ललितपुर। नौतपा के दौरान पड़ने वाली प्रचंड गर्मी में पक्षी प्यासे न रहें, इसके लिए पक्षी प्रेमियों ने शहर में मिट्टी के बने बर्तन पेड़-पौधों, मकानों की दीवारों, छतों और दुकानों के बाहर टांगे रहे हैं, ताकि यहां प्यासे पक्षी आसानी से पहुंच सकें और उन्हें पानी भी आसानी से उपलब्ध हो सके। इसके लिए पक्षी प्रेमियों ने एक हजार मिट्टी के अलग-अलग प्रकार के पात्र बनवाए हैं। दुकानदारों व अन्य लोगों को यह पात्र बांटकर शपथ ली जा रही है कि मिट्टी के बर्तनों में पक्षियों के पीने के लिए पानी भरते रहेंगे।
सोमवार से नौतपा शुरु होने से गर्मी का प्रचंड रुप देखने को मिला। गर्मी से पूरे दिन तपन महसूस की गई। यह इस सीजन का सबसे गर्म दिन रहा। इस गर्मी से बचने के लिए इंसान तो किसी प्रकार कूलर, पंखा या अन्य साधनों से अपने को गर्मी से बचा लेते हैं, लेकिन इस गर्मी में पशु- पक्षी बेहाल होने लगते हैं। इसके लिए स्वयंसेवी संगठन मानव ऑर्गेनाइजेशन के अधिवक्ता पुष्पेंद्र सिंह चौहान की टीम द्वारा लगातार पिछले आठ वर्षों से गौरैया बचाव अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने इस वर्ष भी मिट्टी के एक हजार पात्र एवं दो सौ मिट्टी के घरौंदे बनवाए, ताकि गर्मी में पक्षियों को कुछ राहत मिल सके।
मिट्टी के पात्र दुकानदारों के टिन शेड व ऊंचाई वाले स्थानों पर टंगवाए जा रहे हैं। इन पात्रों को जगह - जगह वितरित किया जा रहा है, ताकि लोग घरों में भी ऊंचाई वाले स्थानों पर टांग सकें और पक्षी बर्तनों तक पहुंचकर पानी पीकर प्यास बुझा सकें। सोमवार से स्टेशन रोड से पात्र बांटने व टांगने का कार्य शुरु किया गया। यह पात्र कचहरी परिसर में भी टांगे जाएंगे और अधिवक्ताओं को पानी भरने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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गौरैया बचाओ अभियान के तहत यह कार्य आठ वर्षों से लगातार किया जा रहा है। इस बार एक हजार मिट्टी के पात्र बनवाए हैं, जो संपर्क में आने वाले एवं हर वार्ड के सदस्यों द्वारा लोगों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लोगों से आश्वासन भी लिया जा रहा है कि पात्र को प्रतिदिन साफ करके भरेंगे, ताकि पक्षियों को गर्मी के दिनों में पानी उपलब्ध हो सके।
- पुष्पेंद्र सिंह चौहान, अधिवक्ता।
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मिट्टी के पात्र टांगकर उनमें पक्षियों के लिए पानी भरना अच्छा प्रयास है। इस तरह के कार्यों की बहुत आवश्यकता है। हमें याद है कि बचपन में हमारे दादा, दादी घर में कई जगह मिट्टी के बड़े-बड़े पानी के पात्र रखकर कहते थे कि हमारे पूर्वज के रुप में पक्षी पानी पीने आते हैं।
- महेश कुमार व्यास, रिटायर्ड बैंक कर्मचारी।
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जब पानी के पात्र लेकर यह लोग हमारी दुकान पर आए तो एक पल के लिए मेरा बचपन मेरी आंखों के सामने आ गया, लेकिन जिंदगी की भागदौड़ ने हमें इतना स्वार्थी बना दिया कि हम पूूर्व में किए गए ऐसे नेक कार्यों को भी करने से भूलते जा रहे हैं। मिट्टी का पात्र मिलने पर उसे अपनी दुकान के सामने टांग लिया है और अब हर रोज इसे साफ करके इसमें पानी भरेंगे, ताकि पक्षियों के कंठ सूखे न रहें।
- अंकुश उपाध्याय, मेडिकल स्टोर संचालक, स्टेशन रोड।
त पर लकड़ी का घोंसला टांगते पुष्पेंद्र सिंह चौहान- फोटो : LALITPUR