनराशि से एक प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसमें बौद्ध गुफा तक पहुंचने के लिए एप्रोच रोड के अलावा पाथ वे, गुफा तक पहुंचने के लिए सीढ़ियां, रेलिंग आदि कार्य कराए जाएंगे। लोग शुुुद्ध पानी पी सके, इसके लिए पाइप पेयजल की सुविधा, पर्यटकों के घूमते फिरने पर थकने के दौरान बैठने के लिए छायादार बेंच आदि की सुविधा का इंतजाम भी किया जाएगा। इसके साथ ही पुुुरुष, महिलाएं और बच्चों के लिए भी विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
बुंदेलखंड में ललितपुर में ही बौद्घ गुफाएं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। यह बौद्ध गुफाएं छठवीं की हैं। बौद्ध गुफाओं तक एप्रोच रोड, बौद्घ गुफाओं तक पहुंचने के लिए रेलिंग युक्त सीढ़ियां, पेयजल आदि की सुविधाओं के लिए दस करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट बनाया गया है, जो शासन को भेजा जाना है। अभी बौद्ध गुफाओं पर मुख्य फोकस है। यहां अन्य कार्यों के लिए भी शासन से मांग की है, ताकि बौद्घ गुफाओं को मुख्य पर्यटन के रुप में विकसित किया जा सके।
-एसके दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी।